शिवभक्तों को लगा बड़ा झटका! महंगी हुई कैलाश मानसरोवर यात्रा, अब हर यात्री को खर्च करने होंगे इतने रुपये

Kailash Mansarovar Yatra 2026: कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के लिए खर्च बढ़ गया है. अब यात्रियों को पहले से ज्यादा पैसे देने होंगे. जानिए नई कीमत, वजह और यात्रा से जुड़ी जरूरी जानकारी आसान भाषा में.

Published date india.com Published: May 6, 2026 11:27 PM IST
kailash mansarovar yatra 2026
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Kailash Mansarovar Yatra 2026: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से गुजरने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए इस बार खर्च बढ़ गया है. अब एक यात्री को करीब 2.09 लाख रुपये खर्च करने होंगे. पिछले साल यह खर्च करीब 1.74 लाख रुपये था. यानी इस बार लगभग 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है. जो लोग इस यात्रा की प्लानिंग कर रहे हैं, उन्हें पहले से ज्यादा बजट तैयार करना पड़ेगा.

इस बार खर्च बढ़ने की सबसे बड़ी वजह डॉलर का महंगा होना है. यात्रा का कुछ हिस्सा तिब्बत में पड़ता है, जहां फीस डॉलर में देनी होती है. इसमें वीजा, मेडिकल और दूसरे जरूरी खर्च शामिल होते हैं. डॉलर की कीमत बढ़ने से इन सबका खर्च सीधे बढ़ गया है. इसके अलावा भारत वाले हिस्से में भी महंगाई और बेहतर सुविधाओं के कारण कीमतों में बढ़ोतरी की गई है.

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भारतीय हिस्से में भी बढ़े रेट

भारत के हिस्से में रहने, खाने और गाइड जैसी सुविधाओं की जिम्मेदारी कुमाऊं मंडल विकास निगम संभालता है. इस बार निगम ने भी अपने चार्ज बढ़ा दिए हैं. अब भारतीय क्षेत्र में प्रति यात्री करीब 65 हजार रुपये खर्च होंगे. पहले के मुकाबले इसमें करीब 8 हजार रुपये की बढ़ोतरी की गई है. अधिकारियों के अनुसार, नए रेट तय कर दिए गए हैं और रजिस्ट्रेशन भी शुरू हो चुका है.

कब शुरू होगी यात्रा

इस साल कैलाश मानसरोवर यात्रा 4 जुलाई से शुरू होगी. योजना के अनुसार, कुल 10 जत्थे भेजे जाएंगे और हर जत्थे में 50 यात्री शामिल होंगे. यह यात्रा पहले 1962 के युद्ध के बाद बंद हो गई थी, लेकिन 1981 में दोबारा शुरू हुई. कोविड के समय भी इसमें रुकावट आई थी, लेकिन अब फिर से इसे नियमित तरीके से चलाया जा रहा है.

आस्था से जुड़ी खास यात्रा

कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील हिंदू धर्म में बहुत खास माने जाते हैं. लोगों का मानना है कि यह भगवान शिव का निवास स्थान है. यहां जाने और परिक्रमा करने से जीवन के पाप खत्म होते हैं और मन को शांति मिलती है. यही कारण है कि खर्च बढ़ने के बावजूद हर साल हजारों श्रद्धालु इस कठिन यात्रा पर जाने के लिए तैयार रहते हैं.

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