नई दिल्ली: लोकसभा की 4 और विधानसभा की 10 सीटों के लिए हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को जोर का झटका लगा है. जिन 4 लोकसभा सीटों पर उपचुनाव हुए हैं उनपर पहले बीजेपी और उसके सहयोगी दलों का कब्जा था लेकिन उपचुनाव के बाद आए नतीजों ने बीजेपी के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं. यूपी की कैराना लोकसभा सीट पर सबकी नजरें टिकी हुई थीं. इसका कारण था पिछले दिनों कैराना को लेकर हुआ विवाद, कैराना के पूर्व सांसद दिवंगत हुकूम सिंह ने कैराना से हिंदुओं के पलायन का आरोप लगाया था उस समय इस पर काफी चर्चा हुई थी हालांकि बाद में पलायन की वजह गुंडागर्दी बताई गई थी. Also Read - West Bengal Assembly Election: कांग्रेस का ममता बनर्जी को बड़ा ऑफर, कहा- पश्चिम बंगाल में मिलकर चुनाव लड़े TMC, बीजेपी से...

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उत्तर प्रदेश के कैराना में विपक्ष ने मिलकर चुनाव लड़ा था, सिर्फ कैराना में ही नहीं बल्कि यूपी में नूरपुर विधानसभा उपचुनाव में भी विपक्ष ने मिलकर चुनाव लड़ा और इसका नतीजा भी विपक्ष के पक्ष में ही आया. पहले हिंदुओं के पलायन और फिर जिन्ना विवाद को कैराना चुनाव में लाने का प्रयास किया गया लेकिन जनता ने इन सब विवादों को दरकिनार करते हुए विपक्षी एकता के पक्ष में अपना फैसला सुनाया. कैराना और नूरपुर में एक साथ मिलकर चुनाव लड़ने के बाद मिली जीत से उत्साहित नेता 2019 का रास्ता साफ होता देख रहे हैं.

कैराना में जीत के बाद आरएलडी की सांसद तबस्सुम हसन ने भी इस पर मुहर लगाई है, तबस्सुम ने कहा, ”ये सच की जीत है, मैंने वोटिंग के वक्त जो कहा था मैं अभी भी उस पर कायम हूं, हमारे खिलाफ साजिश की गई इसलिए हम भविष्य में कोई भी चुनाव ईवीएम मशीन से करवाने के पक्ष में नहीं हैं. 2019 के लिए संयुक्त विपक्ष का रास्ता साफ हो चुका है.”

बीजेपी से था सीधा मुकाबला

बता दें कि कैराना सीट पर सपा ने राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) उम्मीदवार को समर्थन दिया था तो वहीं, नूरपुर में रालोद ने सपा का सहयोग किया था. इसलिए कैराना और नूरपुर दोनों ही सीटों पर बीजेपी का मुकाबला विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार से था. कैराना में आरएलडी की तबस्सुम को कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी तीनों का समर्थन प्राप्त था तो वहीं नूरपुर में भी समाजवादी पार्टी के नईमुल हसन को कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी और रालोद का समर्थन प्राप्त था.

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इन दोनों ही सीटों के उपचुनाव के लिए गत 28 मई को वोट पड़े थे. मतदान के दौरान ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायतें आई थीं. इन शिकायतों को देखते हुए कैराना सीट पर बुधवार को 73 मतदान केन्द्रों पर पुनर्मतदान हुआ था.

निधन से खाली हुई थी सीट

बीजेपी सांसद हुकूम सिंह के फरवरी में निधन के कारण कैराना सीट पर उपचुनाव हुए थे. बीजेपी ने हुकूम सिंह के निधन के बाद उनकी बेटी मृगांका सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया था तो वहीं संयुक्त विपक्ष की ओर से तबस्सुम हसन उम्मीदवार थीं. वहीं, नूरपुर में बीजेपी विधायक लोकेन्द्र सिंह चैहान की सड़क दुर्घटना में मृत्यु के कारण उपचुनाव कराए गए थे.

नूरपुर में भी बीजेपी ने लोकेंद्र सिंह की पत्नी अवनि सिंह को चुनाव मैदान में उतारा था जबकि उनके सामने समाजवादी पार्टी के नईमुल हसन थे, नईमुल ने पिछले साल हुए यूपी विधानसभा चुनाव में भी लोकेंद्र सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ा था लेकिन तब वो जीत नहीं सके थे लेकिन इस बार विपक्षी एकता ने उनके सिर जीत का सेहरा बांध दिया.