नई दिल्ली: मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार बेहद मुश्किल में है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस से नाराज चल रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है. इस मुलाकात के बाद अब तय माना जा रहा है कि सिंधिया भाजपा सरकार को समर्थन देने जा रहे हैं या फिर भाजपा में शामिल हो रहे हैं. Also Read - मध्यप्रदेश में कोरोना वायरस के संक्रमण से एक और मौत, प्रदेश में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 47 हुई

भाजपा सूत्रों ने बताया है कि सिंधिया भोपाल में भाजपा की बैठक में भी शामिल हो सकते हैं. सरकार और पार्टी में उनकी और उनके समर्थक विधायकों की क्या भूमिका होगी, यह तय कर लिया गया है. सूत्रों ने बताया है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को पार्टी में शामिल भी किया जा सकता है. भाजपा इस बात को लेकर आश्वस्त है कि अगले दो-तीन दोनों में कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ जाएगी. Also Read - कांग्रेस ने सामूहिक पलायन पर सरकार से पूछे सवाल, कहा- गरीबों की जिंदगी मायने रखती है या नहीं

माना जा रहा है कि कांग्रेस के बागी विधायक विधानसभा अध्यक्ष को अपने इस्तीफे भेज सकते हैं. ऐसे विधायकों की संख्या 20 हो सकती है. यानी अगर ऐसा होता है तो कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ जाएगी और इसके बाद शिवराज सिंह चौहान सरकार बनाने का दावा पेश कर सकते हैं. माना जा रहा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को राज्यसभा भेजे जाने के साथ ही उनके कुछ समर्थक विधायकों को मंत्री पद भी दिया जा सकता है. Also Read - केजरीवाल ने लोगों को गीता पाठ करने की दी सलाह, कहा- गीता के 18 अध्याय की तरह लॉकडाउन के बचे हैं 18 दिन 

बता दें कि मध्य प्रदेश में 230 विधानसभा सीटें हैं. कांग्रेस के पास 114 विधायक हैं, जबकि सरकार बनाने का जादुई आंकड़ा 115 है. कांग्रेस को चार निर्दलीय, दो बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और एक समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक का समर्थन हासिल है. इस तरह कांग्रेस के पास कुल 121 विधायकों का समर्थन है. वहीं भाजपा के पास 107 विधायक हैं.

 

(इनपुट-एजेंसी)