नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने अपने खिलाफ राजद्रोह का केस चलाने की मंजूरी मिलने के बाद कहा है कि उनके खिलाफ केस को दिल्ली पुलिस और सरकारी वकील गंभीरता से लें. साथ ही कन्हैया ने परमिशन देने के लिए दिल्ली की केजरीवाल सरकार को भी धन्यवाद कहा है. Also Read - Delhi: CM Kejriwal ने माता-पिता के साथ ली कोरोना वैक्सीन, LNJP हॉस्पिटल में कराया टीकाकरण

दरअसल शुक्रवार को दिल्ली सरकार ने राजद्रोह के एक मामले में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार और दो अन्य लोगों पर मुकदमा चलाने के लिए दिल्ली पुलिस को मंजूरी दे दी. पुलिस ने 2016 के इस मामले में कुमार के साथ ही जेएनयू के पूर्व छात्रों उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था. Also Read - इंजीनियरिंग की, मिस इंडिया दिल्ली बनीं, अब पॉलिटिक्स करेंगी 21 साल की ये मॉडल, अरविंद केजरीवाल की...

मंजूरी के बाद कन्हैया ने ट्वीट कर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने लिखा- “दिल्ली सरकार को सेडिशन केस की परमिशन देने के लिए धन्यवाद. दिल्ली पुलिस और सरकारी वक़ीलों से आग्रह है कि इस केस को अब गंभीरता से लिया जाए, फॉस्ट ट्रैक कोर्ट में स्पीडी ट्रायल हो और TV वाली ‘आपकी अदालत’ की जगह क़ानून की अदालत में न्याय सुनिश्चित किया जाए. सत्यमेव जयते.” Also Read - अरविंद केजरीवाल ने कहा- किसानों के लिए डेथ वारंट हैं कृषि कानून, लाल किले पर बीजेपी ने कराई थी हिंसा

अपने दूसरे ट्वीट में कन्हैया ने लिखा- “सेडिशन केस में फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट और त्वरित कार्रवाई की जरुरत इसलिए है ताकि देश को पता चल सके कि कैसे सेडिशन क़ानून का दुरूपयोग इस पूरे मामले में राजनीतिक लाभ और लोगों को उनके बुनियादी मसलों से भटकाने के लिए किया गया है.”

उल्लेखनीय है कि नौ फरवरी 2016 को जेएनयू परिसर में संसद हमले के दोषी अफजल गुरु और मकबूल बट को दी गई फांसी के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन का आयोजन किया गया था. इस मामले में कन्हैया, उमर खालिद और अनिर्बान को गिरफ्तार किया गया था. उनपर आरोप है कि उन्होंने देश विरोधी नारेबाजी का समर्थन किया था. कन्हैया उस वक्त जेएनयूएसयू के अध्यक्ष थे. इस गिरफ्तारी के खिलाफ देशभर में अलग-अलग विश्वविद्यालय परिसरों में विरोध-प्रदर्शन देखने को मिला था. हालांकि, बाद में तीनों को जमानत दे दी गई थी.