UP के इस शहर में कुत्तों को हुई उम्रकैद, जानिए किस जुर्म में मिली इतनी सख्त सजा?

Dogs Lifetime: नगर निगम ने आवारा और हमलावर कुत्तों के लिए आजीवन कारावास लागू किया है. जानिए इन्हें किस अपराध में सजा मिली है और रिहाई की शर्तें.

Published date india.com Published: December 22, 2025 10:04 PM IST
UP के इस शहर में कुत्तों को हुई उम्रकैद, जानिए किस जुर्म में मिली इतनी सख्त सजा?

यूपी के कानपुर में नगर निगम ने आवारा और हमलावर कुत्तों के खिलाफ एक अनोखा कदम उठाया है. अब शहर में केवल इंसानों को ही नहीं, बल्कि उन कुत्तों को भी उम्रकैद दी जा रही है. यह कदम बढ़ते आवारा कुत्तों के हमलों और लोगों में डर फैलने की वजह से उठाया गया है. नगर निगम का मकसद साफ है – नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और शहर में आवारा कुत्तों के आतंक को रोकना.

ABC सेंटर – कुत्तों का काला पानी

कानपुर में एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर को अब उन कुत्तों के लिए जेल की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, जो बार-बार हमले करते हैं. प्रशासन ने स्पष्ट नियम बनाए हैं. यदि कोई कुत्ता किसी व्यक्ति को एक बार काटता है, तो उसे 10 दिनों के लिए सेंटर में रखा जाएगा. वहीं अगर वही कुत्ता दोबारा हमला करता है या दो से अधिक लोगों को नुकसान पहुँचाता है, तो उसे हमेशा के लिए सेंटर में कैद कर दिया जाएगा. इस नीति से कुत्तों के हमलों पर जीरो टॉलरेंस दिखाई देती है.

कितने कुत्तों को मिली उम्रकैद?

इस अभियान के तहत अब तक कानपुर में 4-5 कुत्तों को आजीवन कारावास की सजा दी जा चुकी है. चौंकाने वाली बात यह है कि सिर्फ गली के आवारा कुत्ते ही नहीं, बल्कि कुछ पालतू कुत्ते भी इस लिस्ट में शामिल हैं. इन पालतू कुत्तों के मालिकों ने उन्हें काबू में नहीं रखा, जिससे ये जानलेवा साबित हुए. इस तरह नगर निगम ने स्पष्ट संदेश दिया है कि कोई भी कुत्ता, चाहे आवारा हो या पालतू, अगर लोगों के लिए खतरा बनता है, उसे बख्शा नहीं जाएगा.

जेल में सुविधाएं भी दी जाएंगी

भले ही इसे सजा कहा जा रहा है, लेकिन नगर निगम ने कुत्तों के लिए मानवीय दृष्टिकोण भी अपनाया है. इन कुत्तों को ABC सेंटर में बेहतर खान-पान और मेडिकल सुविधाएं दी जा रही हैं. चीफ वेटरनरी ऑफिसर डॉ. आर.के. निरंजन का कहना है कि मकसद कुत्तों को प्रताड़ित करना नहीं, बल्कि जनता को सुरक्षित रखना है. इसके साथ ही शहर में नसबंदी अभियान तेजी से चलाया जा रहा है, ताकि भविष्य में आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित रहे.

रिहाई के नियम क्या है?

कानपुर प्रशासन ने यह भी तय किया है कि इन कुत्तों को तभी छोड़ा जाएगा, जब कोई व्यक्ति पूरी जिम्मेदारी लेने को तैयार हो. गोद लेने वाले को लिखित हलफनामा देना होगा कि कुत्ता दोबारा किसी पर हमला नहीं करेगा. साथ ही कुत्ते के शरीर में माइक्रोचिप लगाई जाएगी ताकि उसकी हर हरकत पर प्रशासन की नजर रहे. इस तरह नगर निगम ने आवारा और हमलावर कुत्तों के लिए कड़े नियम बनाकर शहर में सुरक्षा और जिम्मेदारी दोनों सुनिश्चित कर दी हैं.

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