नई दिल्‍ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजेपी कार्यकर्ताओं को कड़ी मेहनत और समर्पण के मामले में पार्टी के राष्ट्रीय अध्‍यक्ष अमित शाह से सीख लेने को कहा है. क्‍योंकि अमित शाह ने कर्नाटक चुनावों के दौरान राज्‍य में 34 दिन बिताए हैं. इस दौरान उन्‍होंने 59 सार्वजनिक रैलियां की. इसके अलावा 25 रोड शो भी किए. इसके साथ ही उन्‍होंने राज्‍य के 28 जिलों में 57135 किलोमीटर की यात्रा कर भाजपा की जीत सुनिश्चित की. क्‍योंकि पिछले साल दो उपचुनाव हारने के बाद कार्यकर्ताओं का उत्‍साह कम हो गया था. Also Read - राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हालातों पर हुई बातचीत

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इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा के राष्ट्रीय अध्‍यक्ष अमित शाह ने चुनावों से पहले ही पार्टी के लिए कार्यकर्ताओं का नेटवर्क तैयार कर लिया था. शाह ने मतदाताओं पर विस्तृत जानकारी इकट्ठा करने और मोदी सरकार के कल्याण कार्यक्रमों के विवरण के साथ उन तक पहुंचने के लिए विभिन्न स्तरों पर काम करने के लिए हर क्षेत्र में नेताओं को तैनात किया. कर्नाटक चुनाव से जुड़ी हर संभावित तैयारी अमित शाह दो महीने पहले ही कर चुके थे. उन्‍होंने प्रचार के वक्‍त सिर्फ प्रचार किया. करीब 59 जनसभाएं की और 25 से ज्‍यादा रोड शो किए. अमित शाह ने चुनाव से पहले ही तय कर दिया था कि हर विधानसभा क्षेत्र में कार्यकर्ताओं का नेता कौन होगा. शाह की नजर में बूथ लेवल के कार्यकर्ताओं पर भी रही. अमित शाह जिला लेवल से लेकर बूथ लेवल तक के कार्यकर्ता सम्‍मेलन में भी शामिल हुए.

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सिद्धारमैया सरकार पर किया हमला, मठों में गए अमित शाह

लिंगायत वोटरों को अपने साथ मिलाने के लिए अमित शाह राज्‍य के कई मठों में गए. इसके बाद उन्‍होंने तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री सिद्धारमैया और उनके मंत्रियों पर हमले करने शुरू किए. अमित शाह ने सिद्धारमैया सरकार पर हमले करते हुए कहा कि सिद्धारमैया सरकार अहिंदा नहीं है(अल्पसंख्यकों, पिछड़े वर्गों और दलितों के लिए कन्नड़ संक्षिप्त नाम), अहिन्‍दू (हिंदू विरोधी) हैं. इसका उद्देश्य लिंगायत वोटों को बीजेपी के साथ बरकरार रखना था. लिंगायत समुदाय के समर्थन के लिए अमित शाह मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा के भरोसे नहीं थे. बल्कि उन्‍होंने पूरे प्रदेश के प्रचार की कमान पहले सप्ताह से ही अपने पास रखी.