कांग्रेस का मास्टरप्लान जिसके आगे चित हो गई अमित शाह की रणनीति

15 मई को चुनाव नतीजे आने के साथ ही बेंगलुरू और दिल्ली में गहमागहमी शुरू हो गई थी.

Published: May 19, 2018, 4:57 PM IST

नई दिल्ली। लंबे समय के बाद कांग्रेस के लिए कोई खुशखबरी आई है. कर्नाटक की सियासी जंग में कांग्रेस बीजेपी पर भारी पड़ी. चुनाव नतीजे आने के दिन से ही कांग्रेस ने रणनीति पर काम करना शुरू किया जिसकी काट बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भी नहीं पा सके. कांग्रेस इस तरह की रणनीति बनाने में गोवा में चूक गई थी और सबसे बड़ी पार्टी नहीं होने के बावजूद वह सरकार नहीं बना सकी. लेकिन इस बार कांग्रेस ने पूरी सावधानी बरतते हुए कर्नाटक में बीजेपी का गेम ही पलट दिया.

चुनाव नतीजे के दिन से ही सरगर्मी

15 मई को चुनाव नतीजे आने के साथ ही बेंगलुरू और दिल्ली में गहमागहमी शुरू हो गई थी. कांग्रेस ने गुलाम नबी आजाद और अशोक गहलोत को तुरंत बेंगलुरू भेज दिया. कांग्रेस महज 78 सीटों पर ही सिमट गई और बीजेपी 104 सीटें लाकर बहुमत के करीब आकर अटक गई. जेडीएस को 37 सीटें मिलीं. कांग्रेस ने अपनी रणनीति के तहत जेडीएस के कुमारस्वामी को सीएम बनाने की बात कहते हुए बिना शर्त समर्थन का ऐलान कर दिया.

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कांग्रेस के दांव की काट नहीं थी

थोड़े इंतजार के बाद कुमारस्वामी भी इसके लिए राजी हो गए. बीजेपी के लिए ये ऐसा दांव था जिसकी काट मिलना बहुत मुश्किल था और आखिर में हुआ भी यही. कुमारस्वामी ने शायद सोचा भी नहीं होगा कि उन्हें बिना सियासी मोलभाव किए ही सीएम बनने का मौका मिल जाएगा. कहां तो उन्हें किंगमेकर बताया जा रहा था, लेकिन वह किंग बनकर उभरे. बीजेपी की सरकार न बन सके इसके लिए कांग्रेस ने उस जेडीएस को समर्थन दे दिया जिसे वह बीजेपी और संघ की बी टीम बताती आ रही थी. लेकिन राजनीतिक मजबूरी ने दोनों को करीब ला दिया.

कांग्रेस का दूसरा मास्टरस्ट्रोक

कांग्रेस का दूसरा मास्टरस्ट्रोक ये था कि जैसे ही राज्यपाल ने बीजेपी को सरकार बनाने का न्योता दिया वह उसी रात सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई और रात में ही सुनवाई की मांग की. कांग्रेस की कोशिश रंग लाई और कोर्ट ने बुधवार आधी रात 2 बजे सुनवाई की. अगली अहम सुनवाई गुरुवार 17 मई सुबह 10.30 बजे हुई जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि ये येदियुरप्पा सरकार को 19 मई दोपहर 4 बजे ही बहुमत साबित करना होगा और येदियुरप्पा में नाकाम रहे.

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