नई दिल्ली: देश में होने वाले चुनाव दिन प्रतिदिन महंगे होते जा रहे हैं. बात चाहे लोकसभा चुनाव की हो या विधानसभा चुनाव की, हर चुनाव पिछले चुनाव से ज्यादा महंगा होता जा रहा है. हाल ही में हुए कर्नाटक विधानसभा चुनाव में रुपए खर्च करने का एक नया रिकॉर्ड बन गया है. सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज (सीएमएस) की एक रिपोर्ट के अनुसार 12 मई को हुआ कर्नाटक विधानसभा चुनाव राजनीतिक पार्टियों और उनके द्वारा खर्च किए गए धन के मामले में देश में आयोजित ‘अब तक का सबसे महंगा’ विधानसभा चुनाव रहा.

एक गैर सरकारी संगठन और थिंक टैंक के रूप में काम करने वाला सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज ने अपने सर्वे में कर्नाटक चुनाव को ‘धन पीने वाला’ चुनाव बताया है. सीएमएस के अनुसार विभिन्न राजनीतिक पार्टियों और उनके उम्मीदवारों द्वारा कर्नाटक चुनाव में 9,500-10,500 करोड़ रुपए के बीच धन खर्च किया गया. यह खर्चा राज्य में आयोजित पिछले विधानसभा चुनाव के खर्च से दोगुना है. इस सर्वे की बड़ी बात ये है कि इसमें प्रधानमंत्री के अभियान में हुआ खर्चा शामिल ही नहीं है.

पिछले 20 वर्षों के सीएमएस द्वारा किए गए जमीनी सर्वेक्षण से यह पता चलता है कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव में हुआ खर्चा आम तौर पर देश के दूसरे राज्यों के विधानसभा चुनाव में हुए खर्चे से ज्यादा है. सर्वेक्षण में बताया गया है कि कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु देश में विधानसभा चुनाव में खर्चे के मामले में सबसे आगे हैं.

कर्नाटक चुनावः 53 हेलिकॉप्टरों से ‘गर्दा उड़ा’ रही बीजेपी, 10 चॉपर के भरोसे कांग्रेस

सीएमएस के एन भास्कर राव ने कहा कि खर्च की दर अगर यही रही तो 2019 के लोकसभा चुनाव में 50,000-60,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. पिछले लोकसभा चुनाव में 30,000 करोड़ रूपया खर्च हुआ था. कर्नाटक में 12 मई को चुनाव आयोजित किया गया था और मतों की गिनती मंगलवार को होगी.

सर्वेक्षण में पाया गया कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव में जो कुल चुनावी खर्च हुआ हैं, उसमें व्यक्तिगत उम्मीदवारों का खर्चा 75 फीसदी तक बढ़ गया है. संगठन ने एक बयान में कहा कि ऐसे में लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार का खर्चा 55-60 फीसदी बढ़ने की संभावना है जबकि राजनीतिक पार्टियों का खर्चा 29-30 फीसदी तक बढ़ने की संभावना है, जो कि 12,000-20,000 करोड़ रूपये तक बढ़ सकता है.

इससे पहले चुनाव में खर्च को लेकर एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने भी अपनी एक रिपोर्ट पेश की थी. इस रिपोर्ट में बताया गया था कि कर्नाटक में चुनाव प्रचार के लिए बीजेपी, कांग्रेस और जेडीएस ने कितने हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल किया है. दरअसल हेलिकॉप्टरों की मांग से विभिन्न दलों की ‘अमीरी’ और ‘गरीबी’ का भी पता चलता है. एडीआर के अनुसार पिछले वित्त वर्षों में भाजपा की आय 81 प्रतिशत बढ़ी है.

इस हिसाब से ‘अमीर’ भाजपा ने कर्नाटक चुनाव में प्रचार के लिए निर्वाचन आयोग के पास हेलिकॉप्टर सेवा की मांग से संबंधित 53 आवेदन दिए थे. वहीं एडीआर के अनुसार कांग्रेस की आय में 14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, इसलिए इस ‘गरीब’ पार्टी ने कर्नाटक चुनाव में प्रचार के लिए सबसे कम 10 हेलिकॉप्टरों का आवेदन आयोग को दिया था. कर्नाटक चुनाव में हेलिकॉप्टरों की मांग में दूसरे स्थान पर जनता दल (एस) रही, जिसने निर्वाचन आयोग को हेलिकॉप्टर-प्रचार के लिए 16 आवेदन सौंपे थे.