नई दिल्ली। कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी को भले ही बहुमत से कम सीटें मिली हों लेकिन वह वहां सबसे बड़े सियासी दल के तौर पर उभरकर सामने आई है और एक बार फिर सियासी मानचित्र पर उसने अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है. भाजपा और कांग्रेस – जेडीएस भले ही राज्यपाल के पास सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं लेकिन अभी यह साफ नहीं है कि यह भाजपा के खाते में आने वाला नया राज्य होगा या नहीं. इसे लेकर बेंगलुरू में सियासी गहमागहमी का दौर जारी है. बीजेपी की तरफ से बीएस येदियुरप्पा ने राज्यपाल वजुभाई वाला से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया. जेडीएस नेता कुमारस्वामी भी कांग्रेस नेताओं के साथ राजभवन पहुंचे और राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया. अब नजरें राज्यपाल पर है कि वह किसे सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते हैं. बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है लेकिन बहुमत से कुछ दूर रही गई, जबकि कांग्रेस ने जेडीएस के कुमारस्वामी को सीएम पद के लिए समर्थन का ऐलान कर बीजेपी के मंसूबों पर पानी फेर दिया. अब अगले कुछ दिन कर्नाटक में सियासी उठापटक और गहमागहमी का दौर रहने वाला है. Also Read - नए कृषि कानूनों को 'ठीक से समझ' नहीं पाए हैं आंदोलनकारी किसानः सदस्य, नीति आयोग

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भाजपा ने राज्य की 222 सीटों में से 104 सीटों पर कब्जा जमा लिया. कांग्रेस की सीटें सिमटकर 78 रह गईं. भाजपा ने 2013 में यहां सिर्फ 40 सीटें जीती थीं. जेडीएस महज 37 सीटों पर जीत पाई. आंकड़ा बता रहा है कि मोदी का मैजिक कम हुआ हो लेकिन खत्म नहीं हुआ है. मोदी के पीएम बनने के बाद से बीजेपी ने 11 राज्यों में अकेले या सहयोगियों के साथ सरकार बनाई है. कर्नाटक की सफलता ने बीजेपी को 2019 के आम चुनाव के लिए नया हौसला दे दिया है. अगर बीजेपी को

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29 में से 20 राज्यों में बीजेपी और सहयोगी

भाजपा और उसके सहयोगी देश के 29 राज्यों में से फिलहाल 20 में सत्ता में हैं. इनमें से 16 राज्यों में पार्टी का बहुमत है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2014 में सत्ता में आने और उनके करीबी सहयोगी अमित शाह के पार्टी का नेतृत्व संभालने के बाद भाजपा एक के बाद राज्यों में सत्ता में आती जा रही है.

केंद्र में सरकार बनने के बाद 11 राज्यों पर कब्जा

केंद्र में मोदी सरकार बनने से पहले महज पांच राज्यों में बीजेपी की सरकार थी. केंद्र में आने के बाद उसने 11 और राज्य अपनी झोली में डाले हैं. भाजपा महासचिव राम माधव ने कहा कि कर्नाटक के साथ ही उनकी पार्टी का दक्षिण फतह का अभियान शुरू हो गया है. इसके विपरीत राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की मौजूदगी लगातार कम होती दिख रही है और अब केंद्र शासित पुड्डुचेरी के अलावा पार्टी की महज दो राज्यों पंजाब और मिजोरम में सरकार है.

बीजेपी का मिशन दक्षिण भारत होगा मजबूत

जेडीएस के साथ कांग्रेस का गठबंधन अगर बनता है तो वह कर्नाटक में सरकार बनाकर भाजपा के खाते में इस राज्य को जाने से रोक सकती है. कांग्रेस पहले ही पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा के नेतृत्व वाली पार्टी को अपने समर्थन की पेशकश कर चुकी है. केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि उनकी पार्टी के आलोचक हर चुनाव से पहले उसकी संभावनाओं पर सवाल उठाते हैं लेकिन अंत में नतीजों की घोषणा के साथ उन्हें अपने शब्द वापस लेने पड़ते हैं. कर्नाटक के चुनाव में भगवा पार्टी को मिली बढ़त दक्षिणी राज्यों खासकर केरल , तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में उसे अपने पांव और मजबूत करने में मदद करेगी.