बेंगलुरु. कर्नाटक में इसी साल अप्रैल में विधानसभा चुनाव होने हैं और इसी के चलते तमाम पार्टियों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं. रविवार को पीएम मोदी ने राज्य की राजधानी बेंगलुरु में एक रैली को संबोधित किया और सूबे की सरकार पर जमकर हमला बोला. पूरा दिन ट्विटर पर भी मोदी की रैली की चर्चा थी. कर्नाटक सरकार पर लगे आरोपों के जवाब देने के लिए खुद सीएम सिद्धारमैया सामने आए. सिद्धारमैया ने कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के शासन काल के दौरान हुई उपलब्धियों का जिक्र किया और सरकार पर लगे आरोपों पर पलटवार भी किया. Also Read - कोविड-19: पीएम मोदी ने बताए स्वस्थ रहने के नुस्खे, कहा- साल भर गर्म पानी पीता हूं और...

पीएम ने कर्नाटक में रैली कर हत्याओं पर भी टिप्पणी की थी. सिद्धारमैया ने कहा कि उनके शासनकाल में कितने लोग मारे गए? 2 हजार और हरियाणा में कानून व्यवस्था की क्या स्थिति है? बीजेपी जहां कहीं भी सत्ता में है, अल्पसंख्यकों के लिए कोई सुरक्षा नहीं है. सिद्धारमैया बीजेपी के आरोपों का जवाब खुद दे रहे हैं. Also Read - कोरोना वायरस के 'इलाज और टीके' के लिए पीएम मोदी ने की फ्रांस के राष्ट्रपति से बात

BJP President was involved in murder case, he only speaks lies: Karnataka CM Siddaramaiah | सिद्धारमैया का मोदी पर पलटवार- ‘मर्यादा और तथ्यों से लड़ने दें कर्नाटक चुनाव’

BJP President was involved in murder case, he only speaks lies: Karnataka CM Siddaramaiah | सिद्धारमैया का मोदी पर पलटवार- ‘मर्यादा और तथ्यों से लड़ने दें कर्नाटक चुनाव’

वैसे गुजरात विधानसभा चुनाव और फिर राजस्थान उप चुनाव में बीजेपी के प्रदर्शन के बाद सियासी पंडित कह रहे हैं कि कर्नाटक का चुनाव पार्टी के लिए आसन नहीं होगा. शायद यही वजह है कि पार्टी इस चुनाव में पूरी मेहनत कर रही हैं. कांग्रेस हालिया प्रदर्शन से काफी उत्साहित है. कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पूरी आक्रामकता से बीजेपी के हर इल्जामों का जवाब दे रहे हैं और इससे बीजेपी के रणनीतिकार भी सकते में हैं. Also Read - मन को खुश रखने के लिए हफ्ते में 1-2 बार ये काम करते हैं पीएम मोदी, शेयर किया वीडियो

विधानसभा चुनावों से पहले सिद्धारमैया ने ऐसी रणनीति बनाई है जिसके बाद बीजेपी को उन्हें हराने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी. आइये जानते है सिद्धारमैया की रणनीति.

कन्नड़ अस्मिता

बीजेपी कर्नाटक चुनाव में हिंदुत्व कार्ड खेल रही है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी पिछले दिनों राज्य में गए थे. मगर सिद्धारमैया ने इसका तोड़ खोज लिया है. उन्होंने बीजेपी के हिंदुत्व के जवाब में कन्नड़ अस्मिता का कार्ड खेला है. उन्होंने राज्य के लिए अलग झंडा, साइनबोर्ड्स जैसे मुद्दे उठाये है. सीएम ने सूबे के स्कूलों में कन्नड़ भाषा को अनिवार्य कर दिया. साथ ही उन्होंने कन्नड़ मीडियम स्टूडेंट्स को राज्य के सविल सर्विसेज में 5 पर्सेंट रिजर्वेशन देने का फैसला भी किया.

ऐसा कहा जाता है कि हाल ही में बेंगलुरु मेट्रो स्टेशन से हिंदीभाषा के बोर्ड हटाने के आंदोलन को भी सिद्धारमैया का समर्थन हासिल था. बताया जाता है कि वह इस आन्दोलन के जरिए वह बीजेपी के हिंदुत्व कार्ड को काउंटर करने की रणनीति बना रहे हैं. वह हिंदुत्व का जवाब कन्नड़ भाषा अस्मिता के जरिए देना चाहते हैं.

महादायी नदी विवाद

महादायी नदी के पानी को लेकर गोवा और कर्नाटक के बीच विवाद चल रहा है. महादायी नदी उत्तरी कर्नाटक की जीवनरेखा है और सीएम इस मुद्दे को भी भुनाने के प्रयास में हैं. वैसे इस मसले ने बीजेपी को बैकफुट पर नजर आ रही है.

लिंगायत समाज का समर्थन

बीजेपी जहां हिंदू वोटों को एकजुट करने की कोशिश कर रही है वहीं, सिद्धारमैया की नजर लिंगायत वोटों पर है. वह लिंगायतों के एक तबके की अलग धर्म के तौर पर मान्यता देने की मांग का समर्थन कर रहे हैं. राज्य की आबादी में लिंगायतों की हिस्सेदारी 15-17 पर्सेंट है. बीजेपी के हिंदुत्व कार्ड को बेअसर करने के लिए वह लिंगायत कार्ड खेल रहे हैं.

आरक्षण

सिद्धारमैया ने सूबे की जनता से वादा किया है कि वह पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों को 70 पर्सेंट तक आरक्षण देंगे. फिलहाल यह आरक्षण 50 पर्सेंट है.

सोशल मीडिया का इस्तेमाल

सिद्धारमैया सोशल मीडिया पर भी बेहद ऐक्टिव हैं. वह इसके जरिए अपनी सरकार की उपलब्धियों को लोगों को बताते हैं, साथ ही अलग धर्म का दर्जा देने के लिए आंदोलन चला रहे लिंगायत समुदाय के विभाजन पर भी नजर बनाए हुए हैं.

अल्पसंख्यक समाज को जोड़ने की कोशिश

राज्य में ओवैसी भी अपनी जगह बनाने के प्रयास कर रहे हैं ऐसे में सिद्धारमैया ने टीपू सुल्तान जयंती मनाकर उन्हें भी फेल करने के प्रयास किए हैं. राज्य का अल्पसंख्यक समाज उनसे जुड़ता नजर आ रहा है.

इसके आलावा बीजेपी राज्य में सत्ता विरोधी लहर नहीं जगा पाई है. कर्नाटक में बीजेपी को 2014 आम चुनावों के दौरान लोगों का समर्थन जरूर मिला था मगर तब पीएम मोदी की लहर थी. मगर उसके बाद से बीजेपी कभी भी सिद्धारमैया को मुश्किल में नहीं डाल पाई है. भ्रष्टाचार के मुद्दे पर उन्होंने कांग्रेस को घेरने की कोशिश जरूर की मगर हासिल कुछ नहीं हुआ. वहीं, कर्नाटक बीजेपी में भी अंदरूनी कलह है. पार्टी का एक बड़ा तबका येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री नहीं बनने देना चाहता.

ऐसे में सिद्धारमैया को हराना बीजेपी के लिए आसन नहीं होगा.