नई दिल्ली। गोवा और मणिपुर विधानसभा चुनाव नतीजों से सबक लेते हुए कांग्रेस कर्नाटक में जोखिम मोल लेने के मूड में नहीं है और शायद यही वजह है कि उसने ‘प्लान बी’ के तहत सोमवार को अपने दो वरिष्ठ नेताओं अशोक गहलोत और गुलाम नबी आजाद को बेंगलुरू रवाना कर दिया. माना जा रहा है कि कई एग्जिट पोल में कर्नाटक विधानसभा चुनाव नतीजों में खंडित जनादेश की तस्वीर सामने आने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी गोवा और मणिपुर जैसी स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयारी रखना चाहते हैं.

पार्टी के एक पदाधिकारी ने बताया कि वैसे तो हमें पूरा भरोसा है कि कांग्रेस को कर्नाटक में पूर्ण बहुमत मिलेगा, लेकिन कई चैनलों के एक्जिट पोल के नतीजों को ध्यान में रखते हुए पार्टी हर तैयारी रखना चाहती है. आप इसे प्लान बी भी कह सकते हैं. इसी के तहत दोनों वरिष्ठ नेताओं को कर्नाटक भेजा गया है.

गोवा-मणिपुर में खाई थी मात

गौरतलब है कि पिछले साल गोवा और मणिपुर विधानसभा चुनावों में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद सत्ता से दूर रह गई थी और इन दोनों राज्यों में भाजपा सरकार बनाने में सफल रही थी. कर्नाटक में मंगलवार को 222 सीटें के नतीजे आएंगे. अधिकतर एक्जिट पोल में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिलने का अनुमान लगाया गया है.

Exit Poll Results: कर्नाटक में किसकी बन रही सरकार, किसे कितनी सीटें?

इसी बीच, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने कहा है कि अगर कांग्रेस आलाकमान ने कहा तो वह दलित मुख्यमंत्री के लिए पीछे हट जाएंगे. उनके इस बयान को भी जेडीएस के साथ गठबंधन के लिए रास्ता तैयार करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. बीजेपी के सीएम कैंडिडेट बीएस येदियुरप्पा ने सवाल उठाया कि आखिर उन्होंने ऐसा ऐलान 10-15 दिन पहले क्यों नहीं किया. अब उन्हें अपनी हार दिख रही है इसलिए इस तरह का बयान दिया है.

कांग्रेस ने खेला दलित कार्ड

सिद्धरमैया के बयान के बारे में पूछे जाने पर कांग्रेस के मुख्स प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने संवाददाताओं से कहा कि सिद्धारमैया जी ने यह कहा है कि वो कांग्रेस के किसी कार्यकर्ता के लिए भी, एक दलित साथी के लिए भी जगह बनाकर व्यक्तिगत स्वार्थ छोड़ने के लिए तैयार हैं. ये दिखाता है कि कांग्रेस के नेता राजनीति में किस मापदंड से प्रेरित हैं. क्या नरेन्द्र मोदी जी ये साहस दिखा सकते हैं कि वो प्रधानमंत्री पद किसी दलित नेता को सौंपने को तैयार हो जाएं?