बेंगलुरु। कर्नाटक विधानसभा चुनाव में शुक्रवार को एक और ट्विस्ट आ गया जब पाकिस्तान की ओर से टीपू सुल्तान पर एक ट्वीट आया. पाकिस्तान सरकार ने ट्वीट कर मैसूर के राजा टीपू सुल्तान का जमकर बखान करते हुए उन्हें वीर योद्धा करार दिया. इस ट्वीट के बाद अब बीजेपी और कांग्रेस के बीच जुबानी घमासान और तेज हो सकता है.

पाकिस्तान सरकार की तरफ से वीडियो ट्वीट कर कहा गया, टीपू सुल्तान मैसूर रियासत के शासक थे. अंग्रेजी साम्राज्य के खिलाफ बहादुरी दिखाने के लिए उन्हें पहले स्वतंत्रता सेनानी के रूप में जाना जाता है. टीपू सुल्तान की 219वीं पुण्यतिथि के मौके पर जानिए उनके जीवन के कुछ पहलुओं के बारे में.

एक और ट्वीट में टीपू सुल्तान को मैसूर का टाइगर करार देते हुए पाकिस्तान सरकार ने कहा, टीपू सुल्तान एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली ऐतिहासिक शख्सियत थे जिन्हें युद्धकला में महारत हासिल थी. वह बचपन से ही सीखने के प्रति बेहद लालायित रहते थे. पाक सरकार ने मैसूर के मुस्लिम बादशाह टीपू सुल्तान की 218वीं पुण्यतिथि पर ट्वीट में ये बातें कहीं जिन्हें बादशाह नसीबुदौलाह सुल्तान फतेह अली बहादुर साहब टीपू उर्फ टीपू सुल्तान के नाम से जाना जाता था.

टीपू पर कांग्रेस-बीजेपी आमने-सामने

कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार के दौरान टीपू सुल्तान जयंती मनाने को लेकर कांग्रेस-बीजेपी पहले ही आमने-सामने थी. राज्य सरकार ने 2015 में टीपू सुल्तान की जयंती मनाने का फैसला लिया था. बीजेपी और कई हिंदू संगठन तभी से लगातार इसका विरोध करती आ रही है. लेकिन सिद्धारमैया सरकार ने सभी विरोधों को दरकिनार करते हुए जयंती मनाई. बीजेपी का मानना है कि टीपू सुल्तान एक क्रूर मुस्लिम शासक था जिसने हिंदुओं पर जुल्म कर उनका धर्म परिवर्तन कराया था.

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संघ ने भी जताया कड़ा विरोध

आरएसएस ने भी इसे लेकर कांग्रेस सरकार को हमेशा निशाने पर लिया है. अल्पसंख्यक समुदाय का तुष्टिकरण करने के लिए टीपू जयंती मनाने के कर्नाटक सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए ‘पांचजन्य’ में एक लेख में टीपू को दक्षिण का ‘औरंगजेब’ बताया गया है, जिसने जबरन लाखों लोगों का धर्मांतरण कराया. पांचजन्य में लेखों में सुझाव दिया कि सरकार को टीपू जैसी विवादित हस्तियों की जयंती से दूर रहना चाहिए और बल्कि मौलाना अबुल कलाम आजाद और सर मिर्जा इस्माइल जैसी मुस्लिम शख्सियतों की जयंती मनानी चाहिए. सर मिर्जा इस्माइल मैसूर रियासत और बाद में जयपुर और हैदराबाद के दीवान थे. लेख में कहा गया था कि हिंदू संगठन दावा करते हैं कि टीपू धर्मनिरपेक्ष नहीं था, बल्कि एक असहिष्णु और निरंकुश शासक था. वह दक्षिण का औरंगजेब था, जिसने लाखों लोगों का धर्मांतरण कराया और बड़ी संख्या में मंदिरों को गिराया. आरएसएस समर्थक प्रकाशन ‘पांचजन्य’ में एक लेख में कहा गया कि टीपू विवादास्पद शख्सियत रहे हैं. टीपू जयंती मनाने का एकमात्र उद्देश्य मुस्लिम मतों का ध्रुवीकरण करना था.