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कांग्रेस संग कुमारस्वामी की कुर्सी हुई पक्की, ठीक 12 साल पहले बीजेपी के सहयोग से बने थे सीएम
कर्नाटक में तीन दिन पुरानी एच डी कुमारस्वामी सरकार ने बीजेपी विधायकों के बहिर्गमन के बीच शुक्रवार को राज्य विधानसभा में विश्वास मत हासिल कर लिया.
बेंगलुरु: कर्नाटक में तीन दिन पुरानी एच डी कुमारस्वामी सरकार ने बीजेपी विधायकों के बहिर्गमन के बीच शुक्रवार को राज्य विधानसभा में विश्वास मत हासिल कर लिया. जेडीएस- कांग्रेस गठबंधन के विधायकों और अन्य विधायकों की उपस्थिति में कुमारस्वामी सरकार के प्रति विश्वास प्रस्ताव को ध्वनि मत से स्वीकार कर लिया गया. बीजेपी विधायकों ने विश्वास मत से ठीक पहले सदन से बाहर चले गए. विपक्ष के नेता बी एस येदियुरप्पा ने कुमारस्वामी पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्तारूढ़ गठबंधन अपवित्र है. कुमारस्वामी ने अपने भाषण में कहा कि उनकी सरकार सभी वर्गों को साथ लेकर चलेगी और विपक्ष के सुझावों को ध्यान में रखा जाएगा. उन्होंने कहा कि राज्य में कांग्रेस जद (एस) गठबंधन सरकार अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करेगी.
बोले-पता है बहुमत वाली सरकार नहीं चला रहे
कर्नाटक विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव पेश करने के बाद उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी है कि वह बहुमत वाली सरकार नहीं चला रहे हैं. प्रदेश में जेडीएस को बहुमत नहीं मिलने का जिक्र करते हुए कहा, ‘ मुझे इस बात का भी दुख है कि आवाम ने मुझमें भरोसा नहीं जताया है. उन्होंने कहा ,‘ हमलोग पांच साल के लिए स्थायी सरकार देंगे. हम जनता के लिए काम करेंगे. हम यहां अपना व्यक्तिगत हित साधने नहीं आए हैं.कुमारस्वामी ने कहा कि न तो वह और न ही देवेगौड़ा परिवार कभी सत्ता के लिए लालायित रहा है. उन्होंने कहा कि उनलोगों का अधिकतर राजनीतिक जीवन विपक्ष में ही व्यतीत हुआ है.
12 साल पहले बीजेपी के सहयोग से बने थे सीएम
आज से ठीक 12 वर्ष पहले जब जनता ने एच डी कुमारस्वामी कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनने के लिए पर्याप्त जनादेश नहीं दिया था, तब वह बीजेपी के सहयोग से मुख्यमंत्री बने थे. जनता दल (सेकुलर) के अध्यक्ष व पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा के तीसरे पुत्र कुमारस्वामी (59) ने बुधवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. वह 12 मई को हुए चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद पार्टी द्वारा उन्हें समर्थन देने की वजह से राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं.
नतीजे आने के बाद क्या हुआ
15 मई को पूरे नतीजे आने के पहले ही कांग्रेस नेता राजभवन गए और राज्यपाल वजुभाई वाला को गठबंधन सरकार के मुखिया के तौर पर जद(एस) के कुमारस्वामी को बिना शर्त समर्थन देने की सूचना दी. कांग्रेस ने यह कदम भाजपा को सत्ता से बाहर रखने के लिए उठाया, जिसे बहुमत से मात्र सात सीटें कम मिली थीं.वाला ने कांग्रेस-जद(एस) गठबंधन के अनुरोध को ठुकराते हुए भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बी.एस. येदियुरप्पा को सरकार बनाने का निमंत्रण दिया. इसके बाद जद (एस) और कांग्रेस इसके विरोध में सर्वोच्च न्यायालय पहुंच गए और 17 मई को येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण समारोह को रुकवाने की कोशिश की. न्यायालय ने हालांकि इस अनुरोध को ठुकरा दिया, लेकिन वाला द्वारा येदियुरप्पा को बहुमत सिद्ध करने के लिए दिए 15 दिन की अवधि घटाकर 19 मई को शाम चार बजे तक बहुमत साबित करने का निर्देश दिया.
दो दिन में येदियुरप्पा ने दिया इस्तीफा
येदियुरप्पा ने सदन में बहुमत साबित करने से पहले ही इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद कुमारस्वामी के लिए मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया.राजनीतिक रूप से प्रभावशाली और मैसुरू क्षेत्र मे मजबूत पकड़ वाले वोक्कालिगा समुदाय से आने वाले कुमारस्वामी का जन्म हासन जिले में 1959 में हुआ था. उन्होंने कनकपुरा लोकसभा सीट जीतकर 1996 में राजनीति में प्रवेश किया था. वह तब चर्चा में आए जब उनके पिता एच. डी. देवेगौड़ा देश के प्रधानमंत्री बने. कुमारस्वामी पहली बार फरवरी 2006 में भाजपा के साथ गठबंधन कर मुख्यमंत्री बने थे और तब उन्होंने अपने पिता से बगावत कर कांग्रेस-जद(एस) गठबंधन से समर्थन वापस ले लिया था और भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई थी.
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