विजयपुर (कर्नाटक)। यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी भी मंगलवार को कर्नाटक के चुनावी संग्राम में उतर पड़ीं. सोनिया ने आज यहां एक चुनावी रैली में केंद्र की मोदी सरकार पर कांग्रेस शासित कर्नाटक के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए उनके सबका साथ, सबका विकास के नारे पर सवाल उठाए. पिछले दो सालों में यह सोनिया की पहली चुनावी रैली थी.

लोकपाल गठन पर उठाए सवाल

सोनिया ने भ्रष्टाचार को लेकर लगातार सिद्धरमैया सरकार पर हमला कर रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पलटवार करते हुए कहा कि वह जानना चाहती हैं कि भ्रष्टाचार विरोधी निगरानी संस्था लोकपाल का क्या हुआ जिसके गठन का प्रस्ताव था. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार कर्नाटक में हमारी सरकार के साथ भेदभाव कर रही है. क्या यही आपका सबका साथ, सबका विकास है?

अभिनेता की तरह बोलते हैं मोदी- सोनिया

उन्होंने कहा कि मोदी एक अच्छे नेता हैं और एक अभिनेता की तरह बोलते हैं लेकिन उससे लोगों का पेट नहीं भरेगा. लोकपाल विधेयक को जनवरी 2014 में राष्ट्रपति से मंजूरी मिल गयी थी जिससे भ्रष्टाचार विरोधी निगरानी संस्था के गठन का रास्ता साफ हो गया था. लोकपाल के दायरे में कुछ सुरक्षा मानकों के साथ प्रधानमंत्री भी आएंगे. हालांकि अब तक लोकपाल का गठन नहीं हुआ है.

BJP ने उठाया विदेशी मूल का मुद्दा

सोनिया गांधी के कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार की खातिर आज राज्य का दौरा करने से पहले बीजेपी ने उनके इतालवी नाम एंतोनियो माइनो का संदर्भ देते हुए उनके विदेशी मूल का मुद्दा उठाया. कर्नाटक बीजेपी ने अपने ट्विटर पेज पर लिखा, आज एंतोनियो माइनो अपने आखिरी किले को ध्वस्त होने से बचाने के लिए यहां कर्नाटक आई हैं. मैडम माइनो, कर्नाटक को उस इंसान से नसीहत लेने की जरूरत नहीं है जो भारत के 10 कीमती साल बर्बाद करने के लिए अकेले जिम्मेदार है. ट्वीट में कहा गया, और कांग्रेस को अपने आयात संबंधी तंज की याद दिलाने की जरूरत है.

राहुल गांधी बोले- 2019 में मोदी नहीं बनेंगे पीएम, मैं प्रधानमंत्री बनने को तैयार

बीजेपी मुख्यमंत्री सिद्धरमैया की हाल की उस टिप्पणी का जवाब दे रही थी जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उत्तर भारत से आयातित नेता बताया था. यह पहली बार नहीं है जब कर्नाटक चुनाव से पहले सोनिया के विदेशी मूल का मुद्दा उठाया गया है. इससे पहले एक मई को पीएम मोदी ने एक चुनाव रैली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को अपनी मां की मातृभाषा सहित किसी भी भाषा में कर्नाटक सरकार की उपलब्धियों के बारे में 15 मिनट बोलने की चुनौती दी थी. प्रधानमंत्री ने भ्रष्टाचार सहित विभिन्न मुद्दों पर संसद में 15 मिनट बोलने की मंजूरी देने की राहुल की चुनौती का जवाब देते हुए यह कहा था. राहुल ने कहा था कि जब वह बोलेंगे तो मोदी संसद में 15 मिनट भी नहीं बैठ पाएंगे.