बेंगलुरू। सीबीआई ने वरिष्ठ कांग्रेसी नेता डीके शिवकुमार से जुड़े कुछ लोगों के आवासों एवं कार्यालयों पर आज तड़के छापे मारे. छापेमारी चलन से बाहर कर दिए गए नोटों की अवैध अदलाबदली के आरोप में बेंगलुरू, कनकपुर और रामनगर में पांच स्थानों पर की गई. छापेमारी ने तब राजनीतिक रंग ले लिया जब विधायक शिवकुमार, उनके सांसद भाई डीके सुरेश ने इसे उन्हें फंसाने के लिए भाजपा नीत केंद्र सरकार की बदले की कार्रवाई बताया. Also Read - Karnataka Cabinet Expansion: कर्नाटक के CM बीएस येदियुरप्पा ने किया कैबिनेट का विस्तार, इन 7 मंत्रियों ने ली शपथ

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सीबीआई का बयान Also Read - ब्राजील के राष्ट्रपति की पीएम मोदी से गुहार, खत में लिखा- जल्द भेजिए कोरोना की वैक्सीन

सीबीआई ने कहा कि यह छापेमारी इन आरोपों पर की गई कि रामनगर स्थित कॉर्पोरेशन बैंक के मुख्य प्रबंधक बी प्रकाश ने कुछ अज्ञात लोगों के साथ मिलीभगत से 14 नवंबर 2016 को चलन से बाहर कर दिए गए 10 लाख रूपये के नोटों को नए नोटों से बदला था. प्रकाश और अन्य पर आरोप है कि उन्होंने जाली मांग पर्ची बनाकर इसे छिपाने की भी कोशिश की.

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सीबीआई ने बयान जारी कर कहा कि बेंगलुरू, कनकपुर और रामनगर में पांच स्थानों पर तलाशी ली गई जिसमें कनकपुर का चुनाव प्रकोष्ठ, रामनगर का एक कार्यालय और चुनाव प्रकोष्ठ के प्रभारी शिवनंदा, चुनाव प्रकोष्ठ लिपिक नंजप्पा और एक पद्मनाभैया के आवास शामिल हैं. सीबीआई ने कहा कि प्रकाश और कॉर्पोरेशन बैंक के अन्य अधिकारियों के खिलाफ मामला सात अप्रैल 2017 को दर्ज किया गया था.

सुरेश का केंद्र सरकार पर आरोप

सुरेश ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार उन्हें और उनके भाई शिवकुमार को निशाना बना रही है. उन्होंने कहा कि मुख्य निशाना और कोई नहीं बल्कि मैं और मेरे भाई हैं. दूसरों को निशाना बनाकर वे हम तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं. बता दें कि डीके शिवकुमार ने कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई थी. उन्होंने कुमारस्वामी के बहुमत साबित करने तक कांग्रेस विधायकों को पूरी तरह एकजुट रखा था. हालांकि दो कांग्रेस विधायक गायब हो गए थे, लेकिन बहुमत परीक्षण के दिन दोनों को सदन आना पड़ा. कांग्रेस विधायकों की एकजुटता का पूरा श्रेय शिवकुमार को ही दिया गया था. उन्होंने एक होटल में इन विधायकों को रखा था.