कर्नाटक: फ्लोर टेस्ट से पहले ही येदियुरप्पा ने दिया इस्तीफा, सिर्फ 55 घंटे रह सके सीएम

विधानसभा में बहुमत के लिए येदियुरप्पा 7 विधायक नहीं जुटा पाए.

Published date india.com Updated: May 19, 2018 5:52 PM IST
BS Yeddyurappa
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बेंगलुरू। बीएस येदियुरप्पा ने आज बहुमत साबित करने से पहले ही विधानसभा में सीएम पद से इस्तीफा दे दिया. येदियुरप्पा मात्र 55 घंटे तक ही सीएम रह सके. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत येदियुरप्पा को आज विधानसभा में बहुमत साबित करना था. येदियुरप्पा ने सदन में करीब 15 मिनट तक भाषण दिया और इसके बाद इस्तीफे का ऐलान किया. राज्यपाल वजुभाई वाला ने येदियुरप्पा को बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का वक्त दिया था जिसके बाद कांग्रेस ने सुप्रीम का रुख किया था.

विधानसभा में बहुमत के लिए येदियुरप्पा 7 विधायक नहीं जुटा पाए और फ्लोर टेस्ट से पहले ही इस्तीफा दे दिया. येदियुरप्पा सिर्फ 55 घंटे तक ही सीएम रह सके.  इस तरह अब कर्नाटक में अब कांग्रेस-जेडीएस की सरकार होगी. और कुमारस्वामी मुख्यमंत्री होंगे. कांग्रेस के पास 78 विधायक हैं जबकि जेडीएस के पास 37 विधायक हैं.

येदियुरप्पा ने अपने भाषण में कहा, अगर जनता ने हमें 113 सीटें दी होती तो कर्नाटक को जन्नज में तब्दील कर देते. अब कभी भी चुनाव आ सकता है. राज्य के हर इलाके में जाऊंगा और दिल जीतकर आऊंगा. फिर चुनाव हुआ तो बीजेपी को 150 सीटें मिलेंगी. अगर मैं सत्ता खोता हूं तो कुछ नहीं खोउंगा, मेरी जिंदगी जनता के लिए है. हम लोकसभा में 28 में से 28 सीटें जीतेंगे. जनता ने हमें 104 सीटें ही दी हैं. जनादेश कांग्रेस या जेडीएस के लिए नहीं था. मैंने पिछले दो साल के दौरान राज्य का सघन दौरा किया और लोगों के चेहरे पर दर्द देखा. मैं लोगों से मिले प्यार और समर्थन को नहीं भूल सकता.

भाषण के बाद येदियुरप्पा राज्यपाल को इस्तीफा सौंपने निकल पड़े. वहीं, येदियुरप्पा के इस्तीफे के ऐलान के बाद ही कांग्रेस-जेडीएस खेमे में जश्न का माहौल शुरू हो गया.

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येदियुरप्पा के इस्तीफे के साथ ही कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस के सरकार बनाने का रास्ता साफ हो गया है. कांग्रेस ने कुमारस्वामी को सीएम पद का प्रस्ताव देते हुए बिना शर्त समर्थन देने का ऐलान किया था. दोनों पार्टियों ने राज्यपाल के समक्ष 117 विधायकों के समर्थन का पत्र भी सौंपा था, लेकिन राज्यपाल ने सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते बीजेपी को सरकार बनाने का न्योता दिया था. इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा जिसने फैसला सुनाया कि येदियुरप्पा दो दिन के भीतर ही बहुमत साबित करें. लेकिन वह इसमें नाकाम रहे और उनकी सरकार गिर गई.

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