कर्नाटक विधानसभा में आज होगी येदियुरप्पा सरकार की परीक्षा, कुछ ही घंटों में होगा फ्लोर टेस्ट

17 विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने के बाद विधानसभा में 207 सदस्यों के आधार पर होगा फैसला.

Published: July 29, 2019, 8:06 AM IST

नई दिल्ली. कर्नाटक में एक पखवाड़े से ज्यादा समय तक चली सत्ता की खींचातानी के बीच सोमवार का दिन महत्वपूर्ण है. राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार के गिर जाने के बाद सोमवार को भाजपा के नेतृत्व में बनी सरकार को सदन का विश्वास हासिल करना है. भाजपा नेता बीएस येदियुरप्‍पा ने बीती 26 जुलाई को राज्य के सीएम पद की शपथ ली थी. राज्यपाल ने उन्हें 29 जुलाई तक विश्वासमत हासिल करने का समय दिया था. आज यानी सोमवार को सुबह 10 बजे तक येदियुरप्पा सरकार को इस परीक्षा में खरा उतरना है. मुख्यमंत्री येदियुरप्पा का कहना है कि उन्हें पूरा भरोसा है कि वह सदन का विश्‍वास हासिल कर लेंगे. इधर, कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष द्वारा रविवार को अयोग्य घोषित किए गए जद (एस) के बागी विधायक ए एच विश्वनाथ ने कहा कि फैसला ‘‘कानून के विरुद्ध’’ है और वह तथा अन्य असंतुष्ट विधायक सोमवार को उच्चतम न्यायालय से संपर्क करेंगे.

कर्नाटक विधानसभा में विश्वास मत से एक दिन पहले रविवार को मुख्मयंत्री बी एस येदियुरप्पा ने बहुमत साबित करने का विश्वास जताया. उन्होंने यह भी कहा कि पिछली कांग्रेस-जद(एस) गठबंधन सरकार द्वारा तैयार किए वित्त विधेयक को भी बिना किसी परिवर्तन के वह सोमवार को सदन में पेश करेंगे. येदियुरप्पा ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘ सोमवार को सौ फीसदी मैं बहुमत साबित कर दूंगा.’’ उन्होंने कहा, ‘‘ वित्त विधेयक (विनियोग विधेयक) को तत्काल पारित कराने की जरूरत है अन्यथा हम तनख्वाह भी देने के लिए धन नहीं ले पाएंगे.’’ उन्होंने कहा, ‘‘ इसलिए कल बहुमत साबित करने के बाद हम सबसे पहले इस वित्त विधेयक को हाथ में लेंगे.’’ मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘मैंने उसमें कॉमा या फुल स्टॉप तक नहीं बदला है. मैं पिछली कांग्रेस-जेडीएस सरकार द्वारा तैयार इस विधेयक को पेश करूंगा.’’

कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष रमेश कुमार ने रविवार को दल-बदल कानून के तहत कांग्रेस-जद(एस) के 14 और विधायकों को सदन की सदस्यता के लिए अयोग्य ठहराया था जिसके साथ ही अयोग्य ठहराए गए विधायकों की संख्या अब 17 हो गई है. इसका सोमवार को येदियुरप्पा सरकार के विश्वास मत पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा. अध्यक्ष को छोड़कर 224 सदस्यीय विधानसभा में अब संख्या बल 207 रह गया है . मत-विभाजन की स्थिति में सत्ता पक्ष और विपक्ष को बराबर वोट मिलने पर अध्यक्ष वोट करते हैं. बहुमत के लिए जादुई आंकड़ा 104 है. भाजपा के पास एक निर्दलीय के समर्थन के साथ ही 106 सदस्य हैं. कांग्रेस के 66 (नामित समेत) जद(एस) के पास 34, बसपा के एक विधायक हैं. बसपा ने कुमारस्वामी सरकार के पक्ष में वोट नहीं करने पर अपने विधायक को निष्कासित कर दिया था.

(इनपुट – एजेंसी)

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