दावणगेरे( कर्नाटक)। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने आज कर्नाटक की सिद्दारमैया सरकार पर आरोप लगाया कि वह हिंदुओं को बांटने की कोशिश कर रही है और देश में सबसे भ्रष्ट सरकारों में शामिल हैं. कर्नाटक की दो दिवसीय यात्रा पर आए अमित शाह ने कहा कि लिंगायतों और वीरशैव लिंगायतों को धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा देने का राज्य सरकार का कदम हिंदुओं को बांटने की कोशिश है. Also Read - दिल्ली पुलिस मुख्यालय पहुंचे अमित शाह, बोले- आपने हर चुनौती का धैर्य से सामना किया

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अमित शाह के आरोप  Also Read - पाकिस्तान में 'सर्जिकल स्ट्राइक' से जनता में विश्वास आया कि मोदी सरकार के नेतृत्व में देश सुरक्षित: शाह

शाह ने यहां पत्रकारों से कहा, कर्नाटक में( विधानसभा) चुनावों से ठीक पहले लिंगायतों और वीरशैवों के लिए अल्पसंख्यक दर्जे की घोषणा कर उन्होंने लिंगायतों और वीरशैवों, लिंगायतों और अन्य समुदायों को बांटने की कोशिश की है. इस कदम के वक्त पर सवाल उठाते हुए उन्होंने सिद्दारमैया सरकार से पूछा, आप पांच साल से क्या कर रहे थे? उन्होंने कहा, 2013 में जब आपकी अपनी ( यूपीए) सरकार केंद्र की सत्ता में थी तो उन्होंने इसे खारिज कर दिया था. उस वक्त सिद्दारमैया चुप क्यों थे? यह हिंदुओं को बांटने की कोशिश है.

कर्नाटक में चुनाव से पहले लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा, अब गेंद केंद्र के पाले में

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शाह ने कहा कि यह वीरशैव और लिंगायत समुदायों की बेहतरी के लिए उठाया गया कदम नहीं है बल्कि बी एस येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री बनने से रोकने की साजिश है. येदियुरप्पा को लिंगायत समुदाय का कद्दावर नेता माना जाता है. उन्होंने कहा, लिंगायत समुदाय इसे समझता है और मुझे यकीन है कि कर्नाटक के लोग बैलेट के जरिए इसका जवाब देंगे. कर्नाटक कैबिनेट ने हाल में केंद्र सरकार से सिफारिश की है कि लिंगायतों और वीरशैव लिंगायतों को धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा दिया जाए. राज्य सरकार के इस कदम को भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

सिद्दारमैया अहिंदू नेता- शाह

शाह ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने मठों और मंदिरों को भी सरकारी नियंत्रण में लाने की कोशिश की, लेकिन विपक्ष के विरोध के कारण उन्होंने अपने कदम पीछे खींच लिए. उन्होंने कहा, मैंने पांच- छह बार कर्नाटक की यात्रा की है और लोगों से मिलने के बाद मैं कर्नाटक की भावनाएं समझ सका. कर्नाटक के लोगों का मानना है कि वह (सिद्दारमैया) ‘अहिंद’ नेता नहीं बल्कि ‘अहिंदू’ (हिंदू विरोधी) नेता हैं. बात दें कि कन्नड़ भाषा में ‘अहिंद’ शब्द का इस्तेमाल अल्पसंख्यकों, पिछड़े वर्गों और दलितों के लिए किया जाता है।

उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस ने सिद्दारमैया को नहीं रोका तो पार्टी को चुनावों में गंभीर परिणाम का सामना करना पड़ सकता है. शाह ने कहा, एक तरफ कांग्रेस अध्यक्ष हिेंदुओं, मुस्लिमों, सिखों और ईसाइयों को एकजुट करने की बातें करते हैं जबकि दूसरी तरफ कर्नाटक में उनके अपने मुख्यमंत्री हिंदुओं को बांटने की बातें कर रहे हैं. भाजपा अध्यक्ष ने कहा, मैंने किसी राजनीतिक पार्टी के भीतर इतने बड़े मतभेद नहीं देखे हैं.

इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया( पीएफआई) और इसकी राजनीतिक शाखा एसडीपीआई( सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया) पर हिंदुओं और भाजपा- आरएसएस के कार्यकर्ताओं की हत्या में शामिल होने के आरोप लगाते हुए शाह ने कहा कि उनके खिलाफ केस वापस लेकर राज्य सरकार वोट बैंक की घटिया राजनीति कर रही है. शाह ने कहा कि एक तरफ केरल सरकार ने केंद्र सरकार से पीएफआई पर पााबंदी लगाने की सिफारिश की है, लेकिन सिद्दारमैया को पीएफआई में कुछ गलत नहीं दिखता. कर्नाटक और भारत की सुरक्षा के लिए तुष्टिकरण की यह नीति सबसे बड़ा खतरा है.

लिंगायत को अलग धर्म की मंजूरी

बता दें कि 19 मार्च को चुनावी राज्य कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार ने लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा देने के सुझाव को मंजूरी दे दी. चुनावों से पहले यह फैसला कर्नाटक की राजनीति बदल सकता है. बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के दावेदार बीएस येदियुरप्पा भी इसी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. 2013 में बीजेपी ने येदियुरप्पा को सीएम पद से हटाया तो लिंगायत समाज ने बीजेपी को वोट नहीं दिया. कांग्रेस फिर से सत्ता में लौट आई.कर्नाटक सरकार के इस फैसले से राज्य में बीजेपी के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है. बीजेपी ने कर्नाटक सरकार के इस फैसले का विरोध किया है. राज्य की सिद्धारमैया सरकार ने जस्टिस नागमोहन दास की रिपोर्ट को मंजूरी देते हुए लिंगायत धर्म बनाने की सिफारिश की है. इसके संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी गई है, हालांकि इस पर केंद्र की मंजूरी बाकी है.