नई दिल्ली. अगले महीने कर्नाटक में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है. देश के इस दक्षिणी राज्य में अपनी पकड़ फिर से मजबूत करने और विपक्षी कांग्रेस पार्टी को करारी शिकस्त देने के लिए भाजपा ने व्यापक योजना बनाई है. इसके तहत एक तरफ तो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जमीनी स्तर का काम देखेंगे. वहीं यूपी, गुजरात, हिमाचल प्रदेश और उत्तर-पूर्वी तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव के तर्ज पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रचारक का जिम्मा संभालेंगे. पार्टी अध्यक्ष अमित शाह आज से कर्नाटक के दौरे पर हैं. इस दौरान वे न सिर्फ भाजपा के कार्यकर्ताओं से मिलेंगे, बल्कि राज्य में विभिन्न सेक्टर में काम करने वाले समूहों से भी बात करेंगे. इसके अलावा वे वहां पार्टी की अंदरूनी कमियों को भी ठीक करने का काम करेंगे. Also Read - पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में राजीव गांधी की प्रतिमा पर कालिख पोती, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दूध से साफ की

रैली नहीं, छोटे-छोटे समूह का टार्गेट

भाजपा के लिए भारत के इस दक्षिणी राज्य में सिर्फ चुनाव जीतना ही एकमात्र मकसद नहीं है, बल्कि वह कर्नाटक की जीत को इसी साल होने वाले राजस्थान और मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनावों को भी आधार बनाना चाहती है. हाल में उत्तर-पूर्वी राज्यों में जीत, यूपी की दो लोकसभा सीटों के उपचुनाव में हार और फिर राज्यसभा चुनावों में जीत के उतार-चढ़ाव के बाद पार्टी के लिए कर्नाटक का किला फतह करना नितांत आवश्यक है. इस चुनाव से भाजपा को एक तरफ तो देश के चारों दिशाओं पर राज करने का गौरव हासिल होगा, वहीं वह अगले साल के लोकसभा चुनाव के लिए भी विपक्षी पार्टियों को ‘स्पष्ट संदेश’ दे सकेगी. इसके लिए पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह आज से राज्य के दौरे पर हैं. इस दो दिवसीय यात्रा के दौरान अमित शाह जहां राज्य के दो मठों में जाएंगे और दो धर्मगुरुओं से मिलेंगे, वहीं नारियल और सुपाड़ी उत्पादक समूहों के साथ भी अलग-अलग बैठक करेंगे. शाह सोमवार को सिद्धगंगा मठ जाएंगे और वहां के संत का आशीर्वाद लेंगे. वह मंगलवार को मदारा चेन्नैया मठ जाएंगे जो परंपरागत रूप से दलितों से जुड़ा हुआ है. वह बेक्किनकल, सिरगेरे और मुरुगा सहित कई अन्य मठों का भी दौरा करेंगे. पार्टी का मानना है कि ऐसी छोटी-छोटी मुलाकात राज्य में हर वर्ग के साथ होगी, ताकि चुनावों तक पूरे कर्नाटक में भाजपा के पक्ष में माहौल बन सके.

कांग्रेस के हर कदम का जवाब देने की तैयारी

भाजपा ने कर्नाटक में कांग्रेस के हर सियासी तिकड़म को ‘काउंटर’ करने की तैयारी की है. हाल में सिद्धारमैया सरकार ने पहले तो प्रदेश का अलग झंडा और इसके कुछ ही दिनों बाद लिंगायत को अलग धर्म घोषित करने जैसे सियासी कदम उठाए हैं. प्रदेश सरकार के ये दोनों निर्णय संवेदनशील और राजनीतिक हैं. कांग्रेस की इन कवायदों को देखते हुए भाजपा ने अपनी तैयारी और पुख्ता करनी शुरू कर दी है. सियासी सूत्रों के अनुसार सियासी संघर्ष में कांग्रेस को मात देने के लिए जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सार्वजनिक रैलियों के जरिए जनता से संवाद करेंगे, वहीं पार्टी अध्यक्ष अमित शाह राज्य के विभिन्न वर्गों तक पार्टी की पहुंच बनाएंगे. खासकर सिद्धारमैया के ‘कन्नड़ गौरव’ अभियान से लड़ने के लिए भाजपा का शीर्ष नेतृत्व किसी भी स्तर पर पार्टी की तैयारियों को कमतर करके नहीं चलना चाहता है.

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अंदरूनी कलह को लेकर शाह का स्पष्ट संदेश

भाजपा के अंदर आपसी कलह या पार्टी को भितरघात से बचाने के लिए भी अमित शाह ने संगठन की लगाम कस दी है. इसके तहत सबसे पहले उन्होंने राज्य में पार्टी के वरिष्ठ नेता ईश्वरप्पा और मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार येद्दियुरप्पा के बीच संबंध ठीक करने की दिशा में प्रयास शुरू कर दिए हैं. दरअसल, येद्दियुरप्पा के वर्ष 2013 में भाजपा छोड़ने के बाद ईश्वरप्पा ने उनकी सीट शिमोगा से चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए. इसके बाद के वर्षों में ईश्वरप्पा, येद्दियुरप्पा के खिलाफ बयान देते रहे हैं. अपनी यात्रा के दौरान अमित शाह ईश्वरप्पा के घर भी जाएंगे. उनके साथ येद्दियुरप्पा भी रहेंगे. सियासी विशेषज्ञ बताते हैं कि शाह, प्रदेश के इन दोनों वरिष्ठ नेताओं को एक साथ लाएंगे, ताकि विधानसभा चुनाव के दौरान कोई खलल न हो.