कर्नाटक चुनाव का बहिष्कार करेंगे किसान, दिल्ली में धरना देकर इच्छामृत्यु की करेंगे मांग

किसानों ने महादयी नदी जल विवाद को लेकर दिल्ली में तीन दिनों का विरोध-प्रदर्शन करने की योजना बनाई है.

Published date india.com Published: April 21, 2018 1:21 PM IST
कर्नाटक चुनाव का बहिष्कार करेंगे किसान, दिल्ली में धरना देकर इच्छामृत्यु की करेंगे मांग
महादयी नदी जल विवाद को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते किसान.

नई दिल्ली. कर्नाटक विधानसभा चुनाव के अब ज्यादा दिन नहीं रह गए हैं. राजनीतिक दल अपने-अपने तरीकों से वोटरों को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन इसी बीच राज्य के किसानों ने चुनाव का बहिष्कार करने की चेतावनी दे दी है. किसानों ने महादयी नदी जल विवाद को लेकर दिल्ली में तीन दिनों का विरोध-प्रदर्शन करने की योजना बनाई है. देश की राजधानी में 25 अप्रैल से शुरू होने वाले अपने तीन दिवसीय प्रदर्शन के दौरान कर्नाटक के किसान राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु का अधिकार देने की मांग करेंगे. किसानों का कहना है कि हर राजनीतिक दल उनके मुद्दों को लेकर लड़ाई करने की बात करते हैं. लेकिन किसानों की मजबूरी का फायदा उठाने के बाद उनके मुद्दों से मुंह मोड़ लेते हैं. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. कर्नाटक के 700 से ज्यादा किसानों ने राजनीतिक दलों के इसी रवैये के विरोध में अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने की घोषणा की है.

Highlights

  • गोवा और कर्नाटक के बीच है महादयी नदी जल बंटवारा विवाद
  • नदी का पानी लेने की परियोजना का गोवा कर रहा है विरोध
  • 80 के दशक से ही दोनों राज्यों के बीच इस मुद्दे पर है विवाद

क्या है महादयी जल विवाद

पश्चिमी घाट से निकलने वाली महादयी नदी के जल बंटवारे को लेकर कर्नाटक और गोवा के बीच लंबे अर्से से विवाद चल रहा है. यह नदी कर्नाटक के दक्षिणी जिले बेलगावी के भीमगढ़ से निकलकर गोवा की राजधानी पणजी के निकट अरब सागर में मिल जाती है. इसका दो तिहाई से ज्यादा हिस्सा गोवा में है. इस नदी के जल बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों के बीच 80 के दशक से ही विवाद चल रहा है. गोवा इस नदी पर कर्नाटक द्वारा बांध और नहर बनाने का विरोध करता रहा है. गोवा का कहना है कि कर्नाटक सरकार महादयी नदी पर बांध बनाकर इसका पानी 7.56 टीएमसी पानी मालाप्रभा बेसिन में जमा करना चाहती है. गोवा सरकार इस परियोजना के खिलाफ है. उसका तर्क है कि इस परियोजना से न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान होगा, बल्कि गोवा को भी नुकसान झेलना होगा.

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नदी जल बंटवारे पर हुआ था राज्यव्यापी बंद

महदयी नदी के जल बंटवारे पर विवाद को लेकर पिछले दिनों कर्नाटक में एक दिन का राज्यव्यापी बंद भी बुलाया गया था. इस बंद का आह्वान महादयी कलस बांदुरी नाला होराटा समन्वय समिति ने किया था. बंद से लाखों लोग प्रभावित हुए थे और जगह-जगह प्रशासनिक व्यवस्था चरमरा गई थी. बंद का ज्यादातर असर उत्तरी कर्नाटक के जिलों में देखा गया था. ये जिले उसी मालाप्रभा बेसिन के तहत आते हैं, जहां कर्नाटक सरकार महादयी नदी का पानी लाना चाहती है. प्रदेश के हासन जिले में बंद के दौरान प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर आवागमन को बाधित कर दिया था. बंद के कारण यातायात व्यवस्था भी ठप हो गई थी. कर्नाटक राज्य परिवहन सेवा की हजारों बसे बंद के कारण अपने रूट पर नहीं चल पाई थीं. इसके अलावा बंद समर्थक प्रदर्शनकारियों ने राज्य में कई जगहों पर रेल सेवा में भी अवरोध पैदा करने की कोशिश की थी.

12 मई को होना है विधानसभा का चुनाव

कर्नाटक में अगले महीने 12 मई को विधानसभा का चुनाव होना है. इसके तीन दिन बाद 15 मई को चुनाव के नतीजे आएंगे. बता दें कि कर्नाटक में वर्ष 2013 से लेकर 2017 के बीच देश में सबसे ज्यादा किसानों की आत्महत्या के मामले सामने आए थे. इन 5 वर्षों के दौरान राज्य में साढ़े 3 हजार से ज्यादा किसानों ने आत्महत्या कर ली थी. बैंक कर्ज और घटते कृषि उपज से परेशान किसानों की समस्या को लेकर बाद में राज्य सरकार ने बैंकों को सख्त निर्देश दिए थे कि वह किसानों पर कर्ज लौटाने के लिए दबाव नहीं डाले. विधानसभा चुनाव के दौरान भी कर्नाटक में किसानों की समस्या बड़े मुद्दे के रूप में सामने आ रही है.

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