नई दिल्ली. कर्नाटक विधानसभा के लिए 222 सीटों पर बीते शनिवार को हुए चुनाव के नतीजों के रुझान आने शुरू हो गए हैं. शुरुआती रुझानों में भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है. ऐसे में प्रदेश की तीसरी प्रमुख पार्टी जनता दल (एस) को मिलने वाली सीटों पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं. चुनाव के तुरंत बाद कराए गए अधिकतर एग्जिट पोल भी जेडीएस को ही किंगमेकर बता चुके हैं. ऐसे में राज्य की सियासत की नई बिसात पर जेडीएस सबसे बड़े खिलाड़ी के रूप में उभरता दिख रहा है. हालांकि कांग्रेस ने चुनाव से पहले तक जेडीएस से किसी भी तरह के गठबंधन को लेकर इनकार किया है. लेकिन बदली हुई परिस्थितियों में यदि कर्नाटक में त्रिशंकु विधानसभा बनती है तो न सिर्फ कांग्रेस, बल्कि भाजपा के लिए भी इस दल को साधना जरूरी हो जाएगा. ऐसे में जेडीएस जिस पार्टी के साथ रहेगी, प्रदेश में उसकी सरकार बननी तय है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और अशोक गहलोत ने जेडीएस के साथ गठबंधन करने के संकेत भी दे दिए हैं.

भाजपा का दांव, क्या कुमारस्वामी बनेंगे सीएम
देश के कई राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के प्रदर्शन और सरकार बनाने की उसकी रणनीतियां काफी चर्चित रही हैं. मणिपुर और गोवा में हुए विधानसभा चुनावों में कम सीटें आने के बावजूद भाजपा ने वहां पर कांग्रेस को पछाड़कर राज्य की सत्ता हासिल की. कर्नाटक चुनाव के शुरुआती आंकड़े दिखा रहे हैं कि यहां भी सियासी उठा-पटक तेज होने वाले हैं. ऐसे में एक संभावना यह भी बनती है कि भाजपा, पुराने ‘गिले-शिकवे’ भुलाते हुए जेडीएस के साथ मिलकर सरकार बना ले. इसमें हालांकि भाजपा के सीएम पद के दावेदार बीएस येद्दीयुरप्पा के लिए मुश्किलें आएंगी. साथ ही भाजपा के कई स्थानीय नेता भी नहीं चाहेंगे कि पार्टी समर्थित सरकार में जेडीएस के कुमारस्वामी सीएम बनें. अगर भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरती है तो उस स्थिति में जेडीएस उसे समर्थन देगा या नहीं, इस पर राजनीतिक विश्लेषक निगाह रखे हुए हैं.

सिद्धारमैया की जगह कोई और तो कांग्रेस-जेडीएस मिलेंगे
कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव की अधिसूचना से पहले ही और कई मौकों पर स्पष्ट शब्दों में जेडीएस के साथ किसी भी तरह के गठबंधन से इनकार किया है. कांग्रेस के नेताओं ने साफ तौर पर कई बार कहा कि जेडीएस के साथ कोई साझेदारी नहीं हो सकती. लेकिन अब जबकि चुनाव के परिणाम त्रिशंकु विधानसभा के आसार दिखा रहे हैं, तो ऐसे में कांग्रेस को मजबूरी में ही सही, प्रदेश में अपनी सत्ता बचाए रखने के लिए जेडीएस के साथ तालमेल करना होगा. हालांकि पार्टी में इसके लिए भी पहले से एक रणनीति तैयार दिखती है. वह यह कि सिद्धारमैया कभी भी कुमारस्वामी के साथ सरकार नहीं बनाएंगे, ऐसे में कांग्रेस प्रदेश के गृह मंत्री आर. रामलिंगा को सीएम बनाकर कर्नाटक में अपनी सत्ता बचाए रख सकती है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा भी है कि वह जेडीएस के साथ गठबंधन की संभावनाएं तलाश रहे हैं. खड़गे ने कहा, ‘चुनाव परिणामों की सही जानकारी 11 से 11.30 बजे के बीच आएगी. पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद और अशोक गहलोत के साथ जेडीएस के साथ गठबंधन करने को लेकर हमारी बातचीत हो रही है.’

जेडीएस ने कहा- दोनों नेता गलत साबित होंगे
इधर, कर्नाटक के विधानसभा चुनाव में किंगमेकर मानी जा रही जेडीएस ने पहले ही कह रखा है कि बी. एस. येदियुरप्पा और सिद्धारमैया, दोनों में से कोई भी मुख्यमंत्री नहीं बनेगा. जेडीएस के नेशनल जनरल सेक्रेटरी दानिश अली ने बीते दिनों मीडिया से बातचीत में कहा था कि भले ही भाजपा के येदियुरप्पा और सीएम सिद्धारमैया सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं, लेकिन चुनाव के नतीजे इन दोनों नेताओं को गलत साबित कर देंगे. येदियुरप्पा और सिद्धारमैया दोनों को 15 मई को दोपहर बाद अपने शब्द वापस लेने पड़ेंगे. अली ने प्रदेश में जेडीएस की सरकार बनने का दावा करते हुए कहा था कि कर्नाटक के लोग एच. डी. कुमारस्वामी को प्रदेश के अगले सीएम के रूप में देखना चाहते हैं. इसलिए चुनाव में हमारी ही जीत होगी. आपको बता दें कि कर्नाटक में विधानसभा चुनाव में 72.13 प्रतिशत मतदान हुआ था. मतदान का प्रतिशत 1952 के राज्य विधानसभा चुनाव के बाद से सबसे अधिक है. 2013 के विधानसभा चुनाव में 71.45 प्रतिशत वोटिंग हुई थी.