नई दिल्ली. कर्नाटक विधानसभा चुनाव का परिणाम कांग्रेस के पक्ष में नहीं आए. प्रदेश की जनता ने देश की इस सबसे पुरानी और पिछले 5 साल से कर्नाटक में सत्तारूढ़ पार्टी को सरकार बनाने का जनमत नहीं दिया. हां, जनता ने इतने वोट जरूर दे दिए ताकि पार्टी की लाज बची रह सके. कांग्रेस कर्नाटक में विकास को लेकर चाहे लाख दावे कर ले, लेकिन इन परिणामों ने यह भी बता दिया कि बड़ी आबादी पार्टी के काम से खुश नहीं थी. इसीलिए तो खुद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया चामुंडेश्वरी सीट से बड़े अंतर से चुनाव हार गए. जिस दूसरी सीट बदामी से वे जीते भी, वहां भी वोटों का अंतर बहुत कम रहा. बदामी विधानसभा सीट से सीएम सिद्धारमैया मात्र 1600 वोटों के अंतर से जीते. वहीं, उनकी कैबिनेट के 20 मंत्रियों ने भी इस चुनाव में अपनी सीट गंवा दी. सीएम समेत उनकी कैबिनेट के आधे से ज्यादा मंत्रियों की यह चुनावी हार, कांग्रेस की लोकप्रियता कम होने का ही प्रमाण है. Also Read - सुन लीजिए कमलनाथ जी... मैं कुत्ता हूं, मेरा मालिक मेरी जनता है, जिसकी मैं सेवा करता हूं: सिंधिया

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मंत्रियों की हार में भी कम वोटों का अंतर

इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के अनुसार सीएम सिद्धारमैया सरकार में पशुपालन मंत्री रहे ए. मंजू 10 हजार से ज्यादा वोटों से चुनाव हार गए. वहीं पूर्व एक्साइज मिनिस्टर एच.वाई. मेती को 15 हजार से अधिक वोटों से हार का सामना करना पड़ा. इसके अलावा वन एवं पर्यावरण मंत्री बी. रामनाथ राय को भी विधानसभा चुनाव के मैदान में उनके विपक्ष में खड़े उम्मीदवार ने 15 हजार से अधिक वोटों से पराजित किया. चिकित्सा शिक्षा मंत्री रहे एस.आर. पाटिल को तो 20 हजार से अधिक वोटों से चुनावी हार का सामना करना पड़ा है. पाटिल को विपक्षी प्रत्याशी ने 21 हजार 271 वोटों से हरा दिया. वहीं, सिद्धारमैया सरकार में मंत्री रहे एस.एस. मल्लिकार्जुन की हार ज्यादा चिंता करने वाली है. वे महज 4 हजार से कुछ ही ज्यादा वोटों के अंतर से अपनी विधायकी गंवा बैठे हैं.

दो बार के विधायक और मंत्री की भी हार

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में जनता की उपेक्षा झेलने वाली कांग्रेस को यह हार अर्से तक सालती रहेगी. अब इसे ‘मोदी प्रभाव’ कहा जाए या जनता का गुस्सा, पार्टी के कई नेताओं को जनता ने साफ तौर पर नकार दिया. इनमें दो-दो बार के विधायक रहे मंत्रियों को भी नहीं बख्शा गया. पूर्व मंत्री और दो बार विधायक रहे बी. चिंचनसुर को 24 हजार से अधिक वोटों से जनता ने चुनाव में हराया है. वहीं, खनन मंत्री विनय कुलकर्णी को भी 20 हजार से अधिक वोटों से हार का सामना करना पड़ा है. इसके अलावा सामाजिक न्याय मंत्रालय का जिम्मा संभालने वाले मंत्री एच. अज्ञेय की हार और भी चिंताजनक है. विधानसभा चुनाव के परिणामों के अनुसार उन्हें विपक्षी उम्मीदवार ने 38 हजार 940 वोटों के बड़े अंतर से पराजित किया है.

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इन मंत्रियों-पूर्व मंत्रियों की भी हुई हार

नाम                   वोटों का अंतर

संतोष लाड            25997

एस. तनगडगी       14225

वी.के सोरके          11917

ए. जैन                  29799

के. थिमनप्पा           8039

रुद्रप्पा लमानी       11304

टी.बी. जयचंद्र        10365

एच.सी. महादेवप्पा 28478

उमाश्री                  20889

के. रत्नाकर            21955

पी. माधवराज         12044

बी. रायरेड्डी           13318