नई दिल्लीः कर्नाटक में त्रिशंकु विधानसभा की उभरती तस्वीर के बीच अगली सरकार किसकी होगी. यह काफी हद तक वहां के राज्यपाल वजूभाई वाला पर निर्भर करता है. चुनावी रुझानों में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आती दिख रही है, लेकिन वह बहुमत के लिए 112 के जादुई आंकड़े से पीछे है. ऐसे में अगली सरकार के गठन में राज्यपाल की भूमिका काफी अहम हो जाती है. परंपरा के मुताबिक राज्यपाल सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते हैं. ऐसे में भाजपा को सरकार बनाने का मौका मिलना तय है. Also Read - कर्नाटक उपचुनाव नतीजे: भाजपा ने 12 सीटें जीतकर हासिल किया स्पष्ट बहुमत, कांग्रेस को एक से करना पड़ा संतोष

इस बीच कांग्रेस ने किंगमेकर की भूमिका में आई जेडीएस को समर्थन देने की घोषणा की है. उसने कहा है कि वह आज ही राज्यपाल से मिलकर जेडीएस को समर्थन का पत्र सौंप देगी. वैसे भी कर्नाटक के राज्यपाल वजूभाई वाला गुजरात भाजपा के वरिष्ठ नेता रह चुके हैं. वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी भी माने जाते हैं. त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति बनती है तो भाजपा के तारणहार राज्यपाल वजुभाई वाला साबित हो सकते हैं. बता दें कि वजुभाई वही शख्स हैं, जिन्होंने नरेंद्र मोदी को मुख्यमंत्री के तौर पर नामांकित किए जाने के बाद 2002 में उनके लिए राजकोट (पश्चिम) सीट छोड़ दी थी. वे पीएम मोदी के करीबी माने जाते हैं. यही वजह है कि गुजरात में नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री रहते समय वह 2001- 2014 के दौरान 9 सालों तक वित्त मंत्री रहे. Also Read - कर्नाटक में नाटक: सोमवार को संभावित विश्वास मत को लेकर दोनों पक्ष बना रहे हैं रणनीति

वाला 2005 से 2006 तक एक साल के लिए गुजरात भाजपा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. करीब 80 वर्षीय वाला जिसने गुजरात में केशुभाई पटेल के नरेंद्र मोदी हाथ सत्ता हस्तांतरित कराने में अहम भूमिका निभाई. वाला स्कूल के समय से संघ से जुड़े रहे हैं. 26 साल की उम्र में वह जनसंघ में शामिल हुए और जल्दी की गुजरात के दिग्गज नेता रहे केशुभाई पटेल के करीब आ गए. उन्होंने राजकोट से कांग्रेस के जनाधार को खत्म करने में अहम भूमिका निभाई. Also Read - कर्नाटक संकट: राज्‍यपाल ने CM से कहा- 1:30 बजे तक साबित करें बहुमत, विधानसभा में सोए BJP MLA