लखनऊ: कर्नाटक विधानसभा चुनाव परिणाम में जहां बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी है तो कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर ने मिलकर बहुमत के हिसाब से सीट जुटाएं हैं. इन सबके बीच बहुजन समाज पार्टी ने कर्नाटक विधानसभा की एक सीट जीतकर दक्षिण में एंट्री कर ली है. दक्षिण के राज्‍यों में बसपा को पहली बार कहीं जीत मिली है. कोलेगल विधानसभा सीट पर एन महेश ने कांग्रेस के उम्मीदवार एआर कृष्णामूर्ति को 19 हजार से भी अधिक मतों से हरा दिया है. वहीं प्रदेश में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी बीजेपी यहां तीसरे नंबर पर रही है.

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में देवेगौड़ा की पार्टी जनता दल सेक्युलर ने बहुजन समाज पार्टी के साथ चुनाव लड़ने का फैसला किया था. ऐसे में मायावती की पार्टी ने 20 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे. इसमें से मायावती के एक उम्मीदवार को कोलेगल विधानसभा सीट पर जीत मिली है. कोलेगल से बसपा के एन महेश ने 71792 वोट हासिल करके जीत हासिल की. जबकि कांग्रेस के एआर कृष्णामूर्ति को 52338 वोट हासिल हुए. इसके अलावा कर्नाटक में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी बीजेपी यहां तीसरे नंबर पर रही. बीजेपी के जीएन नन्‍जुदा स्‍वामी को 39690 वोट मिले.

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बसपा के साथ से जनता दल सेक्युलर को भी फायदा
24 फीसदी दलित आबादी वाले इस राज्य में एससी एसटी के लिए 51 सीटें सुरक्षित है. बता दें कि जेडीएस ने चुनाव प्रचार के दौरान तो बसपा सुप्रीमो मायावती को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार भी बता दिया था. बसपा ने कर्नाटक में उन सीटों पर उम्मीदवार उतारे, जहां पिछले विधानसभा चुनावों में जनता दल सेक्युलर या तो जीती थी या फिर बहुत कम अंतर से हारी थी.

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यूपी नगर निगम चुनाव के बाद किया था फैसला
यूपी के नगर निकाय चुनाव में सफलता मिलने के बाद बीएसपी ने देश के दूसरे राज्यों में पैर फैलाना शुरू कर दिया था. ऐसे में अब बीएसपी ने कर्नाटक की राजनीति में इंट्री की है. विधान सभा चुनाव को लेकर बीएसपी और जेडीएस में गठबंधन का एलान किया था. इसमें बीएसपी ने 20 सीटों पर अपने उम्‍मीदवार उतारे. पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा की पार्टी जनता दल सेक्यूलर से बीएसपी के गठबंधन से जेडीएस को काफी मज़बूती मिली है. उसी का परिणाम है कि जेडीएस के हाथ सत्‍ता की चाभी लग गई है. बता दें कि कर्नाटक में दलित के वोट तकरीबन 24 फीसदी है.