नई दिल्ली: कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2018  के नतीजों ने सारे राजनीतिक पंडितों, चुनाव सर्वेक्षणों और अनुमानों को जिस तरह से गलत साबित करते हुए राज्य में बीजेपी नेे जिस तरह से  बहुमत पर आ गई, उससे कांग्रेस और पार्टी के मुखिया राहुल गांधी की सियासी मुश्किलें भविष्य में बढ़ना तय हो गया है. कर्नाटक की 222 सीटों के आए नतीजें के बाद  कांग्रेेस प्रेसिडेेंट को     तीन राज्यों की 520 विधानसभा सीटों और आम चुनाव के लिए लोकसभा की 543 सीटों पर कड़ा संघर्ष करना पड़ेगा. अब बीजेपी के पास 20 राज्य हो गए. अब लगातार जमीन खोती कांग्रेस के लिए चारो ओर से चुनौती ही चुनौती है. 132 साल पुरानी कांग्रेस पार्टी पिछले लोकसभा चुनाव में महज 44 सीट पर सिमट गई थी.

साल 2018 के अंत में तीन राज्यों राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में विधानसभा और साल 2019 में देश के आम चुनाव होना हैं. वर्तमान में  तीन राज्यों में बीजेपी की सरकारें हैं. कर्नाटक के चुनाव नजीजों से राज्यों की कांग्रेस नेताओं, कार्यकर्ताओं और उनके वोटर्स पर इस हार का मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ना तय है.

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इन राज्यों में कांग्रेस के लिए बढ़ी चुनौती
कर्नाटक की बुरी पराजय के बाद कांग्रेस के लिए राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बड़ी चुनौती है. यहां तीनों में बीजेपी की सरकारें हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बीजेपी लगातार 15 सालों से तीन कार्यकाल पूरे कर रही, जबकि राजस्थान में बीजेपी कांग्रेस को हराकर सत्ता में लौटी थी

तीन राज्यों की सीटों पर एक नजर

राजस्थान– 200 सीटें
बीजेपी – 160
कांग्रेस-25

मध्य प्रदेश– 230 सीटें
बीजेपी- 165
कांग्रेस- 57

छत्तीसगढ़- 90 सीटें –
बीजेपी – 49
कांग्रेस– 39

कांग्रेस की ये होंगी मुश्किलें
– कांग्रेस की कर्नाटक हार से पार्टी की लीडरशिप पर मनोवैज्ञानिक असर पड़ेगा
– तीन राज्यों और लोकसभा के लिए पूरे देश में कांग्रेस का कमजोर संगठन पार्टी के लिए चुनौती
– कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की पार्टी में पकड़ कमजोर हो सकती है
– राहुल गांधी का साथ छोड़कर कई नेता बीजेपी या दूसरे दलों में जा सकते हैं
– दूसरे दलों के साथ डील करने में कांग्रेस को घाटा उठाना पड़ सकता है
– तीसरे मोर्चे की संभावनाएं बढ़ गई हैं, जो बीजेपी से ज्यादा कांग्रेस के लिए चुनौती होगी

मोदी- शाह की जोड़ी का तोड़ नहीं निकाल पाई कांग्रेस
कांग्रेस कई स्तरों पर बीजेपी के सामने कमजोर है. एक ओर जहां कांग्रेस का संगठन राज्यों और पूरे देश में बिखरा हुआ है, वहीं बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व में पीएम नरेंद्र मोदी और पार्टी प्रेसिडेंट अमित शाह की आक्रामक नेता कांग्रेस की लीडरशिप में नजर नहीं आ रहा है. कांग्रेस के बड़े नेता अपनी सियासी जमीन खोते जा रहे हैं. लगातार बीजेपी की जीत कांग्रेस के लिए बड़ा अलार्म है. कांग्रेस ने तो मुद्दों को भुना पाई और न ही अपने परंपरागत वोटर्स पर पकड़ बनाए रख सकी.