नई दिल्ली. चुनावों के दौरान ‘मौसम’ को देखकर पार्टी बदलने वाले नेताओं की तादाद हर राज्य में होती है. कर्नाटक में भी है. यहां पर चन्नापटना से फिल्म अभिनेता और भाजपा के उम्मीदवार सी.पी. योगेश्वरा का हाल भी कुछ ऐसा ही है. निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में कर्नाटक में अपना राजनीतिक करियर शुरू करने वाले योगेश्वर, भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों में रहे हैं. वे एक बार समाजवादी पार्टी भी ज्वाइन कर चुके हैं. इस बार भी चुनाव से पहले योगेश्वर ने भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में चुनावी मूड देखकर भाजपा की सदस्यता ले ली थी. पार्टी बदलते रहने के कारण हर चुनाव में जीत का स्वाद चखने वाले योगेश्वर ने इस बार भी सत्ता के पायदान चढ़ने के लिए भाजपा का इस्तेमाल किया था, लेकिन जनता दल (एस) के सीएम पद के दावेदार और पार्टी के कद्दावर नेता एच.डी. कुमारस्वामी ने उनका सपना तोड़ दिया. चन्नापटना सीट से जेडीएस उम्मीदवार कुमारस्वामी ने चुनाव परिणाम के ताजा रुझानों के तहत 6 हजार से ज्यादा वोटों की बढ़त सी.पी. योगेश्वर पर बना ली थी. यानी इस बार, पार्टी बदलने के उस्ताद, योगेश्वर का सपना टूटता दिख रहा है. Also Read - Corona Vaccine in India Latest Updates: भारत में क्या है कोरोना वैक्सीन का हाल? कल तीन शहरों में जाकर खुद देखेंगे पीएम मोदी

वर्ष 1999 से हैं राजनीति में
फिल्मों से राजनीति में इंट्री करने वाले सी.पी. योगेश्वर की राजनीति में आने और चुनाव लड़ने की कहानी बड़ी रोचक है. योगेश्वर ने वर्ष 1999 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा था. इसके बाद अगले एक दशक तक वे दो दलों के नेता रहे. सबसे पहले उन्होंने कांग्रेस पार्टी ज्वाइन की थी. इस पार्टी में करीब पांच साल रहने के बाद पहली बार उन्होंने वर्ष 2004 का चुनाव लड़ा और जीते. इसके बाद वर्ष 2008 के चुनाव में उन्होंने कांग्रेस पार्टी के टिकट पर ही जीत दर्ज की. लेकिन एक साल बाद वर्ष 2009 में योगेश्वर ने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी. इसी साल हुए उपचुनाव में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की तरफ से चुनाव लड़ा. उपचुनाव में योगेश्वर को पराजय का सामना करना पड़ा, लेकिन महज दो साल बाद 2011 में फिर से हुए उपचुनाव में उन्होंने जीत दर्ज की और राज्य सरकार में मंत्री का पद हासिल किया. Also Read - किसानों को दुनिया की कोई सरकार नहीं रोक सकती, मोदी सरकार को वापस लेने होंगे काले कानून: राहुल गांधी

दो साल भाजपा में रह सपा में आए
वर्ष 2011 में भाजपा की तरफ से चुनाव जीतकर सरकार में मंत्री बनने वाले योगेश्वर के पार्टी बदलने का सिलसिला अभी थमा नहीं था. 2013 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान दल-बदल में माहिर कर्नाटक के इस नेता मन एक बार फिर ‘बदलाव’ के लिए मचलने लगा. 2013 में हुए विधानसभा चुनाव से पहले सी.पी. योगेश्वर ने भाजपा का साथ छोड़ दिया और उन्होंने समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली. लेकिन कुछ ही दिनों तक सपा में रहने के बाद उनका मन फिर डोला और वे एक बार फिर कांग्रेस में आ गए. लेकिन इस बार भी कांग्रेस में उनकी सियासी डगर लंबी नहीं चली और 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले योगेश्वर ने भाजपा ज्वाइन कर ली. भाजपा के टिकट पर वे चन्नापटना सीट से उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे थे. जनता दल (एस) के कुमारस्वामी के इस सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा से पहले तक योगेश्वर को उम्मीद थी कि इस बार भी चुनाव जीत लेंगे, लेकिन कुमारस्वामी ने उनका सपना तोड़ दिया. Also Read - किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है कांग्रेस पार्टी, सरकार बनने पर निरस्त होंगे ‘काले कृषि कानून’: रणदीप सुरजेवाला