नई दिल्‍ली: कर्नाटक विधानसभा चुनाव में चामुंडेश्‍वरी विधानसभा सीट से चौंकाने वाले परिणाम आए हैं. यहां से सीएम सिद्धारमैया 36 हजार 42 वोटों से हो गए हैं. यहां पर जीटी देवेगौड़ा (जेडीएस) ने उन्‍हें मात दी. जीटी देवेगौड़ा ने चामुंडेश्‍वरी सीट से कुल 121325 वोट हासिल किए. बता दें कि सिद्धारमैया चामुंडेश्‍वरी सीट से सात बार चुनाव लड़े, जिसमें उन्‍होंने पांच बार जीत हासिल की थी. उधर, सिद्धारमैया बादामी सीट से बड़ी मुश्किल से 1696 वोटों से जीत पाए. उन्‍हें बीजेपी के बी. श्रीरामुलु ने उन्‍हें कड़ी टक्‍कर दी.

चामुंडेश्वरी विधानसभा सीट का इतिहास दिलचस्प है. बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) ने 2004 में इस विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था और उसे 9,700 वोट मिले थे. सिद्धारमैया के लिए खुशकिस्मती की बात यह रही कि दो साल बाद इस सीट पर हुए उपचुनाव में पार्टी ने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया. इसी वजह से सिद्धारमैया को राजनीति में फिर से जीवनदान मिलने में बीएसपी की भी भूमिका मानी जाती है. अगर सिद्धारमैया 257 वोट के अंतर से जीत हासिल नहीं करते, तो शायद वह राजनीतिक निर्वासन में चले जाते. इस बार चूंकि बीएसपी और जेडी(एस) का चुनावी गठबंधन हुआ तो परिणाम चौंकाने वाला रहा. चामुंडेश्‍वरी सीट पर अपनी जीत का दावा करने वाले सिद्धारमैया यहां से 36 हजार 42 वोट से हार गए, जबकि जीटी देवेगौड़ा ने शुरुआत बढ़त बनाते हुए इसे आखिर में जीत में तब्‍दील कर दिया.

सिद्धारमैया पर भारी पड़ रहे जीटी देवगौड़ा
मौजूदा समय में दलील दी जा रही थी कि जब विकल्प सिद्धारमैया और जीटी देवगौड़ा के बीच होगा, तो मुमकिन है कि जाति का मामला ज्यादा मायने नहीं रखा जाएगा. क्योंकि अगर कांग्रेस की सत्ता में वापसी होती है, तो सिद्धारमैया मुख्यमंत्री होंगे, जबकि जीटी देवगौड़ा की हैसियत किसी भी हालत में एक विधायक से ज्यादा नहीं रह सकती. लेकिन अंदाजा इसके उलट ही हुआ. बता दें कि वोटरों को लुभाने के लिए सिद्धारमैया ने जमकर प्रचार अभियान भी किया.

सिद्धारमैया को प्रचार के लिए मिला सीमित वक्‍त
चामुंडेश्‍वरी सीटा पर सिद्धारमैया के लिए मुश्किल चुनौती यह रही कि पार्टी के स्टार प्रचारक के तौर पर उन्हें कर्नाटक के सभी 30 जिलों पर फोकस करना था, लिहाजा चामुंडेश्वरी और वरुणा विधानसभा सीटों पर ध्यान देने के लिए उनके पास वक्त बेहद सीमित रहा. वरुणा सीट से विधानसभा का चुनाव लड़ रहे यतींद्र को भी अपने पिता सिद्धारमैया की मदद की जरूरत थी, क्योंकि बीजेपी ने भी इस सीट को बेहद अहम बना दिया था. हालांकि प्रचार के दौरान बीजेपी नेता बताते रहे कि सिद्धारमैया की चामुंडेश्वरी क्षेत्र की रैलियों में काफी कम भीड़ जुट रही है. लेकिन कांग्रेस कैंप में इस बात को लेकर चिंता नहीं हुई. दअरसल, सिद्धारमैया अपने खास गंवई अंदाज में इस अर्द्धशहरी विधानसभा क्षेत्र के उन लोगों तक पहुंच रहे थे, जिन्हें वह निजी तौर पर जानते थे. बावजूद इसके रिजल्‍ट पलट गया.

चामुंडेश्‍वरी सीट पर जातीय गणित
चामुंडेश्वरी विधानसभा सीट पर कुल 2.5 लाख वोटरों में 70,000 से भी ज्यादा वोटर वोक्कालिगा (गौड़ा के समुदाय) समुदाय से हैं. ओबीसी, दलित और मुसलमान वोटरों की संख्या तकरीबन 1.2 लाख है. सिद्धारमैया कुरुबा जाति (ओबीसी) से ताल्लुक रखते हैं. इस विधानसभा क्षेत्र में लिंगायत वोटरों की संख्या 30,000 है. सिद्धारमैया को उम्मीद थी कि लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा दिए जाने का उनकी सरकार का फैसला इस समुदाय को कांग्रेस पार्टी और उनकी तरफ आकर्षित करने में काफी मददगार साबित होगा. लेकिन ऐसा कहीं नजर नहीं आया.