नई दिल्ली. कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा ने प्रदेश के सभी क्षेत्रीय इलाकों में अपनी मजबूत पकड़ के भरोसे जीत दर्ज की है. चाहे वह बॉम्बे कर्नाटक का इलाका हो या तटीय कर्नाटक. मध्य कर्नाटक के इलाके हों या पुराने मैसूर का क्षेत्र, हर जगह भाजपा ने अपना परचम लहराया है. पार्टी ने प्रदेश में सत्तारूढ़ कांग्रेस को इस मामले में ‘चारों खाने चित’ कर दिया है. यानी कर्नाटक के सभी क्षेत्रों में भाजपा ने अपना डंका बजा लिया है. आप इसे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का कुशल चुनाव प्रबंधन, पीएम नरेंद्र मोदी की आक्रामक प्रचार शैली, कांग्रेस सरकार की असफलता, कांग्रेस के नेताओं के बड़बोले बयान या फिर जो भी कह लें, भाजपा ने दक्षिण के इस राज्य में नया इतिहास रच दिया. भाजपा की इस जीत में कर्नाटक के विभिन्न इलाकों में कैसा रहा पार्टी का प्रदर्शन, आइए जानते हैं.

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बॉम्बे कर्नाटक
इस क्षेत्र में भाजपा को 30 सीटों की बढ़त मिली है. लिंगायत समुदाय के मतदाता बाहुल्य इस इस इलाके में 2013 के विधानसभा चुनाव में 31 सीटें जीतने वाली कांग्रेस पार्टी इस बार महज 17 सीटों पर केंद्रित होकर रह गई है. पिछले विधानसभा चुनाव में येद्दीयुरप्पा के भाजपा से अलग होने का फायदा कांग्रेस को मिला था. लेकिन इस बार चूंकि येद्दीयुरप्पा खुद भाजपा के सीएम पद के उम्मीदवार हैं, इसलिए बॉम्बे कर्नाटक के लिंगायत मतदाताओं ने एक बार फिर भाजपा के पक्ष में खुलकर अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है. इधर, प्रदेश की तीसरी प्रमुख पार्टी जनता दल (एस) को इस क्षेत्र में सिर्फ 1 सीट से संतोष करना पड़ा है. आपको बता दें कि इसी इलाके में सीएम सिद्धारमैया की बदामी विधानसभा सीट है, जहां से वे चुनाव लड़ रहे हैं. इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के अनुसार प्रदेश सरकार के लिंगायत को अल्पसंख्यक का दर्जा देने के सियासी दांव का यहां कोई असर नहीं दिखा.

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पुराना मैसूर
वोक्कालिंगा समुदाय के मतदाताओं की बहुलता वाला कर्नाटक का यह क्षेत्र परंपरागत रूप से जनता दल (एस) के साथ इस बार भी खड़ा रहा. हालांकि भाजपा ने इस क्षेत्र में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है. इस इलाके में विधानसभा की कुल 66 सीटें हैं, जिनमें से भाजपा को 10 सीटों के ऊपर जीत मिली है. वहीं जनता दल (एस) ने इस इलाके में अपनी मजबूत पकड़ को एक बार फिर साबित किया है. पार्टी के उम्मीदवारों ने पुराने मैसूर क्षेत्र की 28 विभिन्न विधानसभा सीटों पर अपनी दमदार जीत दर्ज की है. पुराने मैसूर क्षेत्र में भी कांग्रेस का प्रदर्शन 2013 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले काफी नीचे आया है. कांग्रेस ने इस इलाके में 5 साल पहले जहां 25 सीटों पर जीत हासिल की थी, वहीं इस चुनाव में कांग्रेस के खाते में महज 17 सीटों पर ही बढ़त हासिल हो पाई है. गौरतलब है कि इसी इलाके की चामुंडेश्वरी विधानसभा सीट से सीएम सिद्धारमैया भी उम्मीदवार थे, जहां से उनके विपक्षी प्रत्याशी ने उन पर काफी बड़ी बढ़त हासिल की है.

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तटीय कर्नाटक
कर्नाटक के तटीय इलाकों में भी भारतीय जनता पार्टी ने अपनी मजबूत पकड़ को बरकरार रखा है. विधानसभा चुनाव परिणाम के ताजा रुझानों के अनुसार तटीय कर्नाटक के इलाकों में भी कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी है. प्रदेश में सत्तारूढ़ इस पार्टी ने 2013 के विधानसभा चुनावों में जहां इस इलाके की कुल 21 सीटों में से 13 पर जीत हासिल की थी, वहीं इस बार पार्टी को 2 सीटों पर जीत मिली है और 1 सीट पर पार्टी का प्रत्याशी बढ़त बनाए हुए है. इसके मुकाबले भाजपा ने 10 सीटों पर जीत हासिल कर ली है और पार्टी के उम्मीदवार 8 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं. तटीय कर्नाटक ने प्रदेश को दो सीएम दिए हैं- एम. वीरप्पा मोइली और डी.वी. सदानंद गौड़ा. परंपरागत रूप से यह इलाका भाजपा का गढ़ माना जाता रहा है. 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने यहां पर हलचल जरूर पैदा की थी, लेकिन भाजपा ने इस विधानसभा चुनाव में एक बार फिर अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा हासिल कर ली है.

मध्य कर्नाटक
प्रदेश के मध्यवर्ती इलाके, यानी मध्य कर्नाटक में भी भारतीय जनता पार्टी का जादू मतदाताओं के सिर चढ़कर बोला है. भाजपा के प्रत्याशियों ने विधानसभा चुनाव में यहां भी अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है. भाजपा ने कुल 36 सीटों वाले इस इस क्षेत्र में 12 सीटों पर जीत हासिल कर ली है, जबकि इसके उम्मीदवार 13 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं. वहीं विपक्षी कांग्रेस पार्टी को कर्नाटक के अन्य इलाकों की तरह ही यहां भी सीटों की गिरावट का दंश झेलना पड़ा है. कांग्रेस ने इस इलाके में 2 सीटों पर जीत हासिल कर ली है और इसके उम्मीदवार 8 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं. इसके अलावा मध्य कर्नाटक में एक सीट पर जनता दल (एस) का उम्मीदवार भी बढ़त बनाए हुए है. इस इलाके में भी कांग्रेस को उसी तरह से सीटों का खामियाजा भुगतना पड़ा है, जिस तरह से प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में उसके प्रत्याशियों ने मुंह की खाई है. 2013 के विधानसभा चुनाव में मध्य कर्नाटक की कई सीटों पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार उसके उम्मीदवार जीत का इतिहास दोहराने में नाकामयाब साबित हुए हैं.

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