नई दिल्ली: कर्नाटक चुनाव में अब तक आए नतीजे बीजेपी की पूर्ण बहुमत की सरकार की ओर इशारा कर रहे हैं. कर्नाटक में सरकार बनाने के लिए किसी भी पार्टी को 112 सीटें चाहिए. बीजेपी इस जादुई आंकड़े को हासिल करती दिख रही है. कर्नाटक में 1985 के बाद कोई भी सरकार दोबारा सत्ता में नहीं आ पाई है.1985 में रामकृष्ण हेगड़े की अगुवाई में जनता दल दोबारा सत्ता पर काबिज हुआ था. इसके बाद कोई भी सरकार दोबारा वापसी नहीं कर पाई. 2014 के बाद देश में जितने भी विधानसभा चुनाव हुए हैं, उनमें से ज्यादातर में लोगों ने सरकार बदल दी.सिद्धारमैया के सामने बड़ी चुनौती इस ट्रेंड को तोड़ने की थी लेकिन वे ऐसा नहीं कर पाए.

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राहुल की मेहनत रंग नहीं लाई
गुजरात चुनाव के समय से राहुल गांधी एक अलग रंग में नजर आ रहे हैं. उनके भाषणों में एक तरह का पैनापन दिखा. कर्नाटक में भी उन्होंने पीएम मोदी को घेरने की कोशिश की. उन्होंने कई जीवंत मुद्दों को उठाया. बीएस येदियुरप्पा को बीजेपी का सीएम फेस बनाने पर सवाल उठाए. रेड्डी ब्रदर्स को टिकट दिए जाने को लेकर बीजेपी और मोदी पर हमला बोला. राहुल ने सबकुछ किया लेकिन मुद्दों की राजनीति नहीं कर पाए. इस चुनाव में मोदी के खिलाफ सिद्धारमैया को कांग्रेस ने प्रोजेक्ट किया लेकिन अंत आते आते यह राहुल बनाम मोदी हो गया.

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सोनिया का मैजिक बेअसर
कांग्रेस ने इस चुनाव में सोनिया गांधी को भी उतारा लेकिन इसका कोई फायदा नहीं मिला. 2 साल बाद सोनिया गांधी ने किसी विधानसभा चुनाव में रैली की. उन्होंने भी पीएम मोदी पर निशाना साधा था और कहा था कि अगर भाषण से पेट भरता है तो मैं चाहूंगी कि वह इसी तरह भाषण देते रहें.

फंड की कमी भी वजह
कांग्रेस ने इस चुनाव में जीत हासिल करने के लिए सबकुछ किया. बूथ लेवल मैनेजमेंट से लेकर सोशल मीडिया तक उसने दमखम के साथ चुनाव लड़ा लेकिन बीजेपी और पीएम मोदी से हार गई. बताया जा रहा है कि इस चुनाव में कांग्रेस के पास फंड की भी कमी थी. बीजेपी ने जहां प्रचार के लिए 25 हेलीकॉप्टर उतारे वहीं कांग्रेस ने 10 हेलीकॉप्टर से ही चुनाव प्रचार किया.

बदलाव की बयार की शिकार
कर्नाटक के विधानसभा चुनाव में प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि जल्दी ही कांग्रेस की PPP हो जाएगी. यानी पुडुचेरी, पंजाब और परिवार रह जाएगा. पीएम की बातें सच साबित हुईं और बीजेपी ने कांग्रेस से कर्नाटक भी छीन लिया. आखिर क्या कारण है कि कांग्रेस हर राज्य हार रही है. 2014 के बाद जहां भी उसकी सरकारें थी उसने गंवा दी. बीजेपी ने सिर्फ एक बार 2008 से 2013 तक कर्नाटक में शासन किया था, लेकिन उसका कार्यकाल पार्टी की अंदरूनी कलह और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरा रहा था. उसके तीन मुख्यमंत्रियों में से एक और फिलहाल मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बी एस येदियुरप्पा भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल में थे.