नई दिल्ली: कर्नाटक विधानसभा चुनाव-2018 के शुरुआती नतीजों में बीजेपी को पूर्ण बहुमत मिलता दिख रहा है. 2019 के चुनाव से पहले कांग्रेस के पास एक मौका था कि वह खुद को साबित करे कि वह पीएम मोदी और बीजेपी से टक्कर के लिए तैयार है लेकिन ऐसा नहीं हो सका. हालांकि पिछले 30 सालों के कर्नाटक के इतिहास को देखें तो कोई भी सरकार दोबारा सत्ता में वापसी नहीं कर पाई है. कांग्रेस और सिद्धारमैया के पास मौका था कि वे इस ट्रेंड को बदलकर नया इतिहास लिखें. सिद्धारमैया से इसलिए भी उम्मीद थी कि 40 साल बाद वह ऐसे सीएम रहे जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया. उनकी सोशल वेलफेयर स्कीम की पूरे देश में चर्चा हुई. चुनावी पंडितों का कहना था कि सरकार के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी नहीं है. परिणाम से पहले सबकुछ कांग्रेस के फेवर में दिख रहा था. फिर क्या हुआ कि कांग्रेस की इतनी बुरी स्थिति हो गई.

पिछले कुछ चुनावों को देखें तो हर जगह लोगों में सरकार बदलने का ट्रेंड देखने को मिल रहा है. हालांकि गुजरात इसका अपवाद हो सकता है लेकिन ये सच है कि गुजरात के अलावा कोई भी सरकार फिर से सत्ता में वापसी नहीं कर पाई. उत्तर प्रदेश के चुनाव में अखिलेश के विकास के कार्यों से अधिकांश लोग खुश थे लेकिन सरकार बदल दी. ये ट्रेंड अन्य राज्यों में भी देखने को मिला. नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के समय बीजेपी 8 राज्यों में सरकार चला रही थी. वहीं, कांग्रेस गठबंधन के पास 14 राज्य थे. लेकिन आज की स्थिति यह है कि बीजेपी के पास 14 राज्य और बीजेपी गठबंधन के पास 20 राज्य हैं. वहीं, कांग्रेस के पास पंजाब, मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी ही बचा है.

इन राज्यों में है बीजेपी की सरकार
हिमाचल, उत्तराखंड, हरियाणा, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, असम, गोवा, मणिपुर, अरुणाचल, उत्तर प्रदेश और त्रिपुरा हैं. वहीं, दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, बिहार, सिक्किम, नगालैंड और मेघालय एनडीए की सरकार है.

मोदी के पीएम बनने के बाद इन राज्यों में थी यूपीए की सरकार
हिमाचल, हरियाणा, उत्तराखंड, झारखंड, केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, असम, अरुणाचल, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम और पुडुचेरी में कांग्रेस की सरकार थी.

अब आगे क्या
कर्नाटक की जीत ने ये साबित कर दिया है कि मोदी लहर बरकरार है. 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें टक्कर देने वाला कोई नहीं दिख रहा है. पीएम मोदी ने इस चुनाव में 20 से ज्यादा रैलियां की और सबकुछ पलट कर रख दिया. वहीं कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस चुनाव में 47 रैलियां की थी. राहुल गांधी ने खूब मेहनत की लेकिन एक बार फिर वह कांग्रेस को जीत दिलाने में कामयाब नहीं हो सके. 2019 के चुनाव से पहले कर्नाटक का कांग्रेस के हाथ से निकलना पार्टी के लिए बहुत बड़ा झटका है. इस चुनाव परिणाम पर पूरे देश की निगाहें लगी हुई थीं. कांग्रेस की हार से गठबंधन की राह भी मुश्किल हो जाएगी.  जीत तो दूर 2019 के चुनाव में मोदी को टक्कर देने के लिए कांग्रेस को नई रणनीति बनानी होगी.