बेंगलोर। कर्नाटक की सियासी जंग को विराम लगने के साथ ही नई सरकार बनने का रास्ता भी साफ हो गया है. बीएस येदियुरप्पा के बहुमत साबित करने से पहले ही इस्तीफा देने के बाद जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी शाम करीब 7.30 बजे राज्यपाल से मिलने पहुंचे और सरकार बनाने का दावा पेश किया. राज्यपाल ने उन्हें 21 मई को सीएम पद की शपथ लेने को कहा. हालांकि कुमारस्वामी ने बाद में बताया कि कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार का शपथ ग्रहण अब 21 मई की बजाय 23 मई को होगा. पार्टी प्रवक्ता दानिश अली ने भी कहा कि शपथ ग्रहण 23 मई को होगा. Also Read - कमलनाथ के 'आइटम' वाले बयान को राहुल गांधी ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण, कहा- 'मुझे इस तरह की भाषा पसंद नहीं'

23 मई को शपथ ग्रहण

इस मुलाकात के बाद कुमारस्वामी ने कहा, राज्यपाल ने मुझे सरकार बनाने का न्योता दिया है. कुमारस्वामी ने संवाददाताओं को बताया कि राज्यपाल ने उन्हें बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का समय दिया है लेकिन हम इससे बहुत पहले यह कर देंगे. कुमारस्वामी ने कहा, प. बंगाल की सीएम ममता बनर्जी, आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू और तेलंगाना के सीएम केसी राव ने मुझे बधाई दी है. मायावती जी ने भी आशीर्वाद दिया है. मैंने सभी क्षेत्रीय नेताओं को शपथ ग्रहण समारोह के लिए आमंत्रित किया है. मैंने सोनिया गांधी जी और राहुल गांधी जी को व्यक्तिगत रूप से आमंत्रित किया है.

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चुनाव परिणाम के बाद एकसाथ आए जदएस और कांग्रेस पहले ही सरकार बनाने का दावा पेश कर चुके हैं। इस गठबंधन ने 117 विधायकों का समर्थन हासिल होने का दावा किया है. कर्नाटक विधानसभा की 224 में से 222 सीटों पर 12 मई को चुनाव हुए थे. इसके बाद 15 मई को घोषित परिणाम में 104 सीट के साथ बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी. कांग्रेस को 78 और जेडीएस को 37 सीट मिली.

सियासी सरगर्मी पर विराम

बता दें कि कर्नाटक में 12 मई को हुए चुनाव में त्रिशंकु विधानसभा के नतीजों से राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई थीं, जिसपर आज विराम लग गया. 15 मई को आए नतीजे में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला. बीजेपी 104 सीटें लेकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. उधर, कांग्रेस ने जेडीएस को समर्थन का ऐलान कर कुमारस्वामी को सीएम बनाने का बात कही. इसके बाद से राज्य में सियासी उठापटक शुरू हो गई थी.

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बीएस येदियुरप्पा को बहुमत साबित करने के लिए शनिवार 19 मई दोपहर 4 बजे तक का वक्त दिया था. इससे पहले राज्यपाल वजुभाई वाला ने बीजेपी को बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का वक्त दिया था. लेकिन कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर आधी रात को ही सुनवाई कराई. अगले दिन हुई सुनवाई में अदालत ने आज ही के दिन (19 मई) बहुमत साबित करने को कहकर बीजेपी को बड़ा झटका दिया. लेकिन येदियुरप्पा ने बहुमत परीक्षण से पहले ही इस्तीफा दे दिया.

15 मई को चुनाव नतीजे आने के साथ ही बेंगलुरू और दिल्ली में गहमागहमी शुरू हो गई थी. कांग्रेस ने गुलाम नबी आजाद और अशोक गहलोत को तुरंत बेंगलुरू भेज दिया. कांग्रेस महज 78 सीटों पर ही सिमट गई और बीजेपी 104 सीटें लाकर बहुमत के करीब आकर अटक गई. जेडीएस को 37 सीटें मिलीं. कांग्रेस ने अपनी रणनीति के तहत जेडीएस के कुमारस्वामी को सीएम बनाने की बात कहते हुए बिना शर्त समर्थन का ऐलान कर दिया.