बेंगलुरूः आखिरकार कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने गुरुवार को राज्य का झंडा जारी कर दिया. हालांकि इसके लिए केंद्र सरकार की अनुमति लेनी होगी. केंद्र के अप्रूवल के बाद ही यह झंडा आधिकारिक रूप से कर्नाटक का झंडा माना जाएगा. कर्नाटक में लंबे समय से राज्य के लिए अलग झंडे की मांग हो रही थी. राज्य सरकार ने एक समिति का गठन किया था. समिति ने राज्य के लिए अलग झंडे की सिफारिश की थी और कहा था कि इसके मार्ग में कोई संवैधानिक या कानूनी बाधा नहीं है. नौ सदस्यीय समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंपी थी जिसमें राज्य के लिए अलग ध्वज की सिफारिश की गई थी. अगर केंद्र इस झंडे को अप्रूवल देता है तो कर्नाटक जम्मू-कश्मीर के बाद देश का दूसरा राज्य बन जाएगा जिसका अपना झंडा है. Also Read - कर्नाटक में घरेलू यात्री विमान सेवाएं बहाल, लेकिन सख्‍त गाइडलाइंस के चलते कई उड़ानें रद्द

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हालांकि राज्य से भले ही इस झंडे को मंजूरी मिल गई हो लेकिन केंद्र सरकार की ओर से इसे मंजूरी देने पर अब भी संशय बना हुआ है. पहले भी केंद्रीय गृह मंत्रालय ने संविधान में ‘एक देश एक झंडा’ के सिद्धांत के आधार पर स्पष्ट किया था कि तिरंगा ही पूरे देश का ध्वज है. गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया था कि ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है जो राज्यों के लिए अलग झंडे की अनुमति देता हो या ऐसा करने को प्रतिबंधित करता हो. मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि कर्नाटक का अपना एक झंडा है जो जनता का प्रतिनिधित्व करता है सरकार का नहीं. राज्य में तमाम बड़े जनआयोजनों में इस झंडे का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन इस झंडे को स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस या अन्य सरकारी कार्यक्रमों में सरकार द्वारा नहीं फहराया जा सकता.

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समिति ने दिया था सुझाव

कन्नड एवं संस्कृति विभाग के प्रधान सचिव की अध्यक्षता में पिछले वर्ष एक समिति का गठन किया गया था. इस समिति में कार्मिक और प्रशासनिक सेवाओं, गृह, विधि और संसदीय मामलों के सचिवों, कन्नड़ साहित्य परिषद के अध्यक्ष, कन्नड विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष और कन्नड विश्वविद्यालय के कुलपति शामिल थे. सरकार द्वारा समिति का गठन किए जाने को लेकर बीजेपी और कुछ समूहों ने इसकी आलोचना की थी. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इससे पूर्व इसका बचाव करते हुए कहा था कि राज्य के लिए एक अलग ध्वज के खिलाफ कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है. उन्होंने सवाल किया था कि क्या संविधान में कोई प्रावधान हैं. क्या आप संविधान में कोई प्रावधान लाए हैं. क्या भाजपा के लोग प्रावधान ला रहे है तो फिर वे इस मुद्दे को क्यों उठा रहे है.

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2012 में उठी थी मांग

एक ओर जहां बीजेपी सरकार ‘एक राष्ट्र और एक निशान’ की बात करती है वहीं दूसरी तरफ कर्नाटक सरकार की ओर से अलग झंडे की मांग पर आगे बढ़ना विवाद को जन्म दे सकता है. इससे पहले जब 2012 में यह मुद्दा राज्य की विधानसभा में उठाया गया था. उस समय मंत्री गोविंद एम करजोल ने कहा था कि फ्लैग कोड हमें राज्य के लिए अलग झंडे की इजाजत नहीं देता. हमारा राष्ट्रीय ध्वज देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता का प्रतीक है.