Hijab Row: Karnataka HC ने कहा- कुछ ताकतों ने ड्रेस कोड को लेकर विवाद उत्पन्न किया और यह पूरे भारत में फैल रहा

कर्नाटक में हिजाब विवाद को लेकर मद्रास हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता प्रकट की और हैरानगी जताते हुए कहा- धर्म के नाम पर देश को बांटने की कोशिश की जा रही है

Published date india.com Updated: February 10, 2022 5:32 PM IST
Hijab Row: Karnataka High Court Verdict Today; Section 144 in Bengaluru, Schools Shut
Hijab Row: Karnataka High Court Verdict Today; Section 144 in Bengaluru, Schools Shut

Karnataka Hijab Row, Madras High Court,  Hijab Controversy, dress code, चेन्नई: कर्नाटक में हिजाब (Karnataka Hijab Row) को लेकर चल रहे विवाद को लेकर मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने आज गुरुवार को कहा कि कुछ ताकतों ने ड्रेस कोड (dress code) को लेकर विवाद (controversy) उत्पन्न किया है और यह पूरे भारत में फैल रहा है. कर्नाटक HC ने एक आदेश में कॉलेजों को फिर से खोलने का निर्देश दिया और कहा कि कोर्ट इस मामले में आदेश पारित करेगा. कोर्ट ने छात्रों से इस मामले के निपटारे तक इस तरह की धार्मिक चीजों को पहनने की जिद नहीं करने को कहा. कोर्ट का कहना है कि शांति और शांति बहाल होनी चाहिए, मामले को सोमवार के लिए स्थगित कर दिया.

कर्नाटक हाईकोर्ट ने देश में कुछ ताकतों द्वारा धार्मिक असौहार्द्र पैदा करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता प्रकट की और हैरानगी जताते हुए कहा कि क्या सर्वोपरि है-‘राष्ट्र या धर्म.’ इस मामले पर कर्नाटक उच्च न्यायालय ने स्कूलों में ड्रेस कोड पर राज्य सरकार के नियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई सोमवार के लिए स्थगित कर दी. हाईकोर्ट ने सरकार को राज्य में स्कूलों को फिर से खोलने का निर्देश दिया है.

कर्नाटक में हिजाब से जुड़े विवाद को लेकर छिड़ी बहस पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एम एन भंडारी और न्यायमूर्ति डी भरत चक्रवर्ती की प्रथम पीठ ने कहा कि कुछ ताकतों ने ‘ड्रेस कोड को लेकर विवाद उत्पन्न किया है और यह पूरे भारत में फैल रहा है.

मद्रास हाईकोर्ट पीठ ने कहा, यह सचमुच में स्तब्ध करने वाला है, कोई व्यक्ति हिजाब के पक्ष में है, कुछ अन्य टोपी के पक्ष में हैं और कुछ अन्य दूसरी चीजों के पक्ष में हैं. यह एक देश है या यह धर्म या इस तरह की कुछ चीज के आधार पर बंटा हुआ है. यह आश्चर्य की बात है.

न्यायमूर्ति भंडारी ने भारत के पंथनिरपेक्ष देश होने का जिक्र करते हुए कहा, मौजूदा विवाद से कुछ नहीं मिलने जा रहा है, लेकिन धर्म के नाम पर देश को बांटने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कुछ जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणियां कीं.

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कर्नाटक हाईकोर्ट का कहना है, “हम इस मुद्दे पर विचार कर रहे हैं कि क्या हेडस्कार्फ़ पहनना मौलिक अधिकारों के अंतर्गत आता है.” एचसी ने कहा, “हम इस बात पर भी विचार कर रहे हैं कि क्या हेडस्कार्फ़ पहनना धार्मिक अभ्यास का एक अनिवार्य हिस्सा है. वहीं, याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने कहा, कर्नाटक शिक्षा अधिनियम में एक समान संहिता के उल्लंघन के लिए दंड का कोई प्रावधान नहीं है. दंड मुख्य रूप से प्रबंधन के लिए हैं.

स्कूलों को बंद करना एक अच्छा कदम नहीं है, आवश्यक कार्रवाई करें और कक्षाएं संचालित करें

कर्नाटक हाईकोर्ट की तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने हिजाब विवाद पर सुनवाई करते हुए गुरुवार को सरकार को राज्य में स्कूलों को फिर से खोलने का निर्देश दिया. जैसे ही मुख्य न्यायाधीश रितु राज अवस्थी, न्यायमूर्ति कृष्णा एस. दीक्षित और न्यायमूर्ति खाजी जयबुन्नेसा मोहियुद्दीन की पीठ ने मामले की सुनवाई शुरू की, मुख्य न्यायाधीश ने महाधिवक्ता प्रभुलिंग नवादगी से राज्य में स्कूल खोलने के लिए कहा. उन्होंने कहा, “स्कूलों को बंद करना एक अच्छा कदम नहीं है. आवश्यक कार्रवाई करें और कक्षाएं संचालित करें. यह देखें कि कोई समस्या सामने न आए.” मामले को लेकर व्याप्त तनाव और हिंसा के बीच राज्य सरकार ने मंगलवार को राज्य के सभी स्कूलों और कॉलेजों में बुधवार से तीन दिनों की छुट्टी की घोषणा की थी.

पुलिस को कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए: मंत्री

कर्नाटक के गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंद्र ने कहा, पुलिस को छात्रों के साथ व्यवहार में अत्यधिक संयम बरतते हुए कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं. छात्रों को सांप्रदायिक तत्वों के झांसे में नहीं आना चाहिए जो हिजाब मुद्दे को सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का हथियार बनाने पर तुले हुए हैं.

पिछले महीने उडुपी से शुरू हुई थी हिजाब विवाद की शुरूआत

हिजाब विवाद की शुरूआत पिछले महीने उडुपी गवर्नमेंट प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज की कुछ छात्राओं के हिजाब पहनकर कॉलेज परिसर में जाने पर हुई थी, जिन्हें कक्षाओं में जाने की अनुमति नहीं दी गई थी. कॉलेज के अधिकारियों का कहना है कि जो छात्रा पहले बिना हिजाब के आती थीं, वे अब अचानक से हिजाब में आने लगी हैं. बाद में छात्राओं ने बिना हिजाब के कक्षाओं में जाने से इनकार करते हुए विरोध प्रदर्शन किया. यह मुद्दा एक विवाद बन गया और कर्नाटक के अन्य जिलों के साथ ही अन्य प्रदेशों में भी इस मुद्दे को उठाया जा रहा है. इसकी वजह से तनाव बना हुआ है और यहां तक कि हिंसा भी हो चुकी है.

(इनपुट: भाषा-आईएएनएस)

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