बेंगलुरु: देश में विख्‍यात दानकर्ता विप्रो समूह के प्रमुख अजीम प्रेम जी और उनके परिवार के तीन सदस्‍यों को कर्नाटक हाईकोर्ट से झटका लगा है. कर्नाटक हाईकोर्ट ने विप्रो लिमिटेड के संस्थापक अजीम प्रेमजी, उनकी पत्नी और तीन अन्य लोगों की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें एक आपराधिक मामले में 27 जनवरी को शहर की एक अदालत द्वारा उनके खिलाफ जारी समन को रद्द करने का अनुरोध किया गया था. Also Read - कोरोना काल में इन उद्योगपतियों ने दिया हजारों करोड़ का दान, जानिए- किस बिजनेसमैन ने दिया मुकेश अंबानी से 17 गुना ज्यादा

यह मामला कथित रूप से गैर-कानूनी तरीके से तीन कंपनियों से 45,000 करोड़ रुपए की संपत्ति को एक निजी ट्रस्ट और एक नवगठित कंपनी में स्थानांतरित करने से संबंधित है. विप्रो ने कहा कि चूंकि मामला विचाराधीन है, इसलिए वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेगी और प्रवर्तक समूह उचित कानूनी कार्रवाई करेंगे. Also Read - राम मंदिर निर्माण के लिए अब तक जमा हुए 2,100 करोड़ रुपये, जारी है धन जुटाने का अभियान

न्यायमूर्ति जॉन माइकल कुन्हा ने 15 मई को प्रेमजी, यास्मीन प्रेमजी पगल्तिवर्ति श्रीनिवासन और अन्य लोगों की याचिकाओं को रद्द कर दिया. Also Read - Coronavirus के खिलाफ लड़ाई में विप्रो, अजीम प्रेमजी फाउंडेशन का 1,125 करोड़ Rs. का योगदान

यह समन चेन्नई स्थित कंपनी इंडिया अवेक ट्रांसपैरेंसी द्वारा की गई शिकायत पर जारी किया गया था. आरोप है कि उपरोक्त तीन व्यक्तियों को तीन कंनियों की सम्पत्ति अमानत के तौर पर संभालने को दी गई थी. इन लोगों ने इन कंपनियों की 13,600 करोड़ रुपए की संपत्ति 2010.-12 के बीच पहले और दूसरे आरोपी द्वारा बनाए गए एक निजी न्यास को स्थानांतरित कर दिया.