बेंगलुरु: कर्नाटक की सरकार पर एक बार फिर संकट के बादल मंडराते हुए नजर आ रहे हैं. राज्‍य में सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार के लिए उस समय परेशानियां बढ़ गईं, जब इसमें सरकार में शामिल जनता दल (एस) की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष एएच विश्वनाथ ने अपने पद से इस्‍तीफा देते हुए गठबंधन के कामकाज के तरीके की आलोचना की और गठबंधन सहयोगी कांग्रेस के दो वरिष्ठ विधायकों ने लोकसभा में हार के लिए राज्य के नेताओं को निशाने पर लिया है. पार्टी के खास मामलों में दरकिनार किए जाने से नाराज विश्वनाथ ने कहा, ”मैं इस पराजय (पार्टी की) की नैतिक जिम्मेदारी लेता हूं.’

विश्वनाथ ने कहा, “कांग्रेस 20 सीटें हार गई और 10 सीटों में से 9 को बरकरार रखने में विफल रही. जद (एस) 6 सीटें हार गए.  2014 में जो हमने दो सीटें जीती थीं, हम सिर्फ एक सीट (हसन) को बरकरार रख सके.

ये घटनाक्रम दर्शाता है कि एक साल पुरानी एच डी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली सरकार की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रहीं, जबकि सत्तारूढ़ दल कैबिनेट विस्तार और मंत्रियों के विभागों में फेरबदल करके सरकार को बचाने की कोशिशों में लगा हुआ है.

सत्तारूढ़ गठबंधन की अनिश्चितताएं, मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल की जद्दोजहद के बीच जनता दल (एस) के विधायक दल की मंगलवार को बैठक हुई और मौजूदा राजनीतिक हालात पर चर्चा की गई. इसमें मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी, पार्टी प्रमुख एचडी देवेगौड़ा और मंगलवार को पार्टी की राज्य इकाई के प्रमुख पद से त्यागपत्र देने वाले एएच विश्वनाथ भी शामिल हुए.

इस बैठक में विश्वनाथ से अनुरोध किया गया कि वे अपने पद से इस्तीफा वापस ले लें पर वे टस से मस नहीं हुए. पार्टी सूत्रों ने यह जानकारी दी. पार्टी नेतृत्व ने विधायकों को यह भी नसीहत दी कि गठबंधन सहयोगी कांग्रेस को लेकर छींटाकशी से बचा जाए ताकि सरकार पर संकट न आए. उनसे यह भी कहा गया कि वे भाजपा के ऐसे किसी लालच में न फंसे जिससे सरकार अस्थिर हो.

पार्टी के खास मामलों में दरकिनार किए जाने से नाराज विश्वनाथ ने कहा, ”मैं इस पराजय (पार्टी की) की नैतिक जिम्मेदारी लेता हूं.”  उन्होंने समन्वय समिति के प्रमुख सिद्धरमैया पर कांग्रेस व जेडीएस के बीच समुचित समन्वय बनाने में नाकाम रहने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि सरकार के सही ढंग से चलने के लिए यह समिति एक न्यूनतम साझा कार्यक्रम नहीं बना सकी.

मौजूदा सरकार में 34 मंत्री हैं और इसमें कांग्रेस के 22 और जद(एस) के 12 सदस्य हैं. अभी इसमें तीन और लोगों को मंत्री बनाया जा सकता है. इसमें जद (एस) के कोटे से दो और कांग्रेस के कोटे से एक को मंत्री बनाए जाने का प्रस्ताव हैं.

लोकसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद राज्य में किसी बड़े नेता का यह पहला इस्तीफा है. राज्य की 28 लोकसभा सीटों पर पार्टी ने कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था पर उन्हें मात्र एक-एक सीट पर ही सफलता मिल पाई. बीजेपी 25 सीटों पर कामयाब रही, जबकि भाजपा के समर्थन से निर्दलीय प्रत्याशी सुमालता अंबरीश ने मांड्या से जीत हासिल की.

कांग्रेस के खेमे में भी इस तरह के विरोध की आवाजें सुनाई दे रही हैं. वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है. एक अन्य वरिष्ठ नेता रोशन बेग ने भी मंगलवार को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की आलोचना की. बेग पहले भी पार्टी नेताओं को खरीखोटी सुना चुके हैं. हालांकि बेग को पार्टी पहले ही कारण बताओ नोटिस जारी कर चुकी है. उधर, चिकबल्लापुर के विधायक सुधाकर ने कहा है कि सिद्धरमैया सरकार में मंत्री रहे इन लोगों को गठबंधन सरकार में मंत्री नहीं बनाया गया, इसलिए अब वे ऐसी बाते कर रहे हैं.