बेंगलुरू: कर्नाटक के ऊर्जा मंत्री डी.के. शिवकुमार ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर अति आत्मविश्वास का आरोप लगाते हुए मंगलवार को कहा कि उन्हें दो विधानसभा सीटों से चुनाव नहीं लड़ने की सलाह दी गई थी, लेकिन वे नहीं माने. उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार के मामले में कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दस फीसदी भी नहीं किया.

शिवकुमार ने कहा, “कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पिछले तीन महीनों में यहां आकर और राज्य में चुनाव प्रचार कर अपना सर्वश्रेष्ठ दिया, लेकिन यह स्थानीय नेताओं के लिए अच्छा संकेत नहीं है कि वे अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों का रुझान नहीं समझ सके.”

उन्होंने कहा कि दो जगह से चुनाव नहीं लड़ने की सलाह मिलने के बावजूद सिद्धारमैया ने बादामी और चामुंडेश्वरी विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ा. उन्हें लगता था कि वे दोनों विधानसभाओं को अच्छी तरह जानते हैं. कांग्रेस नेता ने जोर देकर कहा, “यह निर्णय उन्होंने लिया था क्योंकि वे विधानसभाओं को बेहतर समझते थे. हम अति आत्मविश्वास में थे; अंदरूनी रूप से हमने उन्हें सिर्फ एक विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की सलाह दी थी.”

यह पूछे जाने पर कि क्या सिद्धारमैया अति आत्मविश्वास से भरे थे, उन्होंने कहा, “बिल्कुल..यह सिद्दारमैया का आत्मविश्वास ही था जिसने हमें इस स्तर पर ला (गिरा) दिया.” सिद्धारमैया को बादामी सीट से जीत हासिल हुई है, जबकि चामुंडेश्वरी से उन्हें हार मिली है. शिवकुमार ने किसी मोदी लहर को भी नकारते हुए कहा, “उन्हें हमारी कमियों का फायदा मिला.”

इससे पहले मंगलवार को कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजे ने सभी पार्टियों को हैरान कर दिया. शुरुआत में चुनाव नतीजों ने बीजेपी को जश्न मनाने का मौका दिया लेकिन समय बीतने के साथ साथ बीजेपी को निराश किया और वह बहुमत से थोड़ा पहले ही अटक गई. दोपहर 3.30 तक आए नतीजों और रुझान के मुताबिक, बीजेपी 106 सीटों पर बढ़त बनाकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी. सीटों के इस समीकरण ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है. कांग्रेस और बीजेपी दोनों दिल्ली से लेकर बेंगलुरु तक सक्रिय हो गई हैं. दिल्ली से नेताओं को बेंगलुरु रवाना किया जा रहा है. इस बीच कांग्रेस ने सियासी दांव खेलते हुए जेडीएस के कुमारस्वामी को सीएम बनाने का दांव फेंका है. अब निगाहें राज्यपाल के उपर हैं कि वह किस पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते हैं.