Karnataka News: कर्नाटक में कागवाड़ के भाजपा विधायक श्रीमंत पाटिल ने शनिवार को कहा था कि भाजपा सरकार द्वारा कांग्रेस छोड़ने के समय उन्हें पैसे की पेशकश की गई थी.  मैंने पैसे नहीं लिए थे. मैंने कहा कि मुझे मंत्रीपद दिया जाए. उनके इस बयान पर राजनीति गरमा गई है.Also Read - Ajab-Gazab Bayan: कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री ने तो हद कर दी, लड़कियों को ये क्या कह दिया...जानिए

कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता सिद्धारमैया ने  श्रीमंत पाटिल के बयान पर कहा कि बीजेपी ने कांग्रेस और जेडीएस विधायकों को पैसे देने की पेशकश की थी. भाजपा ने उन्हें अपनी पार्टी में शामिल होने के लिए पैसे की पेशकश की थी और उन्होंने 25-35 करोड़ रुपये दिए हैं. श्रीमंत पाटिल (कर्नाटक विधायक) ने सही बयान दिया है. Also Read - Earthquake In Karnataka: सुबह-सुबह भूकंप के झटके से कांपी कर्नाटक की धरती, 3.2 मापी गई तीव्रता

अपने बयान से पलटे श्रीमंत पाटिल Also Read - स्कूल जा रही नाबालिग को दोस्त बताकर कार में बिठा लिया, जब होश आया तो बिस्तर पर पड़ी मिली लड़की

अपने दिए गए बयान पर विवाद बढ़ता देख श्रीमंत पाटिल ने पलटी मार दी और कहा कि मेरे पास पैसे लेकर कोई नहीं आया. मैं खुद उनके पास गया. उन्होंने मुझसे पूछा कि मैं उनका समर्थन क्यों करना चाहता हूं. मैंने उनसे कहा कि मुझे कुछ नहीं चाहिए, अगर वे सरकार बनाते हैं तो बस एक अच्छा पोर्टफोलियो मिलना चाहिए. अगर कोई पैसे की पेशकश भी करता है, तो भी मैं स्वीकार नहीं करूंगा. मैंने पैसे नहीं लिए.

इससे पहले श्रीमंत पाटिल ने ये कहा था…
शनिवार को श्रीमंत पाटिल ने कहा था कि कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस सरकार गिरने से पहले कांग्रेस छोड़ने और बीजेपी में शामिल होने के लिए पैसे की पेशकश की गई थी. बिना पैसे लिए भाजपा में शामिल हो गया. मुझसे पूछा गया कि मुझे कितना पैसा चाहिए लेकिन मैंने मना कर दिया और लोगों की सेवा के लिए मंत्री पद मांगा.मुझे नहीं पता कि मुझे इस सरकार में मंत्री क्यों नहीं बनाया गया, लेकिन मुझे अगले विस्तार में मंत्री पद देने का वादा किया गया है.

2019 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए थे पाटिल

श्रीमंत बालासाहेब पाटिल कर्नाटक के कागवाड़ विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं. जुलाई 2019 में उन्‍होंने पार्टी बदल ली थी. वह उन 16 विधायकों में से एक थे, जो कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) से बीजेपी में शामिल हुए थे, जिसके कारण तत्कालीन मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार गिर गई थी.

कर्नाटक में येडियुरप्पा सरकार बनने के बाद उन्हें मंत्री पद दिया गया था. हालांकि बीएस येडियुरप्पा के इस्तीफा देने और बसवराज बोम्मई के मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें कैबिनेट से हटा दिया गया था.