नई दिल्ली: कर्नाटक विधानसभा से इस्तीफा देने वाले कांग्रेस के 14 बागी विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने पर विचार किया जा रहा है. पार्टी के सूत्रों ने यह संकेत दिया. कांग्रेस पार्टी के एक वरिष्ठ सूत्र ने बताया, “बागी विधायकों ने सदन से इस्तीफा दे दिया है. जबकि उन्होंने पार्टी सदस्यों के रूप में इस्तीफा नहीं दिया है, इसलिए उन्हें अयोग्य ठहराया जा सकता है.” उन्होंने कहा कि इस्तीफा देने वाले पार्टी के विधायक अभी भी कांग्रेस के सदस्य हैं और वे कांग्रेस के व्हिप का पालन करने के लिए बाध्य हैं.

सूत्र ने कहा, “उन्होंने पार्टी के व्हिप का पालन नहीं किया है. इसलिए अब कांग्रेस उन्हें अयोग्य ठहरा सकती है.” इस्तीफे से पहले 225 सदस्यीय कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेस के पास कुल 79 विधायक थे, जबकि उसके गठबंधन सहयोगी जद (एस) के पास 37 विधायक थे. दो निर्दलीय और एक बसपा सदस्य के साथ गठबंधन में 118 सदस्य थे, जो साधारण बहुमत के निशान से केवल पांच अधिक थे. ‘व्हिप’ किसी राजनीतिक पार्टी द्वारा अपने विधायकों को उपस्थित होने और किसी बहस के दौरान पार्टी के निर्देशानुसार मतदान करने के लिए जारी किया गया आदेश है. अगर कोई विधायक व्हिप का पालन नहीं करता है, तो उन्हें अयोग्य ठहराया जा सकता है.

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संविधान के अनुच्छेद 164 (1 बी) में कहा गया है कि अयोग्य घोषित किए गए सदस्य को उसके कार्यकाल की समाप्ति तक या उसके दोबारा चुने जाने तक मंत्री नहीं बनाया जा सकता. पार्टी सूत्रों ने कहा कि अगर बागी विधायकों को दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य ठहराया जाता है और विधानसभा भंग नहीं की जाती है, तो उन्हें अगले चुनाव तक सदन में जाने की अनुमति नहीं होगी.

कर्नाटक विधानसभा में मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी द्वारा पेश किए गए विश्वास प्रस्ताव पर बहस चल रही है. कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष रमेश कुमार ने पिछले सप्ताह कहा था कि विश्वास मत के दौरान सभी दलों को सदन में अपना ‘व्हिप’ लागू करने की अनुमति दी जा सकती है. सदन में इसी मुद्दे पर बहस चल रही है. अगर व्हिप लगाने की अनुमति दी जाती है तो सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद सत्र में भाग नहीं लेने के लिए बागी विधायकों को अयोग्य ठहराया जा सकता है.