नई दिल्ली: कर्नाटक में सियासी उठापटक जारी है. कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार से दो निर्दलीय विधायकों के समर्थन वापस लेने के बाद महाराष्ट्र से भाजपा के एक मंत्री ने मंगलवार को दावा किया कि कुमारस्वामी नीत सरकार दो दिन में गिर जाएगी. वहीं मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी का कहना है कि उनकी सरकार को कोई खतरा नहीं है. सीएम ने कहा कि कांग्रेस के वे विधायक जो मुंबई में है, भले की मीडिया के संपर्क में नहीं है, लेकिन वे मेरे संपर्क में हैं. मेरी हर किसी से बात हो रही है. वे वापस आएंगे. हमारा गठबंधन सही चल रहा है. मैं रिलैक्स था और रिलैक्स हूं. चिंता न करें, खुश रहें.

वहीं हरियाणा में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने गुड़गांव के उस रिजॉट के बाहर प्रदर्शन किया जहां बीजेपी के विधायक ठहरे हुए हैं. प्रदर्शन करने वालों का कहना था कि कर्नाटक में बीजेपी खरीद फरोख्त कर रही है. प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां थीं जिन पर लिखा था कि विधायकों की खरीद फरोख्त बंद करो.

क्या है सरकार बनाने का गणित
कर्नाटक विधानसभा में 224 सीटें हैं. कांग्रेस की 80, जेडीएस की 37, बीएसपी के पास एक और दो निर्दलीय विधायक हैं. वहीं बीजेपी की 104 सीटें हैं और वह सबसे बड़ी पार्टी है. राज्य में बीजेपी को सरकार बनाने के लिए कांग्रेस और जेडीएस के 13 विधायकों का इस्तीफा दिलवाना होगा इसके बाद वह सरकार बनाने का दावा पेश कर सकती है. 2008 में बीजेपी इस फॉर्मूले से सरकार बना चुकी है जिसे ऑपरेशन कमल कहा जाता है. ऑपरेशन कमल’ का जिक्र 2008 में भाजपा द्वारा विपक्ष के कई विधायकों का दल बदल करवाकर तत्कालीन बी एस येदियुरप्पा सरकार की स्थिरता सुनिश्चत कराने के लिए किया जाता है.

इस तरह बन सकती है सरकार
224 सीटों वाले विधानसभा में 13 विधायकों के इस्तीफे के बाद सीटों की संख्या 111 हो जाएगी. इसके बाद सरकार बनाने के लिए 106 विधायकों की जरूरत होगी. बीजेपी के पास 104 विधायक हैं और उसे दो निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है. इस तरह बीजेपी सरकार बनाने का दावा पेश कर सकती है. हालांकि यह इतना आसान नहीं है. दूसरा तरीका ये है कि वह जेडीयू के दो तिहाई विधायकों को तोड़ ले और सरकार बनाने का दावा पेश कर दे. जेडीयू के 37 विधायक हैं. दो तिहाई विधायकों को तोड़ने का मतलब होगा 25 विधायकों को तोड़ना जो कि इस समय बीजेपी के लिए बहुत मुश्किल है.