बेंगलुरुः कर्नाटक में राजनीतिक संकट और गहरा गया है. आज सुबह में एक निर्दलीय विधायक के गठबंधन सरकार के मंत्री पद के इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस के एक और विधायक ने इस्तीफा देने की धमकी दी है. इस कारण मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की सरकार पर संकट गहरा गया है. वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस और जेडीएस के वरिष्ठ नेता भी अपनी सरकार बचाने की पूरी कोशिश में लगे हुए हैं. मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने आज कांग्रेस के बागी विधायक से किसी अज्ञात स्थान पर मुलाकात की. वहीं उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर के आवास पर एक बैठक के बाद गठबंधन सरकार के 22 में से 21 कांग्रेसी मंत्रियों ने इस्तीफे की पेशकश कर दी है.

इस बैठक के बाद परमेश्वर ने कहा कि नाराज विधायकों को समायोजित करने के लिए हम सभी पद छोड़ने को तैयार हैं. ताजा रिपोर्ट के मुताबिक एक मंत्री ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है. राज्य सरकार में कांग्रेस कोटे से मंत्री एवं बीदर उत्तर के विधायक रहीम महमूद खान ने कहा कि उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को अपनी समस्याओं के बारे में सूचित कर दिया है और उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर के निवास पर बैठक के बाद फैसले लेने की बात कही.

इधर, केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में कहा है कि कर्नाटक के सियासी संकट के पीछे बीजेपी की कोई भूमिका नहीं है. उन्होंने कहा कि बीजेपी का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है, हमारी पार्टी कभी भी खरीद-फरोख्त में शामिल नहीं रही है.राजनाथ सिंह ने कहा कि हमने विधायकों को तोड़कर सरकार गिराने की कोशिश नहीं की, ये हमारी परंपरा नहीं है.

कांग्रेस के नौ विधायकों और जद (एस) के तीन विधायकों ने शनिवार को इस्तीफा दे दिया था. इससे सरकार पर संकट मंडरा रहा है. कांग्रेस विधायक आनंद सिंह ने एक जुलाई को इस्तीफा दिया था. खेल एवं युवा सशक्तिकरण मंत्री खान ने बताया, “मेरे विभाग को इस साल केवल 15 करोड़ रुपये का बजट मिला और यह भी बस अभी जारी किया गया है. इस राशि में से 13 करोड़ रुपये पुराने बिलों को चुकाने में लग जाएंगे. मैं शेष दो करोड़ रुपये के साथ कर्नाटक भर में विभिन्न परियोजनाओं को कैसे पूरा करुंगा?” खान ने कहा कि वह बागी समूह के साथ नहीं जाना चाहते लेकिन स्थिति ने उन्हें फैसला लेने पर मजबूर किया है.

मंत्री ने कहा, “मैं आज बैठक (परमेश्वर के आवास पर) में शामिल होने जा रहा हूं. अगर मेरी समस्याएं नहीं सुनी गईं तो मुझे मजबूरन फैसला लेना होगा.” जद (एस)-कांग्रेस की गठबंधन सरकार के विधानसभा में कुल 118 विधायक हैं. इनमें इस्तीफा दे चुके विधायक भी शामिल हैं. इन 118 विधायकों में से अध्यक्ष के अलावा 78 कांग्रेस के, 37 जद (एस) के, बसपा का एक और दो निर्दलीय विधायक हैं. सदन में भाजपा के 105 विधायक हैं जहां बहुमत 113 होना चाहिए. अगर इस्तीफे स्वीकार होते हैं तो गठबंधन के सदस्यों की संख्या 105 पर आ जाएगी. अध्यक्ष का भी एक मत है.