कर्नाटक: कांग्रेस विधायक का बड़ा दावा, 24 घंटे में इस्तीफा दे सकते हैं सिद्धारमैया! नए CM पर सस्पेंस

Written By: Anjali Karmakar Updated by: Anjali Karmakar
Updated Date:May 27, 2026 5:35 PM IST

कर्नाटक कांग्रेस में एक साल से CM पद पर खींचतान जारी है. डीके शिवकुमार समर्थकों का दावा है कि 2023 में केंद्रीय नेतृत्व ने ढाई-ढाई साल की सत्ता का फॉर्मूला दिया था. इसलिए अब सिद्धारमैया को CM पद से इस्तीफा दे देना चाहिए.

कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. मौजूदा कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (Siddaramaiah) के इस्तीफे को लेकर अटकलें एक बार फिर से तेज हो गई हैं. इसकी वजह कांग्रेस विधायक एचए इकबाल हुसैन का वह बयान है, जिसमें उन्होंने दावा किया कि राज्य में अगले 24 घंटों में बड़ा राजनीतिक फैसला हो सकता है. सिद्धारमैया मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं.

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कांग्रेस विधायक के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है कि अगर सिद्धारमैया पद छोड़ते हैं, तो आखिर कर्नाटक का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? बताया जा रहा है कि पार्टी के भीतर लंबे समय से नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अंदरखाने बातचीत चल रही थी. खासतौर पर डिप्टी CM डीके शिवकुमार के समर्थक लगातार नेतृत्व परिवर्तन की मांग उठा रहे हैं. कांग्रेस सरकार बनने के समय भी यह चर्चा थी कि सत्ता साझा करने को लेकर कोई फॉर्मूला तय हुआ था. हालांकि, पार्टी ने सार्वजनिक तौर पर कभी इसकी पुष्टि नहीं की.

सूत्रों के मुताबिक, पहले सिद्धारमैया ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था. सिद्धारमैया ने पार्टी नेतृत्व से कहा था, "अगर मुझे हटाया गया तो पार्टी टूटेगी, क्योंकि 50-60 विधायक मेरे साथ हटेंगे. मैं डीके शिवकुमार के नीचे काम नहीं करूंगा." सूत्रों के मुताबिक, अब कहा जा रहा है कि सिद्धारमैया मान गए हैं. वो 28 मई को इस्तीफा दे सकते हैं. फिर शिवकुमार को CM बनाया जा सकता है. वहीं, सिद्धारमैया के बेटे को मंत्री पद मिल सकता है.

सिद्धारमैया के बेटे को मिल सकता है मंत्रीपद

असल में कांग्रेस नेतृत्व जानता है कि अधिकतर विधायक सिद्धारमैया के साथ हैं. वे कांग्रेस के एकमात्र OBC मुख्यमंत्री भी हैं. ऐसे में पार्टी ये बदलाव बेहद सावधानी से करना चाहती है, ताकि बगावत की स्थिति न पैदा हो. बता दें कि कर्नाटक से पहले बिहार में भी ऐसी ही स्थिति देखने को मिली थी. तब नीतीश कुमार ने CM पद से इस्तीफा दे दिया और राज्यसभा सांसद बने. इसके बाद सम्राट चौधरी CM बने. नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को बिहार का हेल्थ मिनिस्टर बनाया गया.

कांग्रेस का आरोप- भ्रम फैला रहा विपक्ष

दूसरी तरफ कांग्रेस के कुछ नेता इसे विपक्ष की ओर से फैलाया जा रहा भ्रम बता रहे हैं. उनका कहना है कि सरकार पूरी तरह स्थिर है. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया अपना कार्यकाल जारी रखेंगे. लेकिन, जिस तरह लगातार नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं सामने आ रही हैं, उसने राजनीतिक अटकलों को और हवा दे दी है.

कांग्रेस को घेरने में जुटी BJP

वहीं, BJP ने भी इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरना शुरू कर दिया है. विपक्ष का आरोप है कि कांग्रेस सरकार अंदरूनी कलह से जूझ रही है. सत्ता संघर्ष की वजह से प्रशासनिक काम प्रभावित हो रहे हैं. BJP नेताओं का कहना है कि सरकार जनता के मुद्दों से ज्यादा कुर्सी बचाने की राजनीति में उलझी हुई है.

कैसा रहा था कर्नाटक में 2023 का चुनाव?

कर्नाटक में 2023 को विधानसभा के चुनाव हुए थे. कुल 224 सीटों में से कांग्रेस ने 135 सीटें जीती थीं. BJP को 66 सीटें मिली थीं. JDS के खाते में 19 सीटें गईं. अन्य को 4 सीटें मिली थीं. शुरुआत में मुख्यमंत्री के नाम को लेकर सस्पेंस बना रहा. फिर आलाकमान के फैसले के तहत सिद्धारमैया CM बने. शिवकुमार ने डिप्टी CM की जिम्मेदारी संभाली.

कैसे शुरू हुआ विवाद?

डीके शिवकुमार के समर्थक विधायकों का कहना है कि 2023 में जब कांग्रेस की सरकार बनी थी, तब मुख्यमंत्री पद के लिए 2.5-2.5 साल की डील हुई थी. कर्नाटक में कांग्रेस सरकार का 20 नवंबर 2025 को 2.5 साल का कार्यकाल पूरा हुआ था. इसके बाद कुछ विधायक जो डिप्टी CM डीके शिवकुमार के समर्थक माने जाते हैं, वे दिल्ली जाकर खड़गे से मिले थे. जबकि, सिद्धारमैया समर्थक 2.5-2.5 साल की डील को नकारते आए हैं.

इससे पहले नवंबर 2025 में डीके शिवकुमार ने कहा था, "दूसरे नेताओं को मौका मिलना चाहिए. मैं लीडरशिप में रहूंगा. चिंता मत करिए, मैं फ्रंटलाइन में रहूगा. मैं रहूं या न रहूं, इससे फर्क नहीं पड़ता. मेरी कोशिश है कि अपने कार्यकाल में पार्टी के 100 ऑफिस बनवाऊं."

कैबिनेट फेरबदल के पक्ष में हैं सिद्धारमैया

सूत्रों के मुताबिक, सिद्धारमैया कैबिनेट फेरबदल के पक्ष में हैं. शिवकुमार चाहते हैं कि पार्टी पहले नेतृत्व परिवर्तन पर फैसला करे. पार्टी के अंदरूनी हलकों में यह भी माना जा रहा है कि अगर हाई कमान कैबिनेट विस्तार को मंजूरी देता है, तो इससे सिद्धारमैया के पूरे कार्यकाल (5 साल) तक टिके रहने का संकेत मिल सकता है.

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