नई दिल्ली. कर्नाटक में हुआ विधानसभा का चुनाव देश या कह लें दुनिया का पहला ‘वाट्सएप चुनाव’ था. चुनाव लड़ने वाले राजनीतिक दलों ने प्रचार के विभिन्न माध्यमों के अलावा, सोशल नेटवर्किंग एप्लीकेशन वाट्सएप के जरिए मतदाताओं को विपक्षी पार्टी के खिलाफ रोजाना हजारों-लाखों मैसेज भेजे. आप यह खबर पढ़कर चौंक जाएंगे, लेकिन अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट की मानें तो यह हकीकत है. अखबार में छपी एक खबर के अनुसार कर्नाटक में 12 मई को संपन्न हुए चुनाव के दौरान प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने जनता तक पहुंच बनाने के लिए 20 हजार से ज्यादा वाट्सएप ग्रुप का इस्तेमाल किया. ये ग्रुप एक मिनट के भीतर 15 लाख से ज्यादा लोगों तक पार्टियों के संदेश को प्रसारित कर देते थे. लोकतंत्र के लिए ‘वाट्सएप चुनाव’ को खतरा बताते हुए अखबार ने लिखा है कि इन सैकड़ों-हजारों संदेशों में अधिकतर फर्जी वीडियो या शब्दों-बयानों को तोड़-मरोड़कर बनाई गई क्लिपिंग्स होती थीं, जिसका इस्तेमाल इन पार्टियों ने अपनी विपक्षी पार्टी के खिलाफ किया. देश के पहले ‘वाट्सएप चुनाव’ में भारतीय जनता पार्टी ने विपक्षी कांग्रेस को हरा दिया. Also Read - पश्चिम बंगाल में बोले जेपी नड्डा, बहुत जल्द लागू होगा नागरिकता संशोधन कानून

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वाट्सएप का सबसे बड़ा यूजर है भारत

अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में वाट्सएप का इस्तेमाल कम होता है. लेकिन दुनिया के बड़े हिस्से में इसकी पहुंच व्यापक है. खासकर ब्राजील और मैक्सिको में इस एप का इस्तेमाल मैसेज और कॉल के अलावा कारोबार संबंधी कार्यों के लिए भी किया जाता है. वहीं भारत, वाट्सएप का सबसे बड़ा यूजर है. भारत में 20 करोड़ से ज्यादा लोग इस मैसेजिंग एप्लीकेशन का इस्तेमाल करते हैं. शुभकामना संदेशों के अलावा इस एप का इस्तेमाल वीडियो संदेशों और टेक्स्ट मैसेज के लिए धड़ल्ले से किया जाता है. वाट्सएप पर काम करने वाले कई ग्रुप्स रोजाना सैकड़ों की संख्या में संदेशों का प्रसारण करते हैं. इन संदेशों में क्या सही है या क्या गलत, इसे चेक करने के लिए कोई सिस्टम नहीं है. अलबत्ता तमिलनाडु में इस एप के जरिए फैले एक मैसेज के कारण ही हाल में सांप्रदायिक तनाव फैल गया था. बावजूद इसके वाट्सएप संदेशों के प्रसारण को लेकर कोई फैक्ट-चेक सिस्टम अब तक अमल में नहीं आया है. सरकार सिर्फ इंटरनेट सेवाएं रोककर ही ऐसे संदेशों का प्रसारण रोक सकती है. अखबार ने लिखा है कि पिछले साल सरकार ने 70 बार इंटरनेट सेवाएं ठप करने का आदेश दिया था, जबकि 2014 में ऐसा केवल 6 बार किया गया था.

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मैसेज के प्रसारण पर किसी का वश नहीं

वाट्सएप पर प्रसारित होने वाले संदेशों पर किसी का वश नहीं चलता. यहां तक कि कंपनी के लिए भी यह पता लगाना मुश्किल है कि कोई विवादित संदेश कहां से प्रसारित किया गया. वाशिंगटन पोस्ट ने इस पर चिंता जाहिर करते हुए लिखा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी से जुड़े कई वाट्सएप ग्रुप हैं, जो रोजाना हजारों-लाखों यूजर्स को हर सेकेंड में मैसेज भेजने में सक्षम हैं. इन संदेशों में भी कई बार सांप्रदायिक तनाव भड़काने वाले मैसेज भेजे जाते हैं. मंगलोर के भाजपा कार्यकर्ता विकास पुत्तूर के हवाले से अखबार ने लिखा है, ‘पार्टी के घोषणापत्र और अन्य जानकारियों को घर-घर में पहुंचाने के लिए इससे आसान उपाय और कोई नहीं है. इससे हम जमीनी हालात की जानकारी आसानी से पा लेते हैं.’ वहीं डिजिटल राइट्स कार्यकर्ता निखिल पाहवा ने अखबार को कहा, ‘एक बार वाट्सएप ग्रुप पर कोई संदेश प्रसारित हो जाए तो फिर उसे रोकना असंभव है. खासकर इसमें एक समस्या यह भी है कि हम यह पता नहीं लगा सकते कि यह मैसेज कहां से भेजा गया है. ऐसे में किसी राजनीतिक पार्टी के लिए फेक-न्यूज या किसी के संदेश को तोड़-मरोड़कर प्रसारित करना आसान हो जाता है.’

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फेसबुक ने लागू किया था फैक्ट-चेक प्रोग्राम

वाशिंगटन पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि वाट्सएप का स्वामित्व रखने वाली कंपनी फेसबुक ने कर्नाटक विधानसभा चुनावों के दौरान ‘बूम’ मीडिया के सहयोग से फैक्ट-चेक प्रोग्राम लॉन्च किया था. इसके तहत फेसबुक पर फर्जी पोस्ट्स, वीडियो या संदेश के प्रसारण की जांच की जाती थी. कैंब्रिज एनालिटिका के डाटा लीक प्रकरण के बाद फेसबुक ने दुनिया के कई देशों में ऐसे फैक्ट-चेक प्रोग्राम चलाए हैं. लेकिन इसी कंपनी ने वाट्सएप पर फर्जी संदेशों का प्रसारण रोकने को लेकर कोई कदम नहीं उठाया है. हालांकि कर्नाटक चुनावों में वाट्सएप के धड़ल्ले से इस्तेमाल को लेकर अखबार के सवालों के जवाब में कंपनी की ओर से एक स्पष्टीकरण जरूर दिया गया. कंपनी ने कहा, ‘हम अपने यूजर्स को और अधिक अधिकार देने की दिशा में काम कर रहे हैं ताकि वे एप पर आने वाले अनचाहे कंटेंट को ब्लॉक कर सकें.’ वाट्सएप के जवाब में यह भी कहा गया, ‘भारत के राजनीतिक दल कई बार अपने कार्यों के लिए वाट्सएप का इस्तेमाल करते हैं. कर्नाटक चुनाव से हमने बहुत कुछ सीखा है. हम इस पर काम कर रहे हैं कि किस तरह स्पैम या फर्जी खबरों को रोका जाए. भारत में अगले कुछ महीनों में होने वाले चुनावों को देखते हुए हम यूजर्स को जागरूक करने और उन्हें सुरक्षा मानकों के प्रति गंभीर बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं.’

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वाट्सएप पर नियंत्रण के लिए किए इंतजाम

सोशल मीडिया पर विवादित या फर्जी संदेशों के बेरोकटोक प्रसारण को रोकने के लिए दुनियाभर के देश प्रयास कर रहे हैं. कोलंबिया में इसके लिए एक वेबसाइट ‘ला सिला वेसिया’ बनाई गई है. इसने ‘वाट्सएप डिटेक्टर’ नामक टूल लॉन्च किया है, जो इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आने वाले फर्जी खबरों को चेक करता है. वहीं, मैक्सिको और इजिप्ट की सरकार ने फर्जी खबरों का प्रसारण रोकने के लिए हॉटलाइन सेवा की शुरुआत की है. जबकि भारत में वाट्सएप पर प्रसारित होने वाले संदेशों को रोकने की कोई व्यवस्था नहीं है. यहां पुलिस के पास शिकायत दर्ज होने के बाद सामान्य कानून के तहत कार्रवाई की जाती है. लेकिन इससे सोशल मीडिया पर गलत या फर्जी संदेशों के बेरोकटोक प्रसारण पर नियंत्रण लगाना मुश्किल है.