Ayodhya Ram Mandir: 'भगवान राम के आदेशों से बनी है रामलला की मूर्ति', अरुण योगीराज ने चमत्कारिक घटनाओं का किया खुलासा

500 साल के लंबे इंतजार के बाद रामलला अपने मंदिर विराजमान हो चुके हैं. भगवान राम की प्रतिमा बनाने वाले अरुण योगीराज की हर कोई तारीफ कर रहा है. ऐसे में मूर्तिकार ने प्रतिमा बनाते वक्त उनके साथ हुए चमत्कारिक घटनाओं का जिक्र किया है.

Published date india.com Published: January 24, 2024 11:32 PM IST
Ayodhya Ram Mandir: 'भगवान राम के आदेशों से बनी है रामलला की मूर्ति', अरुण योगीराज ने चमत्कारिक घटनाओं का किया खुलासा

Ayodhya Ram Mandir: जब से रामलला की मूर्ति मंदिर के गर्भगृह में स्थापित की गई है तभी से कर्नाटक के मूर्तिकार अरुण योगीराज (Arun Yogi Raj) सुर्खियों में हैं. प्रभु श्रीराम की मूर्ति की मन-मोह लेने वाली तस्वीरें सामने आने के बाद से हर कोई खुशी के आंसू रोया. भगवान के चेहरे की कोमल मुस्कान और सजीव आंखों को देख हर कोई आश्चर्यचकित रह गया. जैसे-जैसे राम भक्त दर्शन के लिए मंदिर पहुंच रहे हैं, हर कोई नम आंखें लेकर लौटता है. ऐसा क्यों हो रहा है इसका खुलासा खुद मूर्तिकार अरुण योगीराज ने किया. यहीं नहीं मूर्ति बनाते वक्त उनके साथ हुए चमत्कारिक घटनाओं का भी जिक्र किया है.

रामलला की मूर्ति बनाने में लगे 7 महीने

अरूण बताते हैं कि प्रभु श्रीराम ने जैसे-जैसे उन्हें आदेश दिये, मैंने उन्हीं का पालन करते हुए मूर्ति बनाई. मूर्तिकार ने बताया कि रामलला की प्रतिमा को तैयार करने में उन्हें 7 महीने लगे. इस दौरान वह दुनिया से अलग हो गए और घर-परिवार के साथ समय बिताया. इन सबके बीच, योगीराज ने एक दिलचस्प किस्सा भी शेयर किया. उन्होंने बताया कि मूर्ति बनाते वक्त एक बंदर रोज उनके घर आकर मूर्ति के दर्शन कर लौट जाता था.

‘मूर्ति बनाना मेरे लिए काफी मुश्किल रहा’

मूर्तिकार अरुण ने बताया कि रामलला की मूर्ति बनाना उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण था. उन्होंने कहा, मुझे मूर्ति शिल्प शास्त्र का पालन करते हुए बहुत सावधानी से बनानी थी. क्योंकि भगवान राम को 5 साल के रूप में दिखना था. ऐसे में मूर्ति में बच्चे की मासूमियत झलकनी चाहिए. योगीराज ने कहा कि मंदिर ट्रस्ट ने मूर्ति को पूरा करने के लिए विशिष्ट मानदंड तय किए थे- जैसे मुस्कराता चेहरा, दिव्य दृष्टि, 5 वर्षीय स्वरूप और राजकुमार व युवराज लुक.

मैं खुद को बहुत भाग्यशाली मानता हूं…

अरूण योगीराज ने कहा कि उनका परिवार पिछले 300 वर्षों से मूर्ति बनाने का काम कर रहा है, और इसके लिए वह खुद को बहुत भाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें प्रभु राम ने यह काम सौंपा. मूर्तिकार कहते हैं कि पिछले दो दिनों से उन्हें बहुत खुशी है क्योंकि लोग रामलला की मूर्ति को पसंद कर रहे हैं. उन्होंने कहा रामलला की मूर्ति सिर्फ उनकी नहीं बल्कि सबकी है.

वह कहते हैं कि पिछले सात महीने में वह दुनिया से दूर हुए और बच्चों के साथ समय बिताया. उन्होंने बताया कि उनके एक बेटा और एक बेटी है. जब वह अपनी 7 साल की बेटी को मूर्ति की तस्वीर दिखाते और पूछते कि रामलला कैसे दिखते हैं? तो वह जवाब देती थी- एक दम बच्चे जैसे ही है अप्पा

भगवान राम ने दिए थे आदेश…

उन्होंने ये भी बताया कि केवल मूर्ति को पूरा करना ही पर्याप्त नहीं था, बल्कि उसमें बच्चे की कोमलता और मासूमियत दिखाना भी जरूरी थी. अरूण ने कहा ‘मेरा ऐसा विश्वास है कि मुझे श्रीराम ने जैसा आदेश दिया…मैं वैसे ही मूर्ति बनाने लगा.’ योगीराज का दावा है कि निर्माण होते समय रामलला अलग थे…और स्थापित होने के बाद अलग हैं. मुझे लगा कि ये मेरा काम नहीं है…ये तो बहुत अलग दिखते हैं. उन्होंने कहा कि मूर्ति अलग-अलग चरणों में अलग दिखती है…प्राण-प्रतिष्ठा में रामलला बिल्कुल अलग लग रहे थे.

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