नई दिल्ली: पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कर्नाटक की तीन लोकसभा सीटों पर 3 नवंबर को होने जा रहे उपचुनाव पर कांग्रेस और बीजेपी दोनों की नजर है. शिमोगा, मंड्या और बेल्लारी में तीन नवंबर को वोटिंग है, लेकिन शिमोगा ने राजनीतिक पंडितो का ध्यान अपनी ओर खींचा है. कर्नाटक के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे इस उपचुनाव में अपनी किस्तम आजमा रहे हैं. अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले राज्य में इस चुनाव को सेमीफाइनल के तौर पर देखा जा रहा है. बीजेपी के पूर्व मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा के बेटे बी वाई राघवेंद्र (45) बीजेपी से उम्मीदवार हैं. पूर्व कांग्रेस सीएम एस बंगारप्पा के बेटे मधु बंगारप्पा (52) जेडीएस और कांग्रेस के संयुक्त उम्मीदवार हैं, जबकि जनता दल के पूर्व मुख्यमंत्री जे एच पटेल के बेटे महिमा पटेल (58) जेडी यू) की ओर से मैदान में उतरे हैं. Also Read - कांग्रेस ने सामूहिक पलायन पर सरकार से पूछे सवाल, कहा- गरीबों की जिंदगी मायने रखती है या नहीं

पिछले कुछ समय से तीनों राजनीति में सक्रिय हैं. हालांकि जीत हासिल करने के लिए तीनों को ही अपने-अपने पिता की विरासत का ही भरोसा है. मई में हुए विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के बाद बी एस येदियुरप्पा को इस लोकसभा सीट से इस्तीफा देना पड़ा था. बताया जा रहा है कि इस सीट पर सीधी लड़ाई बी एस येदियुरप्पा के बेटे राघवेंद्र और कांग्रेस सीएम एस बंगारप्पा के बेटे मधु बंगारप्पा के बीच है. Also Read - केजरीवाल ने लोगों को गीता पाठ करने की दी सलाह, कहा- गीता के 18 अध्याय की तरह लॉकडाउन के बचे हैं 18 दिन 

2009 के लोकसभा चुनाव में बंगारप्पा और येदियुरप्पा के परिवार के बीच लड़ाई में तत्कालीन मुख्यमंत्री येदियुरप्पा के बड़े बेटे राघवेंद्र को जीत मिली थी. 2014 में, बंगारप्पा की मृत्यु के तीन साल बाद, येदियुरप्पा ने नरेंद्र मोदी लहर में जीत हासिल की. आम चुनाव से लगभग 7 महीने पहले होने वाले उपचुनाव बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए साख की लड़ाई बन गए हैं. येदियुरप्पा अपने बेटे को जिताने की कोशिश कर रहे हैं वहीं कांग्रेस-जेडीएस यह दिखाना चाहते हैं कि उनका गठबंधन मजबूत हुआ है और लोकसभा चुनाव में भी दोनों पार्टियां साथ लड़ेंगी. Also Read - कर्नाटक में लॉकडाउन के दौरान शराब न मिलने से परेशान दो शख्स ने किया सुसाइड

येदियुरप्पा सहयोगी और पूर्व मंत्री शोभा करंदलाजे ने चुनाव प्रचार की शुरुआत ही यह कहते हुए हुई थी कि उपचुनाव के बाद येदियुरप्पा फिर से सीएम बन जाएंगे. बीजेपी शिमोगा में मजबूत स्थिति में है. 8 में 7 विधानसभा चुनाव में उसने जीत हासिल की थी. इस निर्वाचन क्षेत्र में लगभग 20 प्रतिशत लिंगयत समुदाय की आबादी है वहीं 20 प्रतिशत एससी और एसटी की आबादी है जो बीजेपी के साथ है. हालांकि महिमा पटेल के मैदान में उतरने से बीजेपी के लिंगायत वोट कट सकते हैं. वहीं कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यक वोटों पर निर्भर हैं.