नई दिल्ली: कर्नाटक सरकार इस साल भी 18वीं सदी के मैसूर के शासक टीपू सुल्‍तान की जयंती मनाने जा रही है. सरकार 2016 से टीपू सुल्तान की जयंती मना रही है. हर साल यह जयंती 10 नवंबर को मनाई जाती है. शनिवार को सरकार टीपू जयंती मनाएगी. बीजेपी राज्य सरकार के इस फैसले का विरोध कर रही है. शुक्रवार को बेंगलुरु में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया. गुरुवार को कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा ने टीपू जयंती मनाने के राज्य सरकार के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि हम टीपू जयंती का विरोध कर रहे हैं. इस जयंती की कोई सराहना नहीं करेगा. राज्य के हित के लिए सराकर को इसे रोकना चाहिए. टीपू जयंती मनाकर सरकार केवल मुस्लिम समाज को संतुष्ट करना चाहती है.

हालांकि कर्नाटक की जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन की सरकार का कहना है कि बीजेपी टीपू जयंती समारोह के मुद्दे पर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश कर रही है. कर्नाटक के मंत्री डीके शिवकुमार ने कार्यक्रम को सही बताते हुए कहा, टीपू सुल्तान का इतिहास काफी लंबा है. अगर हम उनकी जयंती मनाते हैं, तो इसमें मुझे कहीं कोई बुराई नजर नहीं आती. बीजेपी का अपना राजनैतिक अजेंडा है. वो बस हिंदू और अल्पसंख्यकों के बीच मतभेद पैदा करना चाहते हैं.

वहीं केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े ने राज्य सरकार से कार्यक्रम के निमंत्रण पत्र पर उनका नाम शामिल नहीं करने का आग्रह किया है. हालांकि, परमेश्वर ने कहा कि हेगड़े का नाम पहले ही शामिल किया जा चुका है और अब यह उनके ऊपर है कि वह कार्यक्रम में शामिल होना चाहते हैं, या नहीं. बीजेपी के अनुसार टीपू कन्नड़ भाषा और हिंदू धर्म के विरोधी थे.

इससे पहले कर्नाटक सरकार ने भाजपा पर आरोप लगाया था कि वह 10 नवंबर को मनाए जाने वाले ‘टीपू जयंती’ समारोहों के मुद्दे पर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश कर रही है. राज्य सरकार ने उस दिन कानून व्यवस्था की स्थिति बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी है. मैसूर रियासत के 18वीं सदी के शासक टीपू सुल्तान के जयन्ती समारोह को 2016 से राज्य सरकार 10 नवंबर को मनाते आ रही है.

उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर का कहना था कि भाजपा टीपू जयंती मुद्दे पर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास कर रही है. हम उन्हें ऐसा नहीं करने देंगे. कानून-व्यवस्था खराब करने के किसी भी प्रयास से सख्ती से निपटा जाएगा. उन्होंने कहा कि प्रदर्शनों के बावजूद कार्यक्रम बिना किसी हस्तक्षेप के आयोजित होगा. गौरतलब है कि भाजपा और आरएसएस ने 10 नवंबर 2016 को समारोह आयोजित करने के सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए इसे अल्पसंख्यक तुष्टीकरण करार दिया था.