कन्नड़ भाषा को अनिवार्य बनाने के लिए कानून बनाएगी कर्नाटक सरकार, जानें इससे जुड़े सभी अपडेट्स

सरकार के इस प्रस्ताव को प्रस्तावित 'कन्नड़ भाषा व्यापक विकास विधेयक'(Kannada Language Comprehensive Development Bill) में शामिल किया गया है, जिसके विधानसभा में पेश और पारित होने की उम्मीद है.

Published date india.com Published: September 20, 2022 10:27 PM IST
Karnataka Election
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भारतीय जनता पार्टी (BJP) नीत कर्नाटक सरकार राज्य में कन्नड़ भाषा को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है. इसके तहत कर्नाटक सरकार ने प्रस्ताव दिया है कि जो कंपनियां नौकरियों में कन्नड़ (इस भाषा को बोलने वाला स्थानीय नागरिक) को पहली वरीयता नहीं देती हैं, वे छूट और प्रोत्साहन के पात्र नहीं होंगी. सरकार के इस प्रस्ताव को प्रस्तावित ‘कन्नड़ भाषा व्यापक विकास विधेयक’(Kannada Language Comprehensive Development Bill) में शामिल किया गया है, जिसके विधानसभा में पेश और पारित होने की उम्मीद है.

कर्नाटक के एक वरिष्ठ मंत्री ने बताया कि, ‘प्रस्तावित विधेयक को आगामी कैबिनेट बैठक में पेश किए जाने की उम्मीद है और इसे पारित किया जाएगा.’ शिक्षा और संचार में भाषा को महत्व देने के अलावा यह मसौदा विधेयक राज्य में काम करने वाले गैर-कन्नड़ लोगों को कन्नड़ बोलना और लिखना सिखाने पर जोर देता है.

तो कन्नडिगा कहलाने के योग्य कौन है?

प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, एक ‘कन्नडिगा’ को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में परिभाषित किया गया है जो ‘कम से कम 15 वर्ष’ के लिए एक अधिवासित नागरिक है और उसने कक्षा 10 तक कन्नड़ को एक भाषा के रूप में पढ़ना, लिखना और बोलना सीखा है. यह प्रस्ताव ल 1984 में पेश की गई सरोजिनी महिषी रिपोर्ट के अनुरूप है, जिसने कन्नड़ और कन्नड़ की रक्षा के लिए 58 सिफारिशें की थीं.

‘कन्नड़ को अनिवार्य बनाने के लिए आएगा कानून’

हाल ही में ‘हिंदी दिवस’ मनाने के खिलाफ कुछ हलकों में विरोध और गुस्से के बीच कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा था कि उनकी सरकार राज्य में कन्नड़ को ‘अनिवार्य’ बनाने के लिए एक कानून ला रही है. कन्नड़ कार्यकर्ता कई वर्षों से कन्नड़ को प्रशासनिक भाषा के रूप में पूर्ण रूप से लागू करने की मांग कर रहे हैं.

हालांकि मुख्यमंत्री ने यह निर्दिष्ट नहीं किया कि यह प्रशासनिक भाषा के संदर्भ में है या इसका दायरा इससे परे है. सूत्रों के अनुसार, उनका इशारा संभवत: प्रस्तावित ‘कन्नड़ भाषा व्यापक विकास विधेयक’ की ओर था, जिसका उद्देश्य कन्नड़ को प्रधानता देने के प्रयासों को और मजबूत करना है.

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