नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान ने द्विपक्षीय संबंधों में जारी तनाव से प्रभावित हुए बिना बृहस्पतिवार को ऐतिहासिक करतारपुर गलियारे को चालू करने संबंधी समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए. इससे अब भारत के सिख श्रद्धालु पाकिस्तान स्थित पवित्र दरबार साहिब तक जा पाएंगे. यह गलियारा भारत के पंजाब में डेरा बाबा नानक गुरुद्वारे को करतापुर स्थित दरबार साहिब से जोड़ेगा जो अंतरराष्ट्रीय सीमा से महज चार किलोमीटर दूर पाकिस्तान में पंजाब प्रांत के नरोवाल जिले में स्थित है.

करतारपुर तीर्थयात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण शुरु, ऐसे करेंगे रजिस्ट्रेशन
करतारपुर गलियारे को चालू करने के समझौते पर भारत और पाकिस्तान के हस्ताक्षर करने के बाद तीर्थयात्रियों के लिये ऑनलाइन पंजीकरण बृहस्पतिवार को शुरू हो गया. समझौते पर हस्ताक्षर के बाद जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार तीर्थयात्रियों के पंजीकरण के लिए आज एक ऑनलाइन पोर्टल (prakashpurb550.mha.gov.in) चालू हो गया. तीर्थयात्रा पर जाने के इच्छुक लोगों को इस पोर्टल में ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा. तीर्थयात्रियों को यात्रा की तिथि से तीन-चार दिन पहले उनके पंजीकरण की पुष्टि के बारे में एसएमएस या ईमेल के जरिए सूचना दी जाएगी. एक ‘इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल ऑथराइजेशन’ भी जारी किया जाएगा.

यात्रियों को ये सामान रखना होगा पास
तीर्थयात्री जब यहां पैसेंजर टर्मिनल बिल्डिंग पहुंचेंगे, तब उन्हें अपने पासपोर्ट के साथ ‘इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल ऑथराइजेशन’ भी अपने पास रखना होगा. समझौते के मुताबिक भारत यात्रा की तारीख से 10 दिन पहले पाकिस्तान को तीर्थयात्रियों की सूची भेजेगा. यात्रा की तारीख से चार दिन पहले तीर्थयात्रियों की इसकी पुष्टि भेजी जाएगी. पाकिस्तान ने भारत को लंगर और प्रसाद वितरण के लिए पर्याप्त व्यवस्था करने का भरोसा दिलाया है.

कौन-कौन कर सकेगा इस गलियारे का इस्तेमाल
बयान में कहा गया है कि सभी धर्मों के भारतीय तीर्थयात्री एवं भारतीय मूल के लोग गलियारे का इस्तेमाल कर सकेंगे और वीजा मुक्त यात्रा कर सकेंगे.

कब तक खुलेगा करतारपुर गलियारा
करतारपुर गलियारा सूर्योदय से सूर्यास्त तक खुला रहेगा. सुबह तीर्थयात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्रियों को उसी दिन शाम तक लौटना होगा और यह गलियारा सालों भर चालू रहेगा. सिवाय अधिसूचित दिनों को छोड़ कर, जिस बारे में पूर्व सूचना दे दी जाएगी. तीर्थयात्रियों के पास अकेले या समूह में जाने की और पदयात्रा करने का विकल्प होगा.

पाकिस्तान को करतारपुर तीर्थयात्रा से होगी तीन करोड़ डॉलर से अधिक की वार्षिक आय
पाकिस्तान को करतारपुर तीर्थयात्रा से तीन करोड़ 65 लाख डॉलर तक की वार्षिक आय होने का अनुमान है. एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि तीर्थयात्रियों से सेवा शुल्क के रूप में पाकिस्तान को सालाना 259 करोड़ रुपए (भारतीय मुद्रा) मिलेंगे. यह पाकिस्तान के लिए विदेशी मुद्रा का अन्य स्रोत होगा. उन्होंने बताया कि चूंकि पांच हजार तीर्थयात्रियों को पाकिस्तान के करतारपुर में गुरुद्वारा दरबार साहिब जाने की इजाजत है. इसमें प्रत्येक तीर्थयात्री से रोजाना 20 डॉलर सेवा शुल्क लिया जाएगा. इस हिसाब से प्रति दिन पाकिस्तान को 1,00,000 डॉलर की आय होगी. यह तीर्थयात्रा साल के 365 दिन चलेगी तो पाकिस्तान को इससे 3,65,00,000 डॉलर की आय होगी.

क्या-क्या सामान ले जा सकेंगे यात्री
पाकिस्तान के करतारपुर में गुरुद्वारा दरबार साहिब के दर्शन के लिये जाने वाले श्रद्धालु अपने साथ वाई-फाई-ब्रॉडबैंड उपकरण, भारत या पाकिस्तान की क्षेत्रीय अंखडता को चुनौती देने वाले झंडे-बैनर, शराब और अन्य कई वस्तुएं अपने साथ नहीं ले जा सकेंगे. इन वस्तुओं को श्रद्धालुओं के लिये प्रतिबंधित सूची में रखा गया है. हालांकि इसमें कृपाण को शामिल नहीं किया गया है. पोर्टल (prakashpurb550.mha.gov.in) पर यह सूची डाली गई है. सूची के मुताबिक आग्नेयास्त्र और गोला बारूद, विस्फोटक पदार्थ, मादक पदार्थ, सभी प्रकार की कृपाणों को छोड़कर चाकू और ब्लेड, जाली नोट, मोहर और सिक्के, भारत और पाकिस्तान की बाहरी सीमाओं के गलत चित्रण वाले मानचित्र और साहित्य ले जाने पर मनाही है. इसके अलावा भारत अथवा पाकिस्तान की क्षेत्रीय अखंडता को चुनौती देने वाले या संभावित रूप से दोनों देशों में सांप्रदायिक सद्भाव के लिए हानिकारक झंडे, बैनर, मीडिया सामग्री और साहित्य ले जाने पर भी रोक है. इसके अलावा सूची में और भी कई वस्तुएं शामिल हैं.

यात्री अधिकतम 11,000 रुपए और सात किलो का एक बैग ही ले जा सकेंगे
पाकिस्तान के करतारपुर में गुरूद्वारा दरबार साहिब जाने वाले तीर्थयात्री अधिकतम 11,000 रुपए और सात किलोग्राम का एक बैग ही ले जा सकेंगे. उन्हें धर्मस्थल के अलावा कहीं ओर जाने की इजाजत नहीं होगी. गृह मंत्रालय ने करतारपुर के तीर्थयात्रियों के लिए ‘‘दिशा-निर्देश’’ जारी किए हैं. इसके मुताबिक, 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों और 75 वर्ष या अधिक उम्र के लोगों को समूह का हिस्सा बनकर यात्रा करनी होगी. तीर्थयात्रा के दौरान पर्यावरण के अनुकूल सामग्री (जैसे कपड़े के बैग) का इस्तेमाल करना होगा और क्षेत्र की स्वच्छता को बनाए रखना होगा. तीर्थयात्री सुबह के वक्त रवाना होंगे और उन्हें उसी दिन लौटना होगा. गृह मंत्रालय ने कहा है कि वहां केवल 11,000 रुपए नकदी ले जायी जा सकती है. इसके अलावा पेयजल समेत सात किलो तक का केवल एक ही बैग ही ले जाने की इजाजत होगी.

तेज आवाज में संगीत की इजाजत नहीं
तेज आवाज में संगीत बजाना और बिना अनुमति अन्य लोगों की तस्वीरें लेने की मंजूरी नहीं होगी. प्रत्येक श्रद्धालु को 20 डॉलर शुल्क का भुगतान करना होगा.

(इनपुट भाषा)