नई दिल्ली: करतारपुर कॉरिडोर अपने उद्घाटन से पहले पाकिस्तान के साथ विवादों में फंस गया है. ऐसा पाकिस्तान द्वारा पवित्र सिख तीर्थस्थल को शुल्क मुक्त नहीं करने के रुख की वजह से है. करतारपुर साहिब गुरुद्वारा भारतीय सीमा से करीब 4.5 किलोमीटर की दूरी पर पाकिस्तानी पंजाब के नरोवल जिले में है. करतारपुर साहिब गुरुद्वारा सिखों के लिए परम पूजनीय है. यहां सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव ने अपने जीवन के 18 साल बिताएं.

सिख लंबे समय से इस पवित्र स्थल पर जाने की मांग कर रहे थे और उनकी भावनाओं के मद्देनजर भारत व पाकिस्तान ने बीते साल, 2019 के 31 अक्टूबर तक एक कॉरिडोर निर्माण पर सहमति जताई. इसका निर्माण गुरु नानक देव के 550वीं जयंती वर्षगांठ के एक हफ्ते पहले हो जाना तय था. दोनों पक्षों ने कई दौर की बातचीत कर तौर-तरीकों पर चर्चा की और अधिकांश मुद्दों को सुलझा लिया लेकिन एक विशेष मामले पर पाकिस्तान अडिग रहा और इससे दोनों देशों के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर करने में देरी हो रही है.

पाकिस्तान ने हर तीर्थयात्री पर 20 डॉलर का सेवा शुल्क कर लगाने का फैसला किया है और भारत उससे ऐसा नहीं करने का आग्रह कर रहा है, क्योंकि उनमें ऐसी समझ बनी थी कि तीर्थयात्रा मुफ्त होगी. इस विवाद से समझौते पर हस्ताक्षर होने में देरी हो गई है, जिस पर 20 अक्टूबर को हस्ताक्षर होना तय था, लेकिन पाकिस्तान के अड़ियल रवैए पर भारत की निराशा के बावजूद अब इस पर बुधवार को हस्ताक्षर होगा. चूंकि, समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हो सका तो तीर्थयात्रा के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 20 अक्टूबर से शुरू नहीं हो सकी, जिसकी योजना बनी थी.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने सोमवार को कहा, “पाकिस्तान का हर तीर्थयात्री से प्रति यात्रा के लिए 20 डॉलर सेवा शुल्क लगाने पर जोर बना हुआ है.” उन्होंने कहा कि यह निराशाजनक है, जब भारत के तीर्थयात्रियों की यात्रा के ज्यादातर तत्वों पर समझ बन गई है. कुमार ने एक बयान में कहा, “समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए सहमत होते हुए पाकिस्तान सरकार से एक बार फिर तीर्थयात्रियों पर सेवा शुल्क लगाने पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया गया है. भारत अपने अनुसार किसी भी समय समझौते में संशोधन कर सकता है.”

(इनपुट आईएएनएस)