नई दिल्ली: भारत सरकार ने 9 नवंबर को करतारपुर गलियारे से गुरुद्वारा करतारपुर साहिब के लिए ‘जत्थे’ में जाने वाले 575 भारतीय तीर्थयात्रियों की सूची को पाकिस्तान के साथ शेयर किया था. लेकिन अब भारत सरकार ने कहा है कि उसे इस पर पाकिस्तान की तरफ से कोई पुष्टि नहीं मिली है. भारत सरकार ने मंगलवार को पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि उसने सभी फैसले एकतरफा लिए हैं.

सरकारी सूत्रों ने एएनआई को बताया, “9 नवंबर को तीर्थयात्रा करने के लिए प्रमुख सिख नेताओं और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की सूची जो उद्घाटन ‘जत्थे’ का हिस्सा हैं, को पाकिस्तान भेज दिया गया है. लेकिन पाकिस्तान ने अभी भी इस सूची को लेकर भारत को कोई पुष्टि नहीं की है.”

भारत सरकार ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने अब तक भारत की तरफ से किसी भी एडवांस टीम को करतारपुर साहिब जाने की अनुमति नहीं दी है जो ये समीक्षा कर सके कि वहां सुरक्षा व्यवस्था कैसी है. सूत्रों ने बताया, “कई महत्त्वपूर्ण लोग इस उद्घाटन ‘जत्थे’ के पार्ट के रूप में यात्रा कर रहे हैं. लेकिन, पाकिस्तान ने भारत की किसी भी एडवांस टीम को करतारपुर साहिब जाकर व्यवस्था देखने की अनुमति नहीं दी है.”

यह कहते हुए कि पाकिस्तान ने सभी फैसलों को एकतरफा लिया हैं, भारत ने आरोप लगाया कि पड़ोसी देश ने कुछ महत्वपूर्ण जानकारी जैसे कि उपलब्ध चिकित्सा सुविधा और तीर्थयात्रियों के लिए सुरक्षा व्यवस्था के बारे में अपडेट नहीं किया है. “पाकिस्तान ने इस मामले में हमारे इनपुट को ध्यान में रखे बिना उद्घाटन ‘जत्थे’ के कार्यक्रम और समय पर एकतरफा फैसला किया है. तीर्थयात्रियों के लिए उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था जैसी महत्वपूर्ण जानकारी भारत के साथ साझा नहीं की गई हैं.”

इसके अलावा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के एक ट्वीट को लेकर भी भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है जिसमें इमरान खान ने बिना पासपोर्ट यात्रा का जिक्र किया था. भारत ने आरोप लगाया कि इमरान खान के ट्वीट के संदर्भ में एमओयू में संशोधन करने के लिए पाकिस्तान की ओर से कोई प्रस्ताव नहीं आया है. भारत ने कहा, “पाकिस्तान के पीएम के ट्वीट से पूरी तरह भ्रम की स्थिति पैदा हुई है कि तीर्थ यात्रा करने के लिए किसी भी पासपोर्ट की आवश्यकता नहीं होगी. जबकि साइन किए गए एमओयू में इसका उल्लेख है. इमरान खान के ट्वीट के बाद पाकिस्तान ने साइन किए गए एमओयू में किसी तरह के संशोधन की बात भी नहीं की है।”

बता दें कि केंद्र सरकार ने कहा था कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी उन 575 लोगों में शामिल हैं जो गुरद्वारा दरबार साहिब जाने वाले उद्घाटन जत्थे में शामिल होंगे. इसकी सूचि भारत ने पहले ही पाकिस्तान को दी हुई है लेकिन पाक की तरफ से इस पर कोई पुष्टि नहीं की गई है.

वहीं मंगलवार को सिख धर्म के प्रवर्तक गुरु नानक देव की 550वीं जयंती का उत्सव मनाने के लिए भारत से 2000 से अधिक सिख तीर्थयात्री पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित गुरुद्वारा ननकाना साहिब पहुंच चुके हैं. उल्लेखनीय है कि इस सप्ताह ही करतारपुर गलियारे का उद्घाटन होना है. गुरुद्वारा ननकाना साहिब उस स्थान पर है, जहां गुरु नानक देव का जन्म हुआ था. वर्ष 2019 को उनके 500वें प्रकाश पर्व या जयंती वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है. विस्थापित न्यास संपत्ति बोर्ड (ईटीपीबी) के प्रवक्ता ने कहा कि करीब 2,200 सिख वाघा सीमा के रास्ते यहां आ चुके हैं और ईटीपीबी के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनकी आगवानी की.

उन्होंने बताया कि इस दौरान ये तीर्थयात्री पंजाब प्रांत में स्थित अन्य गुरुद्वारों के दर्शन भी करेंगे और नौ नवंबर को करतारपुर गलियारे के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे. वे 12 नवंबर को प्रकाश पर्व के अवसर पर आयोजित मुख्य कार्यक्रम में भी शामिल होंगे. उन्होंने बताया कि ये तीर्थयात्री वापस अपने देश 14 नवंबर को रवाना होंगे. तीर्थयात्रियों के समूह के प्रमुख गुरमीत सिंह ने कहा कि वे प्यार और शांति का संदेश लाए हैं. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा सिखों के लिए करतारपुर गलियारे को खोलने के फैसले को हमेशा याद रखा जाएगा.