चेन्नई। चेन्नई के मरीना बीच पर लाखों लोगों ने द्रविड़ राजनीति के अगुवा मुथुवेल करूणानिधि को बुधवार को अंतिम विदाई दी. मद्रास हाई कोर्ट के सुबह आए फैसले के बाद सरकार ने आखिरकार कलैनार को मरीना पर अंतिम विश्राम की जगह दे दी और लाखों प्रशंसकों, समर्थकों, तमाम हस्तियों की अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि के बीच उन्हें दफनाया गया. थलैवर (नेता) को अंतिम विदा देने के लिए पूरे देश के बड़े और रसूखदार लोग आज चेन्नई में जमा थे. बेहद कम उम्र में स्कूल छोड़ने वाले करुणानिधि ने अपने दशकों लंबे सार्वजनिक जीवन में लेखन, सिनेमा और राजनीति तीनों ही क्षेत्रों में बड़ा नाम बनाया और उनमें अपना अमूल्य योगदान किया.

94 साल की उम्र में निधन

11 दिन तक अस्पताल में जीवन और मृत्यु के बीच चले संघर्ष के बाद 94 वर्षीय करुणानिधि का मंगलवार शाम को निधन हो गया. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच. डी. कुमारस्वामी, केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चन्द्रशेखर राव और आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चन्द्रबाबू नायडू सहित देशभर से तमाम बड़े नेता करुणानिधि को श्रद्धांजलि देने पहुंचे.

दिग्गज नेता जुटे

माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, माकपा नेता प्रकाश करात, केरल के पूर्व मुख्यमंत्री ओमान चांडी और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य मंत्री अखिलेश यादव भी अंतिम यात्रा में मौजूद थे. करुणानिधि का अंतिम संस्कार आज पूरे सैन्य राजकीय सम्मान के साथ किया गया. पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा, राहुल गांधी, केन्द्रीय मंत्री और तमिलनाडु से भाजपा के एकमात्र लोकसभा सदस्य पोन राधाकृष्णन, पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वी. नारायणस्वामी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने मरीना बीच पर दिवंगत नेता को पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी.

जयललिता की तरह करुणानिधि को भी दफनाया क्यों गया?

करुणानिधि के पुत्र और उनके संभावित उत्तराधिकारी एम. के. स्टालिन को उनके पिता के शरीर पर लिपटा तिरंगा सौंपा गया. द्रमुक प्रमुख की पत्नी राजति अम्मल और अन्य पुत्रों और पुत्रियों ने अपने पिता के चरणों पर पुष्प अर्पित किए. अंतिम क्षणों की बात करें तो करुणानिधि के शव वाले ताबूत को कब्र में उतारे जाने से पहले स्टालिन ने अपने पिता के पैर छुए और वह रोते रहे. उनकी सबसे छोटी बेटी और राज्यसभा सदस्य कनिमोई ने अंतिम बार अपने पिता के सिर और गालों को बड़े प्रेम से स्पर्श किया. चूंकि करुणानिधि ने खुद को नास्तिक और तर्कवादी घोषित किया था, इसलिए उनके अंतिम संस्कार के दौरान कोई हिन्दू रीति-रिवाज नहीं हुआ.

मद्रास हाई कोर्ट में हुई सुनवाई

आज दिन में हजारों की संख्या में द्रमुक समर्थक, नेता और तमाम सेलिब्रेटी राजाजी हॉल में तिरंगा में लिपटे सुनहरे ताबूत में रखे करुणानिधि के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शनों को पहुंचे. वहीं दूसरी ओर उन्हें दफनाए जाने को लेकर मद्रास हाई कोर्ट के कमरे में तीखी बहस चलती रही. गौरतलब है कि राज्य की अन्नाद्रमुक सरकार ने करुणानिधि को दफनाने के लिए मरीना पर जगह देने की द्रमुक की मांग खारिज कर दी थी. सरकार ने पारिस्थितिकी के संबंध में लंबित याचिकाओं का हवाला देते हुए विपक्षी दलों का अनुरोध मानने से इनकार कर दिया था. द्रमुक तुरंत इस मामले में मद्रास हाई कोर्ट पहुंचा. अदालत ने उसकी याचिका पर आंशिक रूप से मध्य रात्रि तक सुनवाई की और फिर सुबह आठ बजे से मामले की सुनवाई हुई.

अदालत ने अपना फैसला द्रमुक के पक्ष में सुनाया और थलैवर को अंतत: मरीना बीच पर अपने गुरू और पूर्व मुख्यमंत्री सी. एन. अन्नादुरई के बगल में अंतिम विश्राम की जगह मिली. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एच. जी. रमेश और न्यायमूर्ति एस. एस. सुन्दर की खंड पीठ ने कहा, जगह आवंटित करने में कोई कानूनी बाधा नहीं है. याचिकाकर्ता की ओर से उपलब्ध करायी गयी सूचनाओं के आधार पर उनके अंतिम संस्कार के लिए जगह मुहैया कराएं.

जयललिता और करुणानिधि के बाद इनके हाथ आ सकती है तमिलनाडु की सियासत

पीठ ने कहा कि जगह आवंटित करने में कोई कानूनी बाधा नहीं है. मरीना पर द्रविड़ नेताओं के लिए पहले भी जगह आवंटित की गई है. मौजूदा मामले में अलग रूख अपनाने की जरूरत नहीं है. अदालत के फैसले का करीब आठ किलोमीटर दूर राजा जी हॉल के पास जमा हजारों समर्थकों ने कलैनार का नाम अमर रहे के नारे के साथ स्वागत किया.

गमगीन हालत में स्टालिन

करूणानिधि के पुत्र और द्रमुक के कार्यकारी अध्यक्ष स्टालिन बेहद दुखी और गमगीन हालत में अपने पिता के ताबूत के पास खड़े थे, लगातार सुबक रहे थे. तभी अदालत ने उनके पिता को मरीना पर जगह देने का फैसला सुनाया, जो इस दुख और गम के महौल में उनके लिए कुछ शांति और सुखद क्षण लेकर आया. इससे पहले जब मुख्यमंत्री के. पलानीस्वामी करुणानिधि को श्रद्धांजलि देने के लिए राजा जी हॉल पहुंचे तो द्रमुक समर्थकों ने हमें मरीना चाहिए के नारों के साथ उनका स्वागत किया.

अदालत का आदेश अन्नाद्रमुक के लिए बड़ा झटका था जिसने करूणानिधि को मरीना पर जगह नहीं देने का हर संभव प्रयास कर लिया था. सरकार ने यहां तक कहा था कि अन्नाद्रमुक के संस्थापक एम. जी. रामचन्द्रन और जे. जयललिता को मरीना पर इसलिए जगह मिली कि उनका निधन मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए हुआ. करीब आधी सदी तक द्रमुक के प्रमुख रहे करुणानिधि का निधन चूंकि मुख्यमंत्री पद रहते हुए नहीं हुआ है, ऐसे में उन्हें मरीना पर जगह नहीं दी जा सकती है.

पीएम मोदी भी चेन्नई पहुंचे

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने करूणानिधि को पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की. सफेद कुर्ता-चूड़ीदार पहने मोदी हाथ जोड़े हुए कुछ देर तक दिवंगत नेता की पत्नी राजति अम्मल से बातें करते रहे. उन्होंने स्टालिन के हाथ पकड़े और उनसे बात की. मिनट-दर-मिनट अपने प्रिय नेता को अंतिम विदा देने वालों की संख्या बढ़ती गयी, भारी भीड़ में तिल धरने की जगह नहीं बची थी, यहां तक कि पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठी भांजनी पड़ी. भीड़ में शामिल प्रशंसकों में से कुछ बेहोश हो गए, तमाम घायल हो गए, जिसके बाद स्टालिन को लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करनी पड़ी. मरीना पर भी हालात इससे अलग नहीं थे.

हजारों की संख्या में लोग सड़क पर खड़े थे, कुछ पेड़ों पर तो कुछ स्ट्रीट लइटों पर चढ़े थे ताकि सेना के वाहन से लाये जा रहे अपने दिवंगत नेता के अंतिम दर्शन कर सकें. स्टालिन और परिवार के अन्य पुरूष सदस्य सैन्य वाहन के पीछे-पीछे चल रहे थे. उनके चारों ओर सुरक्षाकर्मी पूरी मुस्तैदी के साथ तैनात थे. ऊपर से जहां तक देखो वहां तक द्रमुक का लाल-काला झंडा नजर आ रहा था. धीरे-धीरे सूर्यास्त के साथ करुणानिधि के ताबूत को भी कब्र में उतारा गया. इसके साथ ही एक लोकप्रिय द्रविड़ नेता के जीवन का भी सूर्यास्त हो गया.